राजस्थान में राजे की मुश्किल भरी राह

विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में भाजपा की जमीन खिसकती दिख रही.

पुरूषोत्तम दिवाकर
पुरूषोत्तम दिवाकर

लगता है, राजस्थान में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जमीन खिसकती जा रही है. राज्य के प्रभारी और पार्टी उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना ने 1 जून को संपर्क अभियान की शुरुआत करते हुए अशोक जैन से मुलाकात की जो पिछली 31 दिसंबर को राज्य के पूर्व मुख्य सचिव के पद से रिटायर हुए हैं.

खन्ना ने उन्हें सरकार की नीतियों तथा योजनाओं से अवगत कराया! राज्य में सत्तासीन होने के चार साल बाद भी भाजपा इस साल विधानसभा चुनावों के लिए कोई कारगर रणनीति बनाने के लिए जूझ रही है.

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच प्रदेश इकाई के प्रमुख अशोक परनामी को हटाने पर सहमति नहीं बन पा रही है. फरवरी में हुए उपचुनाव में हार के बाद अप्रैल से ही उन्हें हटने के लिए कह दिया गया था. लेकिन राजे ने उनकी जगह गजेंद्र सिंह शेखावत (राजपूत) और अर्जुन मेघवाल (दलित), दोनों के ही नामों का विरोध किया है.

उनका कहना है कि ऐसा करने से विरोधी जातियां नाराज हो सकती हैं. अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, राजे दरअसल यह नहीं चाहतीं कि दिल्ली से तय किए गए किसी व्यक्ति को राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाया जाए क्योंकि वे विधानसभा चुनावों के लिए टिकट के बंटवारे में अपना पूरा नियंत्रण बनाए रखना चाहती हैं. इस गतिरोध ने पार्टी आलाकमान और राजे के बीच मतभेदों को उजागर कर दिया है. लेकिन इससे जाट, ओबीसी और कुछ अगड़ी जातियां खुश हैं.

भाजपा को राजस्थान में जनता की ओर से सत्ता-विरोधी रुझान का सामना करना पड़ रहा है. इसकी एक वजह राज्य और केंद्र की उपलब्धियों के बारे में जनता को अवगत कराने में नाकामी है. वहीं जल संसाधनों के लिए केंद्र की ओर से कोई विशेष पैकेज देने से इनकार करना भी एक वजह है, जबकि राजे इसकी मांग करती आ रही हैं.

खन्ना और राज्य भाजपा इकाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार में उतरने से पहले जनता का मूड उनकी ओर मोड़ने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. इस बीच राजे काम न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करके या उन्हें दौरों का आदेश देकर "सख्त प्रशासनिक'' नेता की अपनी छवि दोबारा कायम करने की कोशिश कर रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, पिछले छह महीने में करीब 50 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करके मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव प्रचार शुरू करने के लिए सही वक्त का इंतजार कर रही हैं.

राजे और उनके सहयोगियों के लिए ज्यादा चिंता की बात यह है कि राज्य भाजपा इकाई में आत्मविश्वास की कमी है. एक अंदरूनी सर्वे से पता चला है कि ज्यादातर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के बस नाम ही सूची में रह गए हैं. 1 जून को जयपुर में पार्टी संगठन की एक बैठक में आमंत्रित करीब एक-तिहाई लोग नदारद थे.

उस मौके पर राजे ने अपने मंत्रियों और विधायकों को पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति हेकड़ी दिखाने के लिए डांट लगाई. उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को सरकार की उपलब्धियों की जानकारी ही नहीं है और कार्यकर्ता कांग्रेस के प्रचार का जवाब नहीं दे पा रहे हैं. राष्ट्रीय संयुक्त सचिव वी. सतीश को अपने विधायकों को सरकार और पार्टी की आलोचना न करने की चेतावनी देनी पड़ी. जाहिर है, अगले कुछ महीने मुख्यमंत्री के लिए आसान नहीं हैं.

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