प्रकृति के विविध रंगों की पेंटर

अभिनेत्री, कवयित्री और पेंटर रश्मि पित्रे प्रकृति के बारे में अपनी कोमल भावनाओं को कैनवस पर उतारती हैं

पेंटर रश्मि पित्रे
पेंटर रश्मि पित्रे

वे बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैंरू अभिनेत्री, कवयित्री और पेंटर. रश्मि पित्रे को प्रकृति से भी बहुत लगाव है. इसलिए उन्होंने अपनी पेंटिंग्स का विषय प्रकृति और उसके तत्वों को चुना है. इसे वे काल्पनिक और अर्ध काल्पनिक रूप में अपने कैनवस पर उतारती हैं. वे कहती हैं, "प्रकृति और हममें यानी जीव-जंतुओं में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है. और यह बात मुझे अच्छी लगती है. इसी वजह से मैं प्रकृति के करीब हूं और उसके मूड्स को कैनवस पर उतारने की कोशिश करती हूं.''

बचपन से ही चित्रकारी में रम जाने वाली रश्मि पहले पोर्ट्रेट और म्युजिटिव पेंटिंग्स करती थीं. "अब मैं एब्स्ट्रैक्ट करती हूं. नेचर मेरा कंसर्न है और वही मेरा स्टाइल है.'' इंस्केप्स नामक उनकी पेंटिंग्स की सोलो प्रदर्शनी 15 से  21 अक्तूबर को मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में आयोजित की गई है.

वे बताती हैं कि प्रदर्शनी में जो पेंटिंग्स शामिल की जा रही हैं, उनमें नेचर के सभी मूड्स होंगे. इसमें खास होगा शांत भाव. नेचर के कई भाव दिखेंगे. खुश होकर शांति होती है, एक बदलाव से शांति होती है, उग्र भाव से एक शांति होती है. "इन पेंटिंग्स को देखकर आप मेडिटेशन कर सकते हैं, पॉजिटिव एनर्जी मिलेगी. जब आप समुद्र के किनारे जाते हैं तो बहुत अच्छा महसूस करते हैं. एनर्जेटिक फील करते हैं. जैसे बहुत ज्यादा भूख लगी है और एक संतरा खा लिया तो बहुत अच्छा फील होता है. मैं अपनी पेंटिंग्स में नेचर से उसी तरह की फीलिंग दिलाना चाहती हूं.''

वे साफगोई से स्वीकार करती हैं कि उन्होंने प्रकृति में आए बदलाव या पर्यावरण को उस तरह से अपने कैनवस पर नहीं उतारा है. लेकिन वे कहती हैं कि सबको पर्यावरण के बारे में सोचना चाहिए. प्रोग्रेस जितना जरूरी है उतना ही पर्यावरण भी जरूरी है. वे कहती हैं, "नेचर का शौक मेरी पेंटिंग्स में दिखेगा. नेचर का खिन्न रूप भी आपको मेरी पेंटिंग्स में दिखेगा. जिस तरह से प्रदूषण इनसान को अच्छा नहीं लगता है उसी तरह से नेचर को भी महसूस होता है.

मेरी पेंटिंग्स में नेचर की शांति है तो उग्र भावना भी दिखेगी. नेचर का फ्रस्ट्रेशन भी नजर आएगा. हर किसी को अलग-अलग दिखेगा, किसी को रॉक दिख सकता है तो किसी को वहां पर शिप दिख सकता है. बादल और पानी दिखेगा. एब्स्ट्रैक्ट तरीके से उसके इमोशन को पेश किया गया है.''

जब वे पेंटिंग्स बना रही थीं तब मॉनसून का समय था. इसलिए उनके इस कलेक्शन में मॉनसून का भी असर दिखेगा. वे बताती हैं, "मैंने जो शांति की बात की है वह बुद्ध की ही शांति है. अपनी लाइफ में बैलेंस करना जरूरी है. बैलेंस करना नेचर से अच्छा कौन सिखा सकता है. यह बुद्धिज्म ही है.''

रश्मि अपनी पेंटिंग्स में सफेद के अलावा ब्लू, हरे और ग्रे रंगों का उपयोग करना पसंद करती हैं. पेंटिंग्स की उनकी शैली कैनवस पर तेल और एक्रिलिक के साथ है. मुंबई और हैदराबाद के अलावा कनाडा और यूएसए में भी उनकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लग चुकी है. दीया और बाती सहित आधा दर्जन टीवी सीरियलों और थिएटर में काम करने वाली रश्मि ने अंग्रेजी में दो सौ से ज्यादा कविताएं भी लिखी है.

वे कहती हैं, "मेरे लिए कविता और पेंटिंग्स अलग-अलग भाव नहीं हैं. पेंटिंग्स और कविता साथ-साथ भी करती हूं. कविता लाइफ और नेचर के बारे में हैं. यह एक किताब के रूप में आने वाली है.'' शाहरुख खान की फैन रश्मि रामकुमार, अलीक पद्मसी, राजा रवि वर्मा जैसे चित्रकारों को पसंद करती हैं.

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