आप परेशानी तो उधार नहीं ले रहे!
कर्जदाताओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तकनीकी विकास ने अब इसे सुगम बना दिया है. पर ड्यू डिलिजेंस यानी अपने एसेट और देनदारी के सही मूल्यांकन के बिना कर्ज लेने से आप उसके भुगतान में डिफाल्ट कर सकते हैं, कर्ज के भंवर में फंस सकते हैं.

अक्सर कर्ज शिक्षा, शादी, पहली कार या मकान खरीदने जैसे मील के पत्थर तय करने में आपकी मदद करता है. कर्जदाताओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तकनीकी विकास ने अब इसे सुगम बना दिया है. पर ड्यू डिलिजेंस यानी अपने एसेट और देनदारी के सही मूल्यांकन के बिना कर्ज लेने से आप उसके भुगतान में डिफाल्ट कर सकते हैं, कर्ज के भंवर में फंस सकते हैं और इससे आपकी क्रेडिट हिस्ट्री खराब हो सकती है. कर्ज के बारे में सही फैसला कैसे लेः
अच्छा बनाम बुरा कर्ज
सबसे पहले यह पुख्ता करें कि आप कर्ज क्यों लेना चाहते हैं. विशफिन डॉट कॉम के ऋषि मेहरा कहते हैं, "अच्छा कर्ज आपके बजट पर बिना किसी दबाव के आपके वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने का एक तरीका होता है.''
उनके मुताबिक, "बुरा कर्ज एक ऐसा सौदा हो सकता है जिसमें बहुत ऊंची ब्याज दर तय की गई हो. यहां तक कि अगर आप कोई महंगी गाड़ी खरीदने के लिए कर्ज लेते हैं, जिसकी वास्तव में आपको जरूरत न हो, तो वह एक बुरा कर्ज हो सकता है.''
किसी वाजिब वजह के लिए आप कुछ खरीदते हैं तो इससे या तो आपको एक संपत्ति तैयार करने में मदद मिलती है या इससे आपके मौजूदा/भविष्य की आय को बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
मेहरा कहते हैं, "मकान सरीखे किसी बढ़ती कीमत वाले एसेट की खरीद किसी कर्ज को अच्छा बना सकती है और इस पर आपको इनकम टैक्स छूट का लाभ भी मिल सकता है.'' प्रॉपर्टी खरीदने से किराए के रूप में आमदनी या प्रॉपर्टी के मूल्य पर कैपिटल गेन हासिल करने का मौका मिलता है.
एजुकेशन लोन से आपको भविष्य में ज्यादा कमाई करने का मौका मिलता है, सो इसे अच्छा कर्ज माना जाता है. ऐसे एसेट पर कर्ज लेने से बचना चाहिए जिनके मूल्य में गिरावट आ रही हो. वैसे यह सिद्धांत हमेशा सही नहीं होता.
आपको कितना कर्ज लेना चाहिए?
आपका कर्ज आपकी मासिक आय, खर्चों और बचत पर आधारित होना चाहिए. आपको भविष्य की देनदारियों का भी ध्यान रखना चाहिए. व्हाट्सलोन डॉट कॉम के सीईओ तिम्मना गौड़ा डी. कहते हैं, "कोई भी व्यक्ति ऐेसे कर्ज के लिए अपनी कुल आय का 20 फीसदी तक ईएमआइ के रूप में देकर सहजता से जीवन बिता सकता है.
हालांकि लांग टर्म का सेक्योर्ड लोन या एसेट तैयार करने के लिए कर्ज लिया जा रहा हो तो यह किसी की शुद्ध आय का 50 फीसदी तक हो सकता है, बशर्ते कि उसके शॉर्ट टर्म लोन (एक साल से कम अवधि के) पूरी तरह से निबट चुके हों.'' नियम के मुताबिक आपकी कुल ईएमआइ शुद्ध आय के 50 फीसदी के भीतर ही होनी चाहिए.
सबसे पहले कौन-सा लोन निबटाएं?
बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी का सुझाव है, "सबसे पहले आप अपना अनसेक्योर्ड लोन निबटाने की कोशिश करें क्योंकि वे ज्यादा महंगे होते हैं. मसलन बकाया क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान सबसे पहले करना चाहिए. कई पर्सनल लोन में पूर्व भुगतान करने पर जुर्माना लिया जाता है. आपको गुणा-भाग करना होगा कि कर्ज पहले चुकाना कम खर्चीला है या उस पर ब्याज चुकाते रहना.''
आपके ऊपर यदि क्रेडिट कार्ड का बकाया है और आप सिर्फ न्यूनतम राशि का भुगतान कर पा रहे हैं तो सबसे पहले आपको इस चक्रीय कर्ज से मुक्ति पानी चाहिए, क्योंकि इस पर 40 फीसदी तक की ब्याज दर लगती है.
इसके बाद दूसरे महंगे लोन निबटाएं, जैसे पर्सनल लोन, ऑटो लोन, गोल्ड के बदले लोन, प्रॉपर्टी लोन आदि. आप यदि लोन चुकाने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं तो आप कम ब्याज दर का कोई एक बड़ा लोन और ले लें और उसका इस्तेमाल छोटे-छोटे कम ब्याज वाले कर्ज के भुगतान में करें.
कर्ज मत लें अगर...
- आप उसे आसानी से चुकाने में सक्षम नहीं हैः भुगतान में डिफाल्ट करने पर आपका क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है.
- आपको यदि शॉपिंग करने की लत हैः ऐसी चीजों की खरीद के लिए क्रेडिट कार्ड या ऐसे किसी कर्ज साधन के इस्तेमाल से बचें जिनकी आपको जरूरत नहीं है.
- लोन यदि तर्कसंगत न दिख रहा होरू कोई लोन सिर्फ इसलिए न लें कि उसमें कोई आकर्षक ऑफर दिख रहा हो.
- यदि आपकी आय अनिश्चित होः लोन लेने से बचें यदि आपको यह भरोसा न हो कि आगे आपकी कमाई का सिलसिला लगातार जारी रहेगा या नहीं.
- रिटायरमेंट निधि के बदले कर्ज मिल रहा होः रिटायरमेंट निधि के लिए बचत में लंबा समय लगता है. इसको किसी तरह के जोखिम में डालने से बचें.