आंध्र प्रदेशः बस इतना नहीं काफी

नायडू ने कापू समुदाय के लिए जो पांच फीसदी आरक्षण दिया है, उसे समुदाय पर्याप्त नहीं मान रहा

और चाहिए 3 दिसंबर को कापू आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद कापू समुदाय के नेताओं के साथ नायडू
और चाहिए 3 दिसंबर को कापू आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद कापू समुदाय के नेताओं के साथ नायडू

ए. न. चंद्रबाबू नायडू ने कापू समुदाय को शिक्षा और सरकारी नौकरी में पांच प्रतिशत आरक्षण की मंजूरी देने वाले कानून को आंध्र प्रदेश विधानसभा से पारित करवा कर शायद एक छोटी-सी सियासी लड़ाई जीत ली है, पर क्या यह फैसला 18 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अदालत में टिक पाएगा? कापू समुदाय के लिए आरक्षण की वैधता सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के मद्देनजर कम ही नजर आती है, जिसमें आरक्षण 50 फीसदी से अधिक नहीं होने की बात कही गई थी. कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि एक विकल्प है, इसके लिए तमिलनाडु के उदाहरण का पालन करना होगा-आरक्षण के कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची के अंतर्गत लाया जाए. पर वह भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है.

सियासी विश्लेषक के. नागेश्वर कहते हैं, ''आरक्षण की व्यवस्था जातीय असमानताओं से निपटने में विफल रही है. 50 फीसदी की सीमा भी इस तरह की अन्य असमानताओं को मुखर होने से रोकती है.'' पर नायडू ने के.एल. मंजूनाथ आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना जल्दबाजी में ऐसा कदम क्यों उठाया, जबकि उन्होंने ही इसकी जांच के लिए आयोग की नियुक्ति की थी.

उन्होंने कापू समुदाय से वादा किया है कि वे केंद्र को आरक्षण कानून को नौंवी अनुसूची में डालने का सुझाव देंगे. नायडू तमिलनाडु के मामले का हवाला देते हैं, जहां आरक्षण को बढ़ाकर 69 फीसदी कर दिया गया है. यह सब कुछ चुनाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण कापू समुदाय (27 फीसदी) को खुश करने और तेलगू फिल्म स्टार तथा कापू नेता पवन कल्याण का समर्थन पाने के लिए किया गया है. 2014 के चुनाव में इस समुदाय के समर्थन ने नायडू की तेलगू देशम पार्टी को वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस को 2.1 फीसदी के मामूली अंतर से हराने में अहम भूमिका निभाई थी.

लेकिन पुराना चुनावी गणित बदल भी सकता है. कल्याण अपनी जन सेना पार्टी को एक प्रभावशाली राजनीतिक ताकत के रूप में बदलना चाहते हैं. और कापू समुदाय भी नायडू के इस प्रस्ताव से बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं दिखता. कापू समुदाय के एक कद्दावर शख्स कहते हैं, ''अभी तो आधा काम पूरा हुआ है.'' वह जोर देते हुए कहते हैं कि उन्हें दस फीसदी आरक्षण चाहिए.

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