सर्वश्रेष्ठ जिले
बिहार में चावल का कटोरा कहे जाने वाले इस जिले में राज्य भर में साक्षरता दर सबसे अधिक 75.6 प्रतिशत है. शायद यह स्वास्थ्य के मामले में भी उसके बेहतरीन रिकॉर्ड को दर्शाता है. अस्पतालों में प्रसव 2007-08 में 48.5 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 80.7 प्रतिशत हो गया.

इंडिया टुडे की ओर से 2003 में शुरू किए गए राज्यों की दशा और दिशा (एओटीएस) सर्वेक्षण में समय-समय पर हर राज्य में जिलों के कामकाज का आकलन किया जाता है जिसमें दस मापदंडों को शामिल किया जाता है. ये मापदंड हैं—शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, जल एवं स्वच्छता, कृषि, सेवा, उद्योग, कानून-व्यवस्था, संपन्नता और समग्र विकास. हर मापदंड प्रमुख कारकों का एक मिश्रित सूचकांक होता है. ये कारक उपलब्ध तुलनीय आंकड़ों के आधार पर मापनीय होते हैं.
शिक्षा
सर्वश्रेष्ठ जिलाः किशनगंज
राज्य के एकमात्र मुस्लिम बहुल—68 प्रतिशतकृजिले किशनगंज में 2001 में सबसे कम 31.1 प्रतिशत साक्षरता दर थी जो 2011 में बढ़कर 55.5 प्रतिशत हो गई. इस जिले में कुल 1,814 स्कूल हैं, जिनमें 4,16,744 छात्र पढ़ाई करते हैं. यहां 2009-10 में प्रति 1,00,000 की आबादी पर 80.4 प्राइमरी स्कूल थे जिनकी संख्या 2016-17 में बढ़कर 89 हो गई. स्कूलों में लड़कों के मुकाबले लड़कियों का अनुपात 2009-10 में 97.3 प्रतिशत से बढ़कर 2016-17 में 101.9 प्रतिशत पहुंच गया.
सर्वाधिक सुधराः लखीसराय
मध्य बिहार के इस जिले में साक्षरता दर 2001 में 48 प्रतिशत से बढ़कर 2011 में 62.4 प्रतिशत हो गई. इस जिले के सभी 340 गांवों में प्राथमिक शिक्षा की कुछ न कुछ सुविधाएं हैं. इस जिले में 486 प्राइमरी स्कूल हैं. 2009-10 में हर 1,00,000 की आबादी पर प्राइमरी स्कूलों की संख्या 67.3 से बढ़कर 2016-17 में 75.9 हो गई.
स्वास्थ्य
सर्वश्रेष्ठ जिलाः रोहतास
बिहार में चावल का कटोरा कहे जाने वाले इस जिले में राज्य भर में साक्षरता दर सबसे अधिक 75.6 प्रतिशत है. शायद यह स्वास्थ्य के मामले में भी उसके बेहतरीन रिकॉर्ड को दर्शाता है. अस्पतालों में प्रसव 2007-08 में 48.5 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 80.7 प्रतिशत हो गया. इसी अवधि में 12 से 23 महीने के बच्चों का टीकाकरण 41.5 प्रतिशत से बढ़कर 70.5 प्रतिशत हो गया. यहां 9,641 व्यक्तियों पर औसतन एक स्वास्थ्य संस्था है.
सर्वाधिक सुधराः कैमूर
जिला मजिस्ट्रेट के रूप में एक योग्य सर्जन के होने से ही कैमूर जिले ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. डॉ. नवल किशोर चौधरी को पता था कि डिलीवरी की व्यवस्था को सुधारना होगा. वे कहते हैं, "मई 2018 में जब मैं यहां का डीएम बना तो मैंने ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करनी शुरू की. मैंने खुद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की जांच की और सुनिश्चित किया कि डॉक्टर और अन्य कर्मचारी इन केंद्रों में उपस्थित रहें.'' कैमूर में 7,819 लोगों की आबादी पर एक स्वास्थ्य संस्था है. यहां प्रति 1,00,000 व्यक्तियों पर 4 डॉक्टर हैं, जो राज्य में प्रति 1,00,000 की आबादी पर 3 डॉक्टर के औसत से कहीं ऊपर है.
बुनियादी ढांचा
सर्वश्रेष्ठ जिलाः शेखपुरा
शेखपुरा के जिला मजिस्ट्रेट योगेंद्र सिंह के मुताबिक, बुनियादी ढांचे के निर्माण में इस सकारात्मक अंतर की मुख्य वजह विकास परियोजनाओं, जिनमें सड़कों का निर्माण भी शामिल है, की बहु-आयामी निगरानी है. वे कहते हैं, "उदाहरण के लिए हम हर हफ्ते न केवल सड़कों की लंबाई के बारे में जानकारी लेने पर जोर देते हैं, बल्कि यह भी पता लगाते हैं कि कितनी बस्तियों को इससे जोड़ा गया है.'' शेखपुरा में सड़कों का घनत्व 2010 में प्रति 1,00,000 की आबादी पर 93.6 किमी से बढ़कर 2017 में 183.11 किमी हो गया.
सर्वाधिक सुधराः मधेपुरा
कोसी नदी की बाढ़ से बार-बार तबाह होने के कारण बिहार की पीड़ा कहे जाने वाले मधेपुरा ने जबरदस्त वापसी की है. इस जिले में 2010 में प्रति 1,00,000 की आबादी पर सड़कों का घनत्व 41.8 किमी था जो 2017 में बढ़कर 149.4 किमी हो गया. बिजली के मामले में भी मधेपुरा ने उल्लेखनीय तरक्की हासिल की है. 2007-08 में यह मात्र 9 प्रतिशत थी जो 2015-16 में बढ़कर 53.3 प्रतिशत हो गई.
जल एवं स्वच्छता
सर्वश्रेष्ठ जिलाः बेगूसराय
अगस्त 2018 में करीब 3,00,000 स्कूली बच्चों ने अपने माता-पिता को एक पत्र लिखा कि वे अपने बच्चों के जीवन में कितनी स्वच्छता चाहते हैं. इस पर माता-पिता ने उत्साहपूर्वक जवाब दिया कि वे वह सब करेंगे जो उनके बच्चे करना चाहते हैं. हालांकि अभी तक इसे खुले में शौच से मुक्त जिला घोषित नहीं किया गया है लेकिन यह उस दिशा की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है. सभी को पीने का स्वच्छ जल उपलब्ध कराना एक अन्य उल्लेखनीय क्षेत्र है. 2007-08 में केवल 25.2 प्रतिशत घरों में शौचालय थे जो 2015-16 में बढ़कर 34.2 प्रतिशत हो गया और स्वच्छ पेयजल की सुविधा वाले घरों की संख्या 96.1 प्रतिशत से बढ़कर 99.1 प्रतिशत हो गई.
सर्वाधिक सुधराः नवादा
यह उन 10 जिलों में से एक है जिन्हें बिहार ग्रामीण जल आपूर्ति एवं स्वच्छता परियोजना की ओर से पाइपयुक्त जल योजना के लिए चुना गया है. नवादा में 2007-08 में केवल 16.4 प्रतिशत घरों में शौचालय थे लेकिन 2015-16 में 28.8 प्रतिशत घरों में शौचालय हो चुके थे. इसी अवधि में इस जिले में स्वच्छ पेयजल वाले घरों की संख्या 86.8 प्रतिशत से बढ़कर 98.8 प्रतिशत हो गई.
कृषि
सर्वश्रेष्ठ जिलाः बक्सर
इस जिले में 2004-05 में प्रति व्यक्ति कृषि जीडीडीपी (ग्रामीण जनसंख्या) 2,924 रु. थी जो 2011-12 में 4,506 रु. हो गई. 2006-07 में बक्सर में चावल की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 2,559 किग्रा थी जो 2016-17 में बढ़कर 3,239 किग्रा हो गई. इसी तरह गेहूं की उत्पादकता 2,029 किग्रा से बढ़कर 3,371 किग्रा हो गई. 2009-10 में कुल बुआई वाले क्षेत्र के मुकाबले कुल सिंचित क्षेत्र का अनुपात 58.9 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 67.3 प्रतिशत हो गया.
सर्वाधिक सुधराः जमई
जमई की प्रति व्यक्ति कृषि जीडीडीपी (ग्रामीण जनसंख्या) 2004-05 में 1,995 रु. थी जो 2011-12 में 2,432 रु. हो गई. कुल बुआई क्षेत्र के मुकाबले कुल सिंचित क्षेत्र का अनुपात 2009-10 में 30.7 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 97.9 प्रतिशत हो गया.
उद्योग
सर्वश्रेष्ठ जिलाः मुंगेर
मुंगेर के जिला मजिस्ट्रेट आनंद शर्मा कहते हैं, "हर जगह की अपनी विशेषता होती है. अपने जिले में वे दो मुख्य विशेषता देखते हैः पर्यटन और खाद्य प्रसंस्करण. साल के अंत में यहां जंगल सफारी के साथ पर्यटन का एक नया सर्किट बनकर तैयार हो जाएगा.'' वे शहद की एक ऑर्गेनिक परियोजना में किसानों को शामिल करने की योजना पर भी काम कर रहे हैं जिसे मुंगेर शहद का नाम दिया जाएगा. इसके अलावा इसके जुड़वां शहर जमालपुर में भारतीय रेलवे का एशिया में सबसे बड़ा और सबसे पुराना वर्कशॉप है. 2004-05 में मुंगेर में उद्योग और जीडीडीपी का अनुपात 24.1 प्रतिशत था जो 2011-12 में 38.8 प्रतिशत हो गया. इसी अवधि में जिले में प्रति व्यक्ति उद्योग जीडीपी 2,773 रु. से बढ़कर 7,087 रु. हो गई.
सर्वाधिक सुधराः अरवल
यहां 32 लघु और मझोली औद्योगिक इकाइयों में से अधिकांश इकाइयां कृषि-आधारित हैं. बिहार निवेश प्रोत्साहन नीति के अंतर्गत पंचायत स्तर पर एक उद्यमिता कार्यक्रम शुरू किया गया है. 2004-05 में अरवल में उद्योग और जीडीडीपी का अनुपात 12.3 प्रतिशत था जो 2011-12 में बढ़कर 21.6 प्रतिशत हो गया. इसी अवधि में प्रति व्यक्ति उद्योग जीडीपी 653 रु. से बढ़कर 1,768 रु. हो गया.
सेवा
सर्वश्रेष्ठ जिलाः मुजफ्फरपुर
राज्य में भारत सरकार की ओर से स्मार्ट सिटी मिशन के लिए चुने गए तीन शहरों में से एक मुजफ्फरपुर आम और लीची के लिए मशहूर है जो सेवा क्षेत्र के विकास के लिए एक आदर्श जगह हो सकता है. 2004-05 में यहां सेवा क्षेत्र और जीडीडीपी का अनुपात 53.6 प्रतिशत था जो 2011-12 में बढ़कर 56.4 प्रतिशत हो गया. इसी अवधि में प्रति व्यक्ति सेवा जीडीपी 5,570 रु. से बढ़कर 8,289 रु. हो गई.
सर्वाधिक सुधराः मधुबनी
परंपरागत रूप से राज्य के सबसे सुस्त जिलों में से एक मधुबनी अब प्रदेश के 38 जिलों में 20 श्रेष्ठ जिलों में शामिल है. दूसरे क्षेत्रों में आई संपन्नता का असर सेवा क्षेत्र में भी पहुंच गया है. उदाहरण के लिए प्रति व्यक्ति बिजली के उपभोग में इसने जबरदस्त तरक्की हासिल की है. कोऑपरेटिव क्रेडिट सप्लाई का स्तर भी मधुबनी में अपेक्षाकृत ऊपर है. 2004-05 में मधुबनी में सेवा और जीडीपी का अनुपात 35.5 प्रतिशत था जो 2011-12 में बढ़कर 46.2 प्रतिशत हो गया और प्रति व्यक्ति सेवा जीडीपी 2,414 रु. से बढ़कर 3,453 रु. हो गई.
संपन्नता
सर्वश्रेष्ठ जिलाः पटना
43.1 प्रतिशत नगरीकरण, राज्य के कुल सड़क नेटवर्क के 6 प्रतिशत और बिहार के कुल वाहनों के 16 प्रतिशत वाहनों के साथ पटना राज्य के 38 जिलों में सबसे संपन्न जिला है. 2004-05 में यहां की प्रति व्यक्ति जीडीपी 36,373 रु. थी जो 2011-12 में 55,270 रु. हो गई जो राज्य की औसत प्रति व्यक्ति (12,093 रु.) जीडीपी का चार गुना है. पटना में 2007-08 में बैंकों में प्रति व्यक्ति जमा राशि 10,197 रु. थी जो 2016-17 में चार गुना से भी ज्यादा बढ़कर 46,520 रु. हो गई.
सर्वाधिक सुधराः शिवहर
आबादी और क्षेत्र के हिसाब से बिहार का सबसे छोटा जिला शिवहर मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. यही वजह है कि यहां का उद्योग भी कृषि आधारित है. व्यापार और वाणिज्य का केंद्र यह जिला बीजों, गुण, चमड़ा और सब्जियों का निर्यात करता है. इस जिले में 400 से ज्यादा पंजीकृत सूक्ष्म उद्यम, खाद्य उत्पादों के उत्पादन की 40 इकाइयां और 23 छोटे टेक्सटाइल हैं. 2004-05 में जिले की प्रति व्यक्ति जीडीपी 4,391 रु. थी जो 2011-12 में 6,055 रु. हो गई. शिवहर में 2007-08 में प्रति व्यक्ति बैंक जमा राशि 1,002 रु. थी जो 2016-17 में चार गुना से भी ज्यादा बढ़कर 4,290 रु. हो गई.
कानून और व्यवस्था
सर्वश्रेष्ठ जिलाः दरभंगा
हमेशा से सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इस जिले के जिला मजिस्ट्रेट ने सुनिश्चित कर दिया है कि यहां प्रशासन पूरी तरह से निष्पक्ष प्रतीत हो. 2007 में 1,00,000 की आबादी पर हत्या के मामले 2.08 से घटकर 2017 में 0.98 रह गए.
सर्वाधिक सुधराः औरंगाबाद
हिंसक अपराध के नियंत्रण के मामले में औरंगाबाद सबसे ऊपर है. यहां 2007 में 1,00,000 की आबादी पर हत्या के मामले 2.87 से घटकर 2017 में 1.74 रह गए. इसी तरह 1,00,000 की आबादी पर बलात्कार की घटनाएं भी 0.91 से घटकर 0.83 रह गईं.
समग्र विकास
सर्वश्रेष्ठ जिलाः पटना
न केवल राजधानी, बल्कि इस जिले के सभी 12 कस्बों में भी बेहतरीन सड़कें और बिजली की कनेक्शन है. यहां देश का सबसे आधुनिक संग्रहालय भी है जिसने अक्तूबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बहुत प्रभावित किया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की योजना पर बने इस संग्रहालय में जापानी शैली नजर आती है जिसमें पर्यावरण के नजरिए से 21वीं सदी का स्टैंडर्ड अपनाया गया है. पटना बिहार के सभी 38 जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, जल एवं स्वच्छता, बुनियादी ढांचा, उद्योग, सेवा और कानून-व्यवस्था के मामले में सबसे ऊपर है.
सर्वाधिक सुधराः किशनगंज
पिछले दो दशकों में अगर बिहार एक महत्वपूर्ण चाय उत्पादन करने वाले राज्य के रूप में उभरा है तो इसका श्रेय किशनगंज के एक बड़े हिस्से को जाता है जहां करीब 50,000 एकड़ में चाय की खेती की जा रही है. शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने के अलावा इसने सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय तरक्की हासिल की है. यह जिला विकास मार्ग पर आ गया है. जिले के सभी सात ब्लॉक मुख्यालय पक्की सड़क से जुड़े हैं. कॉमर्शियल बैंक में डिपॉजिट के मुकाबले क्रेडिट अनुपात 2015-16 में 69.5 प्रतिशत था जो पूरे बिहार में सबसे ज्यादा था. इसके सभी 732 गांवों में बिजली पहुंच गई है.

