"मैं करुणा और मुक्ति के भाव वाली एक हॉलिडे फिल्म बनाना चाहती थी"

फिल्मकार गुरिंदर चड्ढा ने चार्ल्स डिकेंस के 'अ क्रिसमस कैरोल' को क्रिसमस कर्मा नाम से एक बहुसांस्कृतिक परिवेश में ढालने पर इंडिया टुडे से बात की है

फिल्मकार गुरिंदर चड्ढा

- दीपा नटराजन लोबो

भाजी ऑन द बीच से लेकर क्रिसमस कर्मा तक की अपनी जर्नी को आप किस तरह से देखती हैं?
मुझे लगता है जैसे मैं अपनी हर फिल्म के साथ हमारे इतिहास को दर्ज कर रही हूं क्योंकि वे पहचान, विस्थापन और जड़ों को लेकर अपने समय का दस्तावेज ही तो हैं. इंडस्ट्री बदली है और अब कहीं ज्यादा स्त्रियां इसमें हैं जो कि हौसला बढ़ाने वाली बात है पर हमारी कहानियों को जमीन पर उतरने के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है. आज भी कोई फिल्म बना लेना छोटे-मोटे चमत्कार जैसा ही लगता है.

फिल्म बनाना क्या आपके बचपन का सपना था? 
बिल्कुल नहीं. मैं तो लंबे सफर वाली लॉरी ड्राइवर बनना चाहती थी! अपना एक बड़ा-सा ट्रक और खुली सड़कों पर अकेले होने का ख्याल मुझे बहुत लुभाता था. असल मोड़ उस वक्त आया जब बतौर स्टुडेंट, दिल्ली में एक मैगजीन में इंटर्नशिप करते हुए मीडिया में भारतीय महिलाओं को पेश किए जाने के तरीके पर एक जोरदार पेपर पढ़ा. प्रस्तुतियां ऐसे घिसे-पिटे ढर्रे वाली थीं कि मैं तो हिल ही गई. तभी मुझे लग गया कि कैमरे के पीछे पहुंचकर मैं खुद इस नैरेटिव को बदलना चाहती हूं.

अ क्रिसमस कैरोल की आपने नए ढंग से परिकल्पना क्यों की? 
मैं करुणा और मुक्ति के भाव वाली एक हॉलिडे फिल्म बनाना चाहती थी. इट्स अ वंडरफुल लाइफ हमेशा से मेरी पसंदीदा रही है. वह भी डिकेंस से जुड़ती है. मैंने भी मूल कथा को ही लिया लेकिन उसे एक दर्दनाक अध्याय के बीच लाकर खड़ा किया—सत्तर के दशक में भारतीयों का युगांडा से निष्कासन और उनका ब्रिटेन में आकर जड़ें जमाना.

एक खास किस्म की इंटरनेशनल कास्ट और लाइनअप के साथ काम का अनुभव कैसा रहा?
कुणाल नय्यर, इवा लंगोरिया और बॉय जॉर्ज जैसे ऐक्टर सचमुच कमाल ही थे. बेंड इट लाइक बेकहम में शामिल रहे संजय लेविस ने इसका म्यूजिक रचा. पंजाबी एमसी, अनुष्का शंकर, गैरी बार्लोव, बॉय जॉर्ज, मलकीत सिंह और प्रियंका चोपड़ा को इस फिल्म में आप गाने गाते हुए पाएंगे.

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