झारखंडः माओवादियों की मुठभेड़ पर अब उठे सवाल
एडीजीपी राव ने यह भी दावा किया है कि झारखंड के पुलिस महानिदेशक डी.के. पांडे ने उनसे मामले की जांच का काम 'धीमा' करने को कहा. राव के इस पत्र ने नक्सलवाद से प्रभावित राज्य में उबाल ला दिया है.

झारखंड पुलिस की बहु प्रचारित 'सफल एनकाउंटर' की एक घटना अब राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए परेशानी का सबब बनकर फिर चर्चा में है. इसमें 12 माओवादियों को मार गिराने की बात कही गई थी. यह एनकाउंटर जून 2015 में पलामू के बोकरिया गांव में हुआ था. एनकाउंटर के 'फर्जी' होने की जांच कर रहे एडिशनल डीजीपी एम.वी. राव को पिछले महीने अचानक राज्य सीआइडी से हटा दिया गया. अब उनका आरोप है कि जांच को नाकाम करने के लिए उन्हें हटाया गया है.
राज्य के गृह सचिव को लिखे एक पत्र में इस अधिकारी ने कहा है, ''यह एक बड़े अपराध को ढंकने और दोषियों को बचाने की साजिश लगती है. एडीजी (सीआइडी) पद पर पोस्टिंग के एक महीने के भीतर ही मेरा ट्रांसफर कर दिया गया. यह मामले की निष्पक्ष जांच को विफल करने की बदनीयती से किया गया है.'' इस मामले में उचित कार्रवाई हो, इसके लिए उन्होंने इस पत्र की प्रति केंद्रीय गृह मंत्रालय, राज्य के मुख्यमंत्री रघुबर दास और झारखंड के राज्यपाल को भी भेजी है.
राव ऐसे दूसरे पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें सीआइडी से तुरत-फुरत हटा दिया गया. इसके पहले 1987 बैच के आइपीएस अधिकारी एडीजीपी रेजी डुंगडुंग को जून 2015 में हुए विवादास्पद एनकाउंटर के कुछ ही दिनों के भीतर ट्रांसफर कर दिया गया था. दिलचस्प यह है कि चार्ज मिलने के दो महीने बाद ही उन्हें हटा दिया गया. गौरतलब है कि पुलिस और अद्र्धसैनिक बलों के साथ माओवादियों के एनकाउंटर की स्वतंत्र जांच का काम सीआइडी को सौंपा गया था.
एडीजीपी राव ने यह भी दावा किया है कि झारखंड के पुलिस महानिदेशक डी.के. पांडे ने उनसे मामले की जांच का काम 'धीमा' करने को कहा. राव के इस पत्र ने नक्सलवाद से प्रभावित राज्य में उबाल ला दिया है. झारखंड हाइकोर्ट के निर्देश पर पलामू एनकाउंटर की जांच कर रहे राव का सीआइडी से ट्रांसफर होने पर इन अटकलों को हवा मिल गई कि मामले की लीपापोती का प्रयास किया जा रहा है. राज्य के गृह विभाग ने राव के आरोपों पर डीजीपी से जवाब मांगा है.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी इन आरोपों पर संज्ञान लिया है और उसने झारखंड सरकार को नोटिस दिया है. राज्य के प्रमुख पुलिस अधिकारियों का बयान भी लिया है, लेकिन अभी इस मामले में आयोग की तक्रतीश के निष्कर्षों की घोषणा होनी है.
गौर करने की बात यह है कि एनकाउंटर में जिन 12 लोगों की जान गई उनमें से केवल एक अनुराग उर्फ आरकेजी उर्फ डॉक्टर के ही माओवादियों से संपर्क निकले. वह माओवदियों का शीर्ष जोनल कमांडर था और 2013 के लातेहर केस में वांछित था. इस केस में सीआरपीएफ के शहीद जवान के शव पर विस्फोटक लगाया गया था. माओवादियों के इस हमले में सुरक्षाकर्मियों समेत एक दर्जन से ज्यादा लोगों की जान चली गई थीं.
माओवादियों के खिलाफ सफलतापूर्वक कार्रवाई के चलते 2015 की शुरुआत में सीएम रघुवर दास ने पांडे को राज्य पुलिस का प्रमुख बनाया था, लेकिन अब पुराने केसों को लेकर उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.
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