आंकड़ों में सचः आरटीआइ पर पहरा

आरटीआइ कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार पर आरटीआइ को कमजोर और सूचना आयुक्तों के अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाया है

इलस्ट्रेशनः तन्मय चक्रवर्ती
इलस्ट्रेशनः तन्मय चक्रवर्ती

हर भारतीय को अपने सरकारी प्रतिनिधियों से सवाल पूछने और उनकी जवाबदेही तय करने का हक देने वाले लोकतांत्रिक फैसले की 14वीं वर्षगांठ पर गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसी प्रणाली का विकास करने के लिए दृढ़ हैं जिसके जरिए सरकारी कामकाज का ब्यौरा नागरिकों के सामने इस तरह उपलब्ध हो कि आरटीआइ आवेदनों की संख्या खुद कम हो जाएगी.''

शाह ने आरटीआइ को 'भारतीय लोकतंत्र के सफर का मील का पत्थर' करार दिया. पर आरटीआइ कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार पर आरटीआइ को कमजोर और सूचना आयुक्तों के अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाया है. बीते साल करीब दर्जन भर राज्यों के कार्यकर्ताओं ने सरकार से प्रस्तावित आरटीआइ संशोधनों के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन किया था. उनकी शिकायत थी कि सरकार आयुक्तों की नियुक्ति में देरी कर रही है जिससे आरटीआइ आवेदनों का अंबार बढ़ता जा रहा है. राज्य और केंद्र, दोनों ही स्तरों पर सूचना आयुक्तों के कामकाज की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, लाखों की संख्या में आरटीआइ आवेदन लंबित हैं और इंतजार अंतहीन.

3,02,08,656

आरटीआइ आवेदन 2005-06 से 9 अक्तूबर, 2019 तक दाखिल किए गए, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक

78,93,687

आवेदन केंद्र को भेजे गए. राज्य: महाराष्ट्र (61.8 लाख), तमिलनाडु (26.9 लाख), कर्नाटक (22.8 लाख), केरल (21.9 लाख), गुजरात (12.7 लाख)

83

आरटीआइ कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के मुताबिक; 165 हमले, 180 मामलों में उत्पीडऩ/धमकी. आधिकारिक डाटा उपलब्ध नहीं

19 महीने

अनुमानित इंतजार की अवधि सीआइसी को की गई आरटीआइ अपील में. अप्रैल 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में यह 10 महीना ही था, अप्रैल, 2018 तक सीआइसी के पास 23,541 शिकायतें लंबित

21.33 लाख

अपील और शिकायतें 05/06 से 18/19 तक केंद्र और राज्य आयोगों को मिलीं. सबसे ज्यादा: तमिलनाडु (4,61,832) केंद्र (2,79,344), महाराष्ट्र (2,77,228)

27.86 करोड़ रु.

बजट मंजूर किया गया सीआइसी (वित्त वर्ष 2018) के लिए, वित्त वर्ष 2017 में 24.99 करोड़ रुपए.. वित्त वर्ष 2018 में 23 राज्य सूचना आयोगों के लिए करीब 107 करोड़ रुपए

2.26 लाख करोड़ रु.

का जुर्माना 2006 से अब तक सूचना संबंधी आवेदनों को इनकार करने या गलत जानकारी देने के सिलसिले में केंद्र और राज्य सूचना अधिकारियों पर लगाया गया. वहीं, वित्तीय वर्ष 2018 में 33.6 लाख रु.

250 रु.

प्रति दिन से लेकर अधिकतम 25,000 रु. तक का जुर्माना जन सूचना अधिकारी पर हो सकता है अगर उसने आदेवनों या अपीलों की सूचना नहीं दी उसमें देर किया की

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