महाराष्ट्रः इनसानी पंजे में बाघिन
महाराष्ट्र के वन विभाग की एक टीम के अवनि नामक बाघिन को मार गिराने के बाद ही तीखी बहस शुरू हो गई कि क्या सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर इस कथित आदमखोर हो चली बाघिन को निशाना बनाया गया.

दो नवंबर की रात महाराष्ट्र के वन विभाग की एक टीम के अवनि नामक बाघिन को मार गिराने के बाद ही तीखी बहस शुरू हो गई कि क्या सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर इस कथित आदमखोर हो चली बाघिन को निशाना बनाया गया.
इस घटना से क्षुब्ध नजर आ रही केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इसके लिए महाराष्ट्र के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार को जिम्मेदार ठहाराया और कहा, ''यह हत्या है.'' वहीं मुनगंटीवार ने गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अधकचरी जानकारी के आधार पर अपनी राय बना रही हैं. उधर, बाघिन की मौत के खिलाफ वन्यजीव कार्यकर्ताओं सहित अन्य लोग भी प्रदर्शन पर उतर आए.
अविश्वसनीय रूप से राज्य का वन विभाग पिछले दो साल के दौरान करीब 200 गाड्र्स, पैराग्लाइडर्स, 104 ट्रैप कैमरे, चार हाथी और दो इतालवी जासूसी कुत्तों की तैनाती के बावजूद अवनि (टी-1) को पकडऩे में नाकाम रहा था. यहां तक कि उसने अचूक निशानेबाजों शफात अली खान और उनके बेटे असगर की भी सेवाएं ले रखी थीं.
इन खबरों के बाद कि जून, 2016 से अगस्त, 2018 के दौरान अवनि ने 13 लोगों को मार डाला और इनमें से कुछ के अंग खा गई, राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ए.के. मिश्र ने 4 सितंबर को आदेश दिया था कि इस बाघिन को अगर सुरक्षित तरीके से बेहोश करना मुमकिन न हो, तो उसे मार दिया जाए. इसे बाघ संरक्षण से जुड़े जेरिल बनाइत ने चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्य वन विभाग के आग्रह पर मिश्र के आदेश को कायम रखा.
मुनगंटीवार ने दावा किया कि बेहोश करने में नाकाम रहने के बाद जब बाघिन ने वन विभाग की टीम पर हमला किया, तब असगर ने उस पर सिर्फ एक गोली चलाई थी. लेकिन शव परीक्षण से पता चला कि बेहोश करने के लिए दागा गया डार्ट उसकी त्वचा को भेद भी नहीं पाया था. मगर इससे यह आरोप लगाने का आधार मिल गया कि दरअसल बाघिन को मारने के बाद लीपा-पोती करने के लिए बाद में उस पर डार्ट दागा गया.
शव परीक्षण से यह भी पता चला कि अवनि ने कम से कम चार-पांच दिनों से कोई शिकार नहीं किया था या कुछ खाया नहीं था. 119 किलो वजन की इस बाघिन की खूब सारा खून बहने और श्वसन प्रणाली के नाकाम होने के कारण मौत हो गई. उसे उसके धड़ के नीचे बाईं ओर गोली दागी गई जिसने उसके कंधे को भेदकर उसके फेफड़ों को नुक्सान पहुंचा दिया.
अवनि के मारे जाने पर जहां वन्यजीव प्रेमियों ने 11 नवंबर को मुंबई में प्रदर्शन किया, तो वहीं यवतमाल के जंगलों के नजदीक के गांवों के निवासियों ने इसका जश्न मनाया. वसंतराव नाइक शेती स्वावलंबन मिशन नामक राज्य स्तरीय निगम के प्रमुख और कृषि कार्यकर्ता किशोर तिवारी मेनका गांधी पर क्षेत्र के आदिवासियों के हितों का विरोध करने का आरोप लगाते हैं. केंद्रीय मंत्री ने यह मुद्दा अपने आध्यात्मिक गुरु प्रेम साई को मदद पहुंचाने के लिए उठाया है, जो कि यवतमाल से भाजपा का टिकट चाहते हैं.
इस बीच, मुनगंटीवार ने यह पता लगाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है कि अवनि को मारने में मानक प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं. अपने मंत्री का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस ने मुनगंटीवार के इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया. लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षक कहते हैं कि दरअसल फडऩवीस को मुनगंटीवार को किनारे लगाने का एक मौका मिल गया है. मुनगंटीवार को केंद्रीय नितिन गडकरी का करीबी समझा जाता है और वे महाराष्ट्र के भावी नेता के रूप में अपनी छवि चमका रहे हैं.
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