"रितेश का शांत स्वभाव उन्हें एक अच्छा निर्देशक बनाता है"

रितेश देशमुख की ऐतिहासिक ऐक्शन फिल्म राजा शिवाजी में जीजाबाई की भूमिका निभाने पर भाग्यश्री से इंडिया टुडे की खास बातचीत

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भाग्यश्री

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यह फिल्म आपको कैसे मिली?

अचानक रितेश का फोन आया कि वे एक सब्जेक्ट नैरेट करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि फिल्म शिवाजी राजे के बारे में है और वे चाहते हैं कि मैं जीजाबाई का रोल करूं. उनके स्क्रिप्ट सुनाने से पहले ही मैंने हां कर दी. उन्होंने उस समय की याद दिला दी जब बरसों पहले सूरज बडज़ात्या मैंने प्यार किया  के नैरेशन के लिए आए थे.

इस भूमिका में आखिर आपको क्या खास लगा?

जीजाबाई छत्रपति के पीछे चट्टान की तरह थीं और उन्होंने स्वराज का विचार रखा था. वे एक पारंपरिक मां से कहीं ज्यादा थीं. अपने राज्य की पूरी पीढ़ी को आकार देने में मददगार. भारतीय इतिहास की ऐसी महिला के किरदार के मौके को मैं गंवाना नहीं चाहती थी जिसने अपने समय का राजनैतिक परिदृश्य बदल दिया.

एक निर्देशक के रूप में रितेश देशमुख कैसे हैं?

रितेश का शांत स्वभाव उन्हें एक अच्छा निर्देशक बनाता है. यहां तक कि चीजें जब ठीक नहीं चल रही होतीं, वे शांति से सब कुछ संभाल लेते हैं. सेट पर पूरी टीम निर्देशक से संकेत लेती है और अगर आपके पास ऐसा व्यक्ति है जो आपा नहीं खोता तो यह काम का स्वस्थ माहौल बनाता है.

1989 में आपके डेब्यू के बाद से इंडस्ट्री काफी बदल गई है. ऐसा एक बदलाव जिसे देख आप खुश हैं और जो आप चाहती हैं कि न हुआ होता?

अच्छा लगता है कि हमें तैयार स्क्रिप्ट मिलती है. सेट पर जाने से पहले तैयारी करना आसान हो जाता है क्योंकि आप बैकअप स्टोरी बना सकते हैं और संवादों का अभ्यास कर सकते हैं. इसका मतलब है कि आप सेट पर समय बर्बाद नहीं करते.

—करिश्मा उपाध्याय

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