"मैंने नाम, शोहरत या पैसों के लिए नहीं, बल्कि सच को आवाज देने के लिए गाया"

गायक दलेर मेंहदी सूफी संगीत से गहरे जुड़ाव और आगे की अपनी योजनाओं पर.

Q+A
दलेर मेंहदी

सवाल+जवाब

आप हाइ एनर्जी पॉप और भांगड़ा गानों के लिए जाने जाते हैं. सूफी संगीत से आपका किस तरह का रिश्ता है?

बचपन में मैंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के मधुर छंदों को शास्त्रीय रागों में सुना. मैं अपने परिवार को रोज आसा दी वार गाते देखते हुए बड़ा हुआ हूं. मेरा म्यूजिकल डीएनए इसी तरह के भरे-पूरे समृद्ध माहौल में बना.

हाल के सूफी हेरिटेज फेस्टिवल में आपने क्या गाया?

मैंने वहां बाबा शेख फरीद, भगत कबीर, भगत रविदास, बाबा बुल्लेशाह वगैरह के कलाम गाए. और ये मैंने सच को आवाज देने के लिए गाए,  नाम, शोहरत या पैसों के लिए नहीं. वह तो बोलो ता रा रा रा रा ने मुझे बहुत दिया और आज तक दे रहा है.

सूफी परंपरा ने आपके संगीत को किस ढंग से प्रभावित किया?

मैं डर दी रब-रब, तुनक-तुनक तुन  और दीवानी  सरीखे गाने पॉप का चोला जरूर ओढ़े हुए हैं लेकिन इनमें गहरा फलसफा छिपा है. रब की मेहर से जो चीजें मेरे पास आती हैं मैं ले लेता हूं; सत्य और प्रेम उसकी धुरी बन जाते हैं और जश्न उसकी एक अतिरिक्त उपलब्धि बन जाता है. दलेर मेंहदी का संगीत कुल जमा यही तो है.

फिलहाल आप किन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं?

अभी-अभी मैंने निरमा का विज्ञापन और वेलकम टु द जंगल का काम पूरा किया. इसके अलावा इंटरनेशनल चेस चैंपियनशिप की थीम धुन गाई है. हाउस ऑफ दलेर मेंहदीज म्यूजिक से नौ गाने आने वाले हैं. एक नई ईपी पर काम चल रहा है और मेरा पहला सिंधी गाना भी आने को है.

—अमित दीक्षित

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