महाराष्ट्रः चुनाव में असर डालेगा नया गठजोड़
इस नए गठबंधन की नजर राज्य के 13 फीसदी दलित और 12 फीसदी मुस्लिम वोटरों पर है जो आपस में मिलकर राज्य की 48 में से चार लोकसभा सीटों औरंगाबाद, अकोला, मालेगांव और मुंबई-दक्षिण मध्य में चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं.

अगले साल लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) ने महाराष्ट्र की अनुसूचित जातियों में खासा प्रभाव रखने वाले भारिप बहुजन महासंघ (बीबीएम) के साथ चुनावी गठबंधन कर लिया है. गठबंधन की घोषणा के लिए औरंगाबाद में 2 अक्तूबर को आयोजित एक संयुक्त रैली में एआइएमआइएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने घोषणा की कि भीम राव आंबेडकर वास्तव में महात्मा गांधी से बड़े नेता थे. उन्होंने कहा कि इस दलित महापुरुष ने देश को सबसे बड़ा लोकतांत्रिक हथियार—संविधान—दिया.
इस नए गठबंधन की नजर राज्य के 13 फीसदी दलित और 12 फीसदी मुस्लिम वोटरों पर है जो आपस में मिलकर राज्य की 48 में से चार लोकसभा सीटों औरंगाबाद, अकोला, मालेगांव और मुंबई-दक्षिण मध्य में चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं. बीबीएम के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर कहते हैं कि यह गठबंधन मतदान के पुराने रुझानों को बदल देगा. वे कहते हैं, ''हम भाजपा को सबक सिखाने के लिए एकजुट हो गए हैं.''
लेकिन इसने भाजपा के खिलाफ एक साझा मोर्चा बनाने की कांग्रेस की योजना को बिगाड़ दिया है. एआइएमआइएम को साझीदार बनाने से कतराने वाली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण को पूरी उम्मीद थी कि वे बीबीएम को अपने साथ ले आएंगे. लेकिन आंबेडकर एआइएमआइएम के साथ गठबंधन को लेकर अडिग हैं और कहते हैं कि वे कांग्रेस के प्रस्ताव पर तभी विचार करेंगे जब वह बीबीएम को राज्य की 12 सीटें देने के लिए तैयार होगी. आंबेडकर शरद पवार को अवसरवादी बताकर उनकी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के (एनसीपे) साथ गठबंधन को खारिज कर चुके हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि बीबीएम-एआइएमआइएम गठबंधन अकोला से बाहर सफल नहीं हो पाएगा. आंबेडकर अकोला से ही चुनाव लडऩा चाहते हैं. उनका कहना है कि एआइएमआइएम ने 2014 में मध्य औरंगाबाद और भायखला में विधानसभा चुनाव जीतकर और नांदेड़ की महानगरपालिका में बड़ी कामयाबी हासिल करने के बाद उसका फायदा गंवा दिया है. छह महीना पहले उसी नांदेड़ नगर निगम चुनाव में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी. हाल ही में ओवैसी ने जिस तरह विधायक वारिस पठान से गणेश उत्सव के दौरान गणपति का नारा लगाने पर माफी मांगने के लिए जोर दिया, उससे वोटरों में नाराजगी है.
निश्चित रूप से इस गठबंधन के लिए यह आसान चुनाव नहीं होने वाला है. सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास अठावले, जिनका दलितों में अच्छा-खासा प्रभाव है, का कहना है कि बीबीएम-एआइएमआइएम गठबंधन दरअसल भाजपा के लिए वरदान साबित होने वाला है क्योंकि इससे वोटों का विभाजन होगा. इसके अलावा, महाराष्ट्र मुस्लिम संघ (एमएमएस) जो 2 करोड़ सदस्यों वाले करीब 50 एनजीओ का एक सामूहिक संगठन है, एआइएमआइएम को 'बाहरी' मानता है. इसके अध्यक्ष फकीर मोहम्मद ठाकुर कहते हैं, ''हमें स्थानीय नेताओं की जरूरत है.''
उधर, भाजपा का खेमा बीबीएम-एआइएमआइएम के गठबंधन को अपनी पार्टी केओबीसी जनाधार को मजबूत करने का एक बेहतरीन अवसर मानता है. सत्ताधारी पार्टी पहले से ही ओबीसी के लिए राज्य सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों पर जोर देने की योजना बना रही है. यहां तक कि शिवसेना को भी लगता है कि इससे भाजपा को फायदा होगा. शिवसेना के नेता संजय राउत कहते हैं, ''भाजपा ने खुद ही यह गठबंधन बनवाया है ताकि वह विपक्षी वोटों में सेंध लगा सके.''
एआइएमआइएम का प्रभाव 2014 के बाद घटा हैः नांदेड़ की महानगरपालिका में छह महीने पहले के चुनाव में पार्टी को कोई सीट हासिल नहीं हुई.
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