दिनाकरन का उभरना अन्नाद्रमुक के लिए खतरे की घंटी

पूर्व विधायक सी. ज्ञानशेखरन कहते हैं, "दिनाकरन एक मुख्य दावेदार के रूप में उभरे हैं.

 नई ताकत कोयंबतूर में एएमएमके की रैली को संबोधित करते दिनाकरन
नई ताकत कोयंबतूर में एएमएमके की रैली को संबोधित करते दिनाकरन

सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक ने 20 जुलाई को भारत के निर्वाचन आयोग से आर.के. नगर विधानसभा क्षेत्र में अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (एएमएमके) के संस्थापक टी.टी.वी. दिनाकरन की जीत को निरस्त करने का आग्रह किया. पार्टी ने आरोप लगाया कि कभी जे. जयललिता की सीट रहे इस क्षेत्र में जीतने के लिए दिनाकरन ने मतदाताओं को रिश्वत दी थी.

अन्नाद्रमुक के आधिकारिक मुखपत्र नामधु अम्मा ने यह भी दावा किया कि दिनाकरन ने चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं को जो रिश्वत देने का वादा किया था, उसके लिए उन्होंने बाकायदा एक टोकन भी दिया था पर वह चुनाव के बाद रिश्वत नहीं दे सके.

इससे नाराज वोटरों ने उनके काफिले को निशाना भी बनाया. दरअसल, आर.के. नगर में 18 जुलाई को सिलाई मशीनें बांटने के दौरान एएमएमके नेता की गाड़ी पर लोगों ने पत्थरबाजी भी की जिसे संभालने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा था. हालांकि, दिनाकरन कहते हैं कि पत्थरबाजी करने वाले अन्नाद्रमुक के हारे उम्मीदवार और पूर्व मंत्री मधुसूदनन के समर्थक थे.

दिनाकरन को मिले समर्थन के बाद अन्नाद्रमुक के नेताओं में कुछ खींचतान की स्थिति भी बनी है. खुद को जयललिता के सच्चे राजनैतिक उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तुत करने वाले दिनाकरन को विश्वास है कि उनके पक्ष में खड़े होने वाले 18 अन्नाद्रमुक विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने को मद्रास हाइकोर्ट निरस्त कर देगा.

8 जुलाई को मुख्यमंत्री ई.के. पलानीस्वामी के गढ़ में आयोजित रैली में उन्होंने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "यह सरकार गिर जाएगी और चुनाव में 234 सीटों में से हम कम से कम 200 जीतेंगे.''

अपने स्वजातीय थेवर समुदाय के दबदबे वाले क्षेत्र के बाहर भी एक रैली आयोजित करके दिनाकरन खुद को पूरे तमिलनाडु में स्थापित करने की कोशिशों में जुटे हैं. मुख्यमंत्री को इस बात से परेशानी हो सकती है कि उनके गढ़ में दिनाकरन ने एक सफल रैली की.

खासकर उस वक्त जब अन्नाद्रमुक के पंजीकृत सदस्यों की संख्या में भारी गिरावट देखी जा रही है. जयललिता के नेतृत्व में जिस अन्नाद्रमुक के डेढ़ करोड़ पंजीकृत सदस्य थे, वह संख्या जून के अंत में गिरकर सिर्फ 80 लाख रह गई है.

पूर्व विधायक सी. ज्ञानशेखरन कहते हैं, "दिनाकरन एक मुख्य दावेदार के रूप में उभरे हैं. पश्चिमी बेल्ट में उन्होंने बड़ी भीड़ जुटाई जो दर्शाती है कि अन्नाद्रमुक कैडर उनके पीछे मजबूती से खड़ा है. वे राज्य की राजनीति के भविष्य के सितारे हैं.''

राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है कि अन्नाद्रमुक का कैडर जिसे जयललिता की मौत के बाद उनके "सशक्त राजनैतिक उत्तराधिकारी'' की तलाश थी, के अलावा पार्टी के प्रति गैरप्रतिबद्ध मतदाताओं का एक वर्ग भी दिनाकरन को ऐसे नेता के रूप में देखता है जो केंद्र और भाजपा को सामने से चुनौती देने के लिए मजबूती से खड़ा होगा. आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआइ की जांच के घेरे में होने के बावजूद वे मोदी सरकार को खुलकर ललकारते हैं.

राजनैतिक विश्लेषक एन. सत्यमूर्ति कहते हैं, "संगठनात्मक कौशल और जयललिता और चाची शशिकला की तरह ही विरोधियों के खिलाफ जोखिम लेते हुए मजबूती से खड़े होने की दृढ़ इच्छाशक्ति उनके आत्मविश्वास का प्रतिबिंब है. अन्नाद्रमुक को अब यह भय सताने लगा है कि अगर दिनाकरन को रोका नहीं गया तो अगले विधानसभा चुनाव में वे भारी पड़ सकते हैं.''

अगला विधानसभा चुनाव अन्नाद्रमुक के लिए उसके अस्तित्व और विकास, दोनों ही नजरिए से बहुत अहम और चुनौतीपूर्ण होगा. इन चुनावों से यह भी स्पष्ट हो जाने की संभावना है कि पार्टी का नेतृत्व मौजूदा मुख्यमंत्री पलानीस्वामी के हाथों में रहेगा या उप-मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम के पास फिलहाल तो ऐसा लगता है कि एक तीसरा दावेदार भी इस रेस में आ कूदा है.

क्या दिनाकरन सबको किनारे लगाते हुए अन्नाद्रमुक की कमान अपने हाथ में ले सकेंगे? देखें, तमिलनाडु की जनता आगामी चुनाव में क्या फैसला सुनाती है?

मतदाताओं का एक वर्ग  दिनाकरन को ऐसे नेता के रूप में देखता है जो केंद्र और भाजपा को चुनौती दे सकेगा.

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