सैन्यकर्मियों ने एफआइआर के खिलाफ दायर की याचिका

सीबीआइ जांच के बाद उभरे इन झमेलों के बाद सेना व्यूह-रचना में बहुत सतर्क रुख अपना रही है. इससे मणिपुर में हताहत सैनिकों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो चिंता की बात है. 2017 में तीन आतंकवादियों के खिलाफ हुई कार्रवाई में आठ सैनिक मारे गए.

निशाने पर कथित फर्जी मुठभेड़ों के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन
निशाने पर कथित फर्जी मुठभेड़ों के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन

करीब 700 सेवारत सैन्यकर्मियों ने सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दायर करके उग्रवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के खिलाफ हुई एफआइआर को चुनौती दी है, जहां उन्हें सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (एएफएसपीए) के तहत संरक्षण हासिल है. उन्होंने दलील दी है कि मुठभेड़ों के दौरान उठाए गए कदमों पर सैनिकों पर अभियोग लगाने से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.

ये याचिकाएं मणिपुर में पुलिस और सैनिकों पर फर्जी मुठभेड़ों के आरोप में हो रही सीबीआइ जांच के खिलाफ गुस्से के रूप में सामने आई हैं. पिछले महीने, सीबीआइ ने 33 पुलिसकर्मियों पर गैर-न्यायिक हत्या करने का आरोप लगाते हुए छह आरोप पत्र दाखिल किए.

इसमें 2012 की जनवरी में मारे गए संदिग्ध उग्रवादी जमीर खान का नाम भी शामिल है. खान पर बम विस्फोट और विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं के अपहरण की साजिश का आरोप था. पूर्व इंफाल जिले में इस 'मुठभेड़' का नेतृत्व करने वाले सब इंस्पेक्टर पी. तरुण कुमार को वीरता के लिए पदक दिया गया था. सीबीआइ के आरोपपत्र के अनुसार, वीरता पदक पाने के लिए यह फर्जी मुठभेड़ की गई.  

पिछले साल मणिपुर के दो मानव अधिकार समूहों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट से जारी आदेश के तहत सीबीआइ फर्जी मुठभेड़ों की जांच कर रही है. उनमें दावा किया गया था कि वर्ष 2000 और 2012 के बीच 1,528 फर्जी मुठभेड़ें हुईं थी. न्यायमूर्ति एम.बी. लोकुर और न्यायमूर्ति यू.यू. ललित ने सीबीआइ को मणिपुर में हुई कथित 98 फर्जी मुठभेड़ों की जांच का आदेश दिया.  

2 जुलाई को अदालत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को जांच में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए कहा. जांच में तेजी 30 जुलाई के बाद आई जब अदालत ने सीबीआइ निदेशक आलोक कुमार वर्मा को तलब किया. एजेंसी ने बताया कि आरोप पत्र दायर हो चुके हैं, दिसंबर तक 20 मामलों की जांच हो जाएगी और बाकी 14 की जांच 2019 तक पूरी हो जाएगी.

अब सैन्यकर्मियों की याचिकाएं 31 जुलाई को सीबीआइ की ओर से दर्ज एफआइआर की प्रतिक्रिया के रूप में सामने आई हैं. उस एफआइआर में 4 मार्च, 2009 को हुई 12 वर्षीय आजाद खान की 'हत्या' का आरोप 21 असम राइफल्स के मेजर विजय सिंह बलहर पर लगाया गया है. उसमें लिखा है कि बलहर और मणिपुर के सात पुलिसकर्मियों ने मिलकर उसे मार डाला.

इन दो जनहित याचिकाओं का दावा है कि एफआइआर ने ''कई अफसरों और सैनिकों के मनोबल को गंभीर रूप से प्रभावित किया है.'' इन दो याचिकाओं के बाद, मणिपुर से छह पुलिस कमांडो भी अदालत पहुंचे और कहा कि खंडपीठ की ओर से उन्हें 'हत्यारा' कहने से कठोर पूर्वाग्रह पैदा हुए हैं और निष्पक्ष सुनवाई की संभावना आहत हुई है.

वहीं, सैन्यकर्मियों की याचिका ने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को नाराज कर दिया है. उन्होंने 2 सितंबर को दिल्ली में एक बातचीत के दौरान अपनी नाराजगी साझा की और वे सुप्रीम कोर्ट की एएफएसपीए की समीक्षा या उसके नियमों को ढीला करने की संभावना को लेकर चिंतित थे. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सैन्यमकर्मियों का समर्थन किया है.

सीबीआइ जांच के बाद उभरे इन झमेलों के बाद सेना व्यूह-रचना में बहुत सतर्क रुख अपना रही है. इससे मणिपुर में हताहत सैनिकों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो चिंता की बात है. 2017 में तीन आतंकवादियों के खिलाफ हुई कार्रवाई में आठ सैनिक मारे गए, तो इस साल अगस्त के अंत तक तीन उग्रवादियों के मुकाबले पांच सैनिक मारे गए. सेना ने 1997 से अब तक 1,889 सैनिकों को खोया है, जबकि 4,974 उग्रवादी मारे गए हैं. पर अब, सब सवालों के घेरे में है.

1,528 फर्जी मुठभेड़ को कथित तौर पर सुरक्षाबलों ने अंजाम दिया मणिपुर में वर्ष 2000 से 2012 के दौरान

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