"राजनीति लंबा गेम है...हम हजार गुना ज्यादा मजबूत होकर उभरेंगे"

आप नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इंडिया टुडे से बातचीत में कहते हैं कि अब मैं बाहर हूं, तो लोग आश्वस्त हो गए हैं. लोगों को पता है कि उनके मसलों का हल निकलेगा. यह तो पक्का है कि दिल्लीवाले केजरीवाल को प्यार करते हैं

आप नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया
आप नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया

सत्रह महीने बाद जमानत पर बाहर आए आप नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अभिषेक जी. दस्तीदार के साथ बेबाक बातचीत में शराब नीति का बचाव किया और दावा किया कि यह पूरा विवाद भाजपा की तरफ से गढ़ा गया है. उन्होंने यह भी कहा कि आप फिर से दिल्ली में जीतने जा रही है. बातचीत के अंश:

प्र: मुड़कर देखें तो शराब नीति में आप क्या अलग कर सकते थे?

यह दिल्ली के लोगों के लिए अच्छी नीति थी. आपको समझना चाहिए कि दिल्ली में हर साल नई नीति होती थी. 2003-04 में एक नीति बनाई गई, जिसमें हर साल फेरबदल किए गए. 2015 में जब हम सत्ता में आए, हमने कुछ बड़े फेरबदल किए और सरकार को राजस्व का फायदा हुआ. उसी सीख के आधार पर हम 2021-22 में यह नई नीति लाए. यह नया मॉडल था, जिसमें हम हर साल धीरे-धीरे फेरबदल कर सकते थे. यही हुआ होता.

• किस किस्म के फेरबदल?

मिसाल के तौर पर हमने रियायतें दीं. मगर जब हमने जमीनी हकीकत देखी कि रियायतों की वजह से प्रतिस्पर्धा बहुत गलाकाट हो गई, तो हमने इसे सीमित कर दिया. इसी रूप में यह है. आप किसी को नीति के किसी पॉइंट का गलत फायदा उठाते देखते हैं, तो इसमें फेरबदल करते हैं. यह वह नीति थी जिसका दिल्लीवालों को बहुत फायदा होता. आज शहर का बड़ा हिस्सा गुड़गांव या नोएडा से शराब लाता है. पेशेवर नेटवर्क है जो इसकी तस्करी करके यहां बेचता है. राजस्व का नुक्सान आखिरकार दिल्ली सरकार को होता है, लोगों को होता है.

लेकिन आपने ही यह नीति वापस ली.

उन्होंने (भाजपा ने) इसे बदनाम किया, विवादास्पद बनाया, ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि कोई अफसर इसे लागू करने को राजी न था. चीजों को चलाए रखने के लिए हमें पुरानी नीति पर लौटना पड़ा.

आप इसे पंजाब में क्यों नहीं लागू कर देते जहां आप सत्ता में हैं?

यही नीति अब पंजाब में थोड़े-बहुत बदलाव के साथ लागू है. इससे पहले पंजाब में आबकारी राजस्व करीब 6,000 करोड़ रुपए था. अब मेरा ख्याल है कि यह 10,000 करोड़ रुपए है.

तो आपने इस नीति का बचाव करने के लिए उनसे राजनैतिक लड़ाई क्यों नहीं लड़ी?

हम भाजपा से लड़ रहे हैं, उस पार्टी से जो शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में यकीन नहीं करती. यह संविधान में भी यकीन नहीं करती. उन्हें बस काल्पनिक स्थितियां गढ़ना पसंद है. हमने दिल्ली के लोगों के लिए नीति बनाई. जैसे हमने मोहल्ला क्लिनिक और स्कूल बनाए. याद रखिए उन्होंने इसे भी मुद्दा बनाया.

क्या आपको लगता है कि 'शराब घोटाले' से आप की छवि को और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की छवि को नुक्सान पहुंचा?

भाजपा नेताओं ने टीवी पर आरोप लगाया कि हमने 1,000 करोड़ रु. रिश्वत ली. कोर्ट में वे आरोप लगाते हैं कि ये 45 करोड़ रुपए हैं, और क्या-क्या आरोप नहीं लगाए. समय ऐसे आरोपों का मुंहतोड़ जवाब देगा. उन्होंने हमारे विधायकों पर इतने आरोप मढ़े, लेकिन हम बेदाग निकलते रहे. कई मामलों में तो अदालतों ने सख्त टिप्पणियां कीं कि अफसर गलत थे, कि एजेंसियां पक्षपात कर रही थीं. हम शराब घोटाले की इस मनगढ़ंत कहानी से भी बेदाग निकलेंगे. और जिस दिन यह होगा, भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन हजार गुना ज्यादा मजबूत होगा. इन चीजों के लिए धैर्य की जरूरत होती है. यह राजनीति है. लंबा गेम है.

आप में ऐसी कौन-सी बात है जो भाजपा को परेशान करती है?

हम बुनियादी मुद्दे उठाते हैं. मैं एक बार गुजरात गया. हमारी टीम ने मुझसे वहां के स्कूलों का दौरा करने के लिए कहा. मैंने सोचा मोदी जी का राज्य है, यहां स्कूल तो खराब हो ही नहीं सकते. मगर यकीन कीजिए, मैंने इतने बदतर स्कूल देश में कहीं और नहीं देखे. जब हम इस तरह उन्हें चुनौती देते हैं तो उन्हें परेशानी होती है. यह उनके डीएनए में नहीं है...उनको लगता है पैसा कमाओ, प्राइवेट स्कूल में भेजो. यह खतरनाक मानसिकता है. अगर आप सरकारी स्कूलों को विकसित नहीं करते, तो कोई देश विकास नहीं कर सकता.

अगले साल दिल्ली में होने वाले चुनावों को लेकर आपको क्या लगता है?

अब मैं बाहर हूं, तो लोग आश्वस्त हो गए हैं. केजरीवाल जी भी जल्द बाहर होंगे (13 सितंबर को अरविंद केजरीवाल को भी सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई), लोगों को पता है कि उनके मसलों का हल निकलेगा. यह तो पक्का है कि दिल्लीवाले केजरीवाल को प्यार करते है.

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