"कला और कलाकारों के लिए अच्छे दिन आते देखना चाहती हूं"
डॉ. सोनल मानसिंह दिल्ली में (13-29 जनवरी) चल रहे 'फेस्टिवल ऑफ न्यू कोरियोग्राफीज: कला यात्रा 2026’ को क्यूरेट करने के बारे में बात कर रही हैं. इसमें देश की दस प्रमुख नृत्य संस्थाएं और गुरु साथ आए.

सवाल+जवाब
● आपने किस तरह से इस फेस्टिवल की परिकल्पना की और इसका मुख्य मकसद क्या है?
दशकों से मैं तरह-तरह के फेस्टिवल और प्रोग्राम पेश करती आ रही हूं पर उनमें से ज्यादातर किसी थीम या विषय पर होते हैं. मैंने सोचा क्यों न कोरियोग्राफीज़ का एक फेस्टिवल किया जाए क्योंकि लोगों का ऐसे कलाकारों से लगातार तआर्रुफ कराते रहना चाहिए जो कुछ अर्थपूर्ण काम कर रहे हैं. वही घिसी-पिटी कोरियोग्राफीज पेश करने का कोई अर्थ न था...दोहराना आसान रहता है पर आसान कामों में मेरी बिल्कुल दिलचस्पी नहीं है.
● क्यूरेशन और कुछ खास कोरियोग्राफीज के बारे में क्या आप थोड़ा और बताएंगी?
मैं कुछ सोचने-समझने वाले, चिंतनशील कलाकारों को लाना चाहती थी. दूसरे वे जिन्होंने अरसे से दिल्ली में परफॉर्म न किया हो. और तीसरी बात, उनसे बात करके मैंने वादा लिया कि वे कुछ नया पेश करेंगे, खासकर इस फेस्टिवल के लिए कुछ नया तैयार किया हुआ.
● आपने राज्यसभा सांसद रहते हुए मंचीय कलाकारों के कल्याण का अच्छा इंतजाम कराया था. आज आप क्या किए जाने की जरूरत महसूस करती हैं?
आज की तारीख में दर्जनों आयोजन और उत्सव हो रहे हैं और सरकार ऐसे बड़े आयोजनों पर भारी पैसा खर्च कर रही है. दूसरी ओर सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए और हब बनाए जाने की सख्त जरूरत है. बदकिस्मती से इसमें सबसे ज्यादा खामियाजा डांस को ही भुगतना पड़ता है. डांसर्स के लिए भी यह बड़ी नाजुक स्थिति होती है क्योंकि छोटा-सा तो उनका करियर होता है.
● आप छह दशक से नृत्य कर रही हैं, फिर भी आपको लगता है कि अभी आप सीख ही रही हैं. अब और क्या हासिल करना चाहती हैं? अपने को और मंचीय कलाओं को लेकर आपको किस तरह की उम्मीद है?
मैं तो यही चाहती हूं कि मेरे बाल और दांत यूं ही सलामत रहें (हंसते हुए). नए आइडियाज में निरंतर योगदान करते हुए नृत्य परिवेश को और ऊर्जावान बनाना चाहती हूं. कला और कलाकारों के लिए अच्छे दिन आते देखना चाहती हूं.
—दीपाली धींगरा.