100 दिन मोदी-सुरक्षा जाल बढ़ाने की जरूरत
इसने अपने एजेंडे में शामिल एक महत्वपूर्ण वादे को पूरा करते हुए तीन तलाक को अपराध घोषित किया, लेकिन महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए अधिक चौतरफा पहल की आवश्यकता

अब तक क्या किया गया
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2019, जो एक साथ तीन तलाक को अपराध घोषित करता है, पारित हुआ
बाल यौन अपराध संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 को संशोधनों के साथ पारित किया गया, जिसमें बच्चों के गंभीर यौन उत्पीडऩ के लिए मौत की सजा और नाबालिगों के खिलाफ किए जाने वाले अन्य अपराधों के लिए कड़े दंड शामिल हैं
श्रम कानूनों को सरल, तर्कसंगत बनाने और मिलाने के लिए श्रमिकों से जुड़े चार कानूनों—औद्योगिक संबंध; सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा; स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति से जुड़े कानूनों का विलय करके मजदूरी संहिता, 2019 बनाया. हालांकि आलोचकों का दावा है कि यह अधिनियम नियोक्ताओं के हक में पक्षपाती है
उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2019, पारित जो अन्य बातों के अलावा, एक वर्ग के रूप में उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देने, उनकी रक्षा करने और उन्हें लागू करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के गठन का प्रस्ताव है
क्या यह पर्याप्त है?
हालांकि सामाजिक कल्याण के लिए अंतरिम बजट में अनुमानित 46,492 करोड़ रुपए के आवंटन को बढ़ाते हुए जुलाई के बजट में 50,850 करोड़ रुपए कर दिया गया फिर भी, यह कुल बजटीय आवंटन का सिर्फ 1.8 प्रतिशत था. सभी दलों ने बाल यौन अपराध संरक्षण (संशोधन) अधिनियम का समर्थन किया था लेकिन तीन तलाक के अपराधीकरण को महिलाओं की सुरक्षा के बहाने मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप के प्रयास के रूप में माना गया.
महिलाओं के कल्याण को लेकर अपनी मंशा को साबित करने के लिए, सरकार महिला आरक्षण विधेयक को पेश करने की कोशिश करेगी, जिससे महिलाओं को विधायिका में 33 प्रतिशत आरक्षण मिल सके.
और क्या करने की जरूरत है
भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा (लिंचिंग) के खिलाफ पूरे देश में कड़े कानून लागू करें
बलात्कार पीडि़तों को प्रशासनिक निष्ठुरता और आरोपियों द्वारा होने वाले उत्पीडऩ से बचाएं
संस्कृति के संरक्षण के नाम पर गुंडागर्दी के खिलाफ कानून लाया जाए
हर धर्म की निराश्रित विधवाओं के संपत्ति अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए
समलिंगी व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2019 पारित करें
हस्त सफाई कर्मियों के रोजगार निषेध एवं उनके पुनर्वास कानून के प्रावधानों में संशोधन करके इसे और अधिक कठोर बनाना होगा
बुजुर्गों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 में संशोधन करना
***