"हम परीक्षाओं को 100 फीसद फूलप्रूफ बनाएंगे"
इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा और डिप्टी एडिटर अनिलेश एस. महाजन के साथ 25 जून को एक्सक्लूसिव बातचीत में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एनटीए मामले से निपटने से के लिए केंद्र सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों और आगे की चुनौतियों के बारे में दोटूक और खरी-खरी बात की. पढ़िए इस बातचीत के सम्पादित अंश

● हाल ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और उसके जरिए आयोजित प्रवेश परीक्षाओं और खासकर नीट या एनईईटी-यूजी (मेडिकल कॉलेजों में अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा) आयोजित करने के तरीकों को लेकर काफी नाराजगी और विवाद पैदा हुआ. इसके पीछे क्या वजहें हैं?
एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) पिछले छह सालों से जेईई परीक्षा और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए सीयूईटी सरीखी देश की कुछ सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाएं आयोजित करती रही है. अपने को आधुनिक बनाने के लिए किसी भी संगठन को नियमित रूप से खुद को नए सांचे में ढालना और नए तौर-तरीके अपनाने चाहिए. तो एनटीए को भी अपना नया अवतार लेने की जरूरत है क्योंकि टेक्नोलॉजी बदल रही है, चुनौतियां परवान चढ़ रही हैं और भागीदारी बढ़ रही है.
जिस परीक्षा के बारे में हम बात कर रहे हैं, उसके लिए इस बार 24 लाख छात्रों ने पंजीकरण करवाया और 23.33 लाख ने परीक्षा दी. जब कॉलेजों के इतने सारे छात्र परीक्षा में बैठते हैं तो चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं. पिछले साल एनटीए ने एक करोड़ से ज्यादा छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और नौकरियों की प्रवेश परीक्षाएं सफलता से आयोजित की थीं. पर यह ऐसी घटना है जो नहीं होनी चाहिए थी; ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए थी.
● गंभीर आरोप लगाए गए हैं. यूजीसी-नेट (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन-नेशनल एंट्रेंस टेस्ट) सरीखी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. दूसरी परीक्षाएं भी टाल दी गई हैं.
देखिए, एक परीक्षा रद्द की गई है, एक परीक्षा टाल दी गई है. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि मुझे लगा कि जब जटिलताएं पैदा हुई हैं तो उन्हें दुरुस्त करने के लिए हमें समय लेना चाहिए. यूजीसी-नेट इसलिए रद्द की गई क्योंकि आपको डार्क नेट के जरिए और टेलीग्राम पर लीक प्रश्नपत्र मिल गया था - ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. समय के साथ टेक्नोलॉजी से जुड़ी और साइबर अपराध की चुनौतियां पैदा हुई हैं. कहीं न कहीं गड़बड़ी हुई थी. हमें वह यूजीसी-नेट की परीक्षा इसलिए रद्द करनी पड़ी क्योंकि प्रश्नपत्र एक दिन पहले यह डार्क नेट पर आया और फिर टेलीग्राम के माध्यम से प्रसारित हो गया था. सीएसआईआर-नेट (काउंसिल फॉर साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिलेशंस-नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट) परीक्षा टाली गई है और यह जल्द ही आयोजित की जाएगी.
● सीएसआईआर-नेट को क्यों टाला?
हालांकि कोई कदाचरण नहीं हुआ, पर हमने सोचा कि हमें इसे इसलिए स्थगित कर देना चाहिए क्योंकि यूजीसी-नेट में और नीट-यूजी में भी पहले से मसले चल रहे थे. इसलिए हमने हड़बड़ी न करने और परीक्षा को टाल देने का फैसला किया.
● नीट की बात करें, तो ऐसी खबरें आ रही हैं कि शायद एक या दो केंद्रों से प्रश्नपत्र भी लीक हुआ है. चूंकि आपने प्रश्नपत्र लीक होने की वजह से यूजीसी-नेट रद्द कर दी तो क्या अब नीट को भी रद्द करना बहुत जरूरी हो गया है?
ये दोनों अलग-अलग बातें हैं. यूजीसी-नेट का प्रश्नपत्र इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर लीक हुआ था. नीट में जाहिरा तौर पर यह स्थानीय और अलग किस्म का मसला है और इसकी जांच की जा रही है. मुख्य रूप से बिहार और गुजरात की पुलिस बढ़-चढ़कर सक्रिय हैं और दोनों घेरा डाल रही हैं. जांच में उन्होंने पता लगाया है कि यह कितनी दूर तक फैला है. उचित प्रक्रिया के तहत सभी अभ्यर्थियों को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं कि भविष्य में क्यों न उन्हें इस तरह की परीक्षाओं में शामिल होने से रोक दिया जाए. कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. देश में ये विषय सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में हैं. अदालत 8 जुलाई को समग्र दृष्टिकोण अपनाएगा. हमें इसका इंतजार करना होगा.
● दूसरी वजह क्या है?
दूसरे, कड़ी मेहनत से पढ़ाई करने वाले देश भर के मेधावी छात्रों का प्रबल नजरिया है. वे आगे बढ़ना और पढ़ना चाहते हैं और उनका हित अहम है. सरकार होने के नाते हम सबके लिए जिम्मेदार हैं, और हमें बहुत संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए. हमें पुख्ता सबूतों और जानकारियों के आधार पर काम करना चाहिए. सरकार ने यही किया है. एनटीए के खिलाफ लोगों में गुस्सा है. प्रथम दृष्टया हमें भी ऐसा लगा. इसलिए हमने एनटीए का नेतृत्व बदल दिया. सबसे वरिष्ठ, सेक्रेटरी स्तर के अफसर को इसका डायरेक्टर जनरल बनाया गया है.
इसे फैलने न देने के लिए परीक्षा की पूरी प्रक्रिया, डेटा पूलिंग, एनटीए के ढांचे और दूसरे मसलों पर विचार करते हुए हमने इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के.आर. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सदस्यों के तौर पर दूसरे विशेषज्ञों को लेकर उच्चस्तरीय समिति बनाई है. इस पूरे प्रसंग में दो-तीन जगहों पर जो छिटपुट घटनाएं हुईं, उनमें रिट याचिकाएं दायर करने वाले लोगों का क्या कहना था? यही कि एक निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. और हमने सीबीआइ जांच का आदेश दे दिया. इस सबमें सरकार शून्य त्रुटि के प्रति प्रतिबद्ध है.
● तो आप नीट को रद्द करने की जरूरत नहीं देखते?
छियालिस रिट याचिकाएं दायर की गई हैं और पूरा मामला अदालत के सामने है. मामला न्यायालय में विचाराधीन है, मेरी तरफ से कुछ भी स्पष्ट कहना अनुचित होगा. अदालत को फैसला लेने दीजिए. एनटीए में ग्रेस मार्क देने की न कोई परंपरा और न ही कोई प्रथा थी, या न ही कोई नियम थे. 1,563 छात्रों को ग्रेस मार्क देकर एनटीए ने गलत मिसाल कायम की. लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया.
अदालत ने कहा कि सरकार को इस पर विचार करना चाहिए. एनटीए ने अदालत के सामने फिर से परीक्षा लेने का प्रस्ताव रखा, और अदालत ने उसका अनुमोदन कर दिया. इन 1,563 छात्रों के लिए 23 जून को फिर से परीक्षा हुई. अदालत ने अभी काउंसलिंग रद्द नहीं की है. सरकार की जो भी जिम्मेदारी थी, वह हमने पूरी की. अदालत के फैसले का इंतजार करना ही समझदारी होगी.
● विपक्ष आपका इस्तीफा मांग रहा है क्योंकि ये खामियां साफ तौर पर गंभीर हैं और छात्रों पर इसका असर पड़ा है. आपकी प्रतिक्रिया?
विपक्ष के समय में जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, क्या प्रश्नपत्र लीक नहीं हुए थे? इस पूरे प्रसंग में मैं राजनैतिक भाषा में बात करना नहीं चाहता. मेरी जिम्मेदारी उन लोगों के मन में बेचैनी पैदा करना नहीं है जो इस परीक्षा में बैठे या बैठना चाहते हैं. विपक्ष की एक भूमिका है, वे अपनी भूमिका निभाएंगे ही. मेरा अंत:करण साफ है. मेरी सरकार का अंत:करण भी साफ है. इसे ठीक करने में हमने कोई कसर नहीं छोड़ी है.
● जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) सरीखी कंप्यूटर-आधारित परीक्षाएं (सीबीटी) हैं. 2018 में नीट को सीबीटी बनाने की चर्चाएं थीं. आपकी राय में क्या इस पर पुनर्विचार का वक्त आ गया है?
देखिए, सीबीटी और कागज-कलम दोनों तरीके हैं. फिलहाल कंप्यूटर आधारित परीक्षा करवाने की हमारी देश की क्षमता करीब तीन लाख है. इसके लिए हमें छह बार में परीक्षा करानी पड़ेगी. इसमें चुनौतियां हैं. हम जेईई में ऐसा करते हैं. इसमें हम 25 लाख अभ्यर्थियों के लिए यह दो बार आयोजित करते हैं. सीयूईटी में हम यह ब्लेंडेड मोड में करते हैं.
शुरुआत से ही पिछले आठ सालों में पीएमटी (प्री-मेडिकल टेस्ट परीक्षा) के जमाने से ही, मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं कागज और कलम से होती रही हैं. सेब और संतरों के बीच कोई तुलना ही नहीं है. दोनों पौष्टिक और मीठे हैं. दोनों के अपने फायदे और चुनौतियां हैं. सीबीएसई कक्षा 10 और 12 के बोर्ड के इम्तिहान आखिरकार कागज और कलम से ही आयोजित करता है. उन्हें फूलप्रूफ बनाना हमारी जिम्मेदारी है. एनटीए परीक्षाए आयोजित करने वाली एजेंसी है और यह उसका फैसला है. संबंधित मंत्रालय और राज्य सरकार उसकी क्लाइंट हैं.
● तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का कहना है कि नीट ग्रामीण छात्रों और खासकर गांवों में रहने वाले छात्रों के प्रति नाइंसाफी है और इसमें शहरी छात्र ही कामयाब होते हैं. क्या आप नीट की पूरी व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करना चाहेंगे?
यह डीएमके का राजनैतिक रुख है कि नीट नहीं होनी चाहिए. लेकिन नीट सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई. मैं बस यह बताना चाहता हूं कि पिछले साल नीट की टॉपर ग्रामीण तमिलनाडु की तमिलनाडु बोर्ड की एक छात्रा थी. फिर, ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट और नीट के रुझानों में एक बुनियादी फर्क है. पहले दक्षिण में छात्र तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक के हरेक राज्य बोर्ड की अलग-अलग परीक्षाएं दिया करते थे ताकि उनमें से किसी एक में सीट मिल जाए.
अब नीट की वजह से वे केवल एक परीक्षा देते हैं, जिससे वे अपना पैसा और समय दोनों बचा रहे हैं. किसी भी छात्र या छात्रा को बहुत-सी परीक्षाओं में बैठने की जरूरत नहीं है. यह बड़ी राहत है. इसकी सिफारिश सुप्रीम कोर्ट ने की थी. यह सुधारवादी विचार है जिसे हमारी सरकार ने लागू किया. प्राथमिक रुझानों से हम देखते हैं कि एससी, एसटी, ओबीसी और कमजोर तबकों के छात्रों की भागीदारी बढ़ गई है. उनकी सफलता की दर ज्यादा है. जो छात्र कोचिंग सेंटरों में नहीं गए, उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है.
● नीट का विरोध करने वालों ने एक मुद्दा अन्य फॉर्मेट के मुकाबले मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन (एमसीक्यू) का भी उठाया है, जिसमें कुछ लोगों को लगता है कि ग्रामीण छात्रों को नुक्सान होता है. क्या इस पर फिर से विचार की जरूरत है?
निश्चित रूप से एनटीए की नई सुधार समिति इस पर विचार करेगी. लेकिन मैं जवाहर नवोदय विद्यालय या जेएनवी के छात्रों की बात करना चाहूंगा, जो अनिवार्य तौर पर ग्रामीण इलाकों से आते हैं. आप किसी भी जेएनवी में जाएं, आपको दो-तीन छात्र ऐसे मिलेंगे जो नीट में सफल रहे हैं. ऐसा कैसे हुआ? यही नहीं, अगर आप उनका सामाजिक प्रोफाइल देखें, तो वे एससी, एसटी, ओबीसी और कमजोर तबकों की पृष्ठभूमि से आए हैं. अनिवार्यत: वे अर्द्धशहरी और ग्रामीण इलाकों से आते हैं.
तो आंकड़े तो कुछ और दिखा रहे हैं. कुछ लोग एक तय नैरेटिव गढ़ने को बाध्य हैं, पर जमीनी हकीकत उससे मेल नहीं खाती. मेरी सरकार छात्रों के हितों की, ग्रामीण इलाकों के छात्रों के हितों की, एससी, एसटी, ओबीसी और समाज के कमजोर तबकों से आने वाले छात्रों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. आज हमारे यहां 1,10,000 मेडिकल सीट हैं. हमने सीटों की संख्या दोगुनी कर दी है, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली बनाई है. ये मेडिकल शिक्षा के प्रति हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है.
● कई विशेषज्ञों का मानना है कि कोचिंग सेंटरों और परीक्षा आयोजित करने वालों के बीच कुछ न कुछ साठगांठ है. सच क्या है?
जनवरी में जब आत्महत्याओं को लेकर काफी चिंता थी, सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की थी कि कोचिंग सेंटरों को कैसे काम करना चाहिए. कुछेक कोचिंग सेंटरों के मालिक नाखुश थे और वे इस मौजूदा आंदोलन में सबसे आगे हैं. मैं समझ नहीं पाता कि उनका इससे क्या वास्ता है. यह हुई एक बात. दूसरी बात, सबसे बड़ी चुनौती क्या है? मुश्किल सवालों का आरोप...कि यह बहुत शहरी-केंद्रित है. इस बार दो चीजें सोच-समझकर की गईं. कोविड महामारी के दौरान एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम कम करना शुरू किया.
इस बार प्रश्न उसी कम किए गए पाठ्यक्रम पर आधारित थे. मुश्किल सवालों को संयत किया गया और केवल सीबीएसई ही नहीं, राज्य बोर्डों को भी शामिल किया गया. देश में 60 से ज्यादा बोर्ड हैं. बारहवीं कक्षा के छात्रों को अपनी बोर्ड परीक्षाओं में जिस तरह के सवालों के जवाब देने पड़ते हैं, वैसे ही सवाल पूछे जाएंगे. इसलिए जो तय पैटर्न और रटने की आदत पर निर्भर थे, उनके हित खतरे में पड़ गए. फिर एक या दो दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुईं. तकरीबन उसी वक्त एनटीए ने कुछ गैर-पारदर्शी चीजें कीं, जैसे ग्रेस मार्क लेकर आए, जो पहले व्यवस्था का हिस्सा नहीं थे.
यह भले कुछेक छात्रों से ही जुड़ा हो, पर इससे भ्रम पैदा हुआ. एक या दो जगहों पर कुछ छिटपुट घटनाएं भी हुईं. उन जगहों पर स्थानीय पुलिस ने रोकथाम के कदम उठाए. सब कुछ वहां साफ और दोटूक है और इसे अदालत में पेश किया जाएगा. मैं प्रमाणपत्र देने वाला कोई नहीं हूं. मैं समाधान देने के लिए जिम्मेदार हूं. प्रधानमंत्री देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए 100 फीसद प्रतिबद्ध हैं. जब प्रवेश परीक्षाओं की बात आती है, तो कोई शॉर्टकट नहीं है, हमें चीजों को सौ फीसद फूलप्रूफ बनाने की जरूरत है. वह हम करेंगे. इस पर विचार करते हुए हमने बहुत हाइ-प्रोफाइल, उच्चस्तरीय सुधार समिति बनाई है. हमारे इरादे बिल्कुल साफ हैं.
● आपने अभी-अभी परीक्षा प्रणालियों के साथ धोखाधड़ी करने और उन्हें भ्रष्ट करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए बनाए गए कानून के नियम अधिसूचित किए हैं. इसके पीछे क्या है और व्यवस्था को साफ करने में इसका क्या असर पड़ेगा?
कोई भी राज्य, फिर जो भी पार्टी वहां सत्ता में हो, इस बीमारी से मुक्त नहीं है. इसे साबित करने के लिए मेरे पास डेटा है. अनुचित तौर-तरीके, धोखाधड़ी, सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी करना, गैंगस्टर, लॉबीज, निहित स्वार्थ वाले लोग इसमें शामिल हैं. पहली बार हम इसे रोकने के लिए कानून लेकर आए हैं. कानून पहले भी थे, पर हमने इन्हें फोकस्ड बनाया, यह पक्का करने के लिए कि परीक्षाओं के साथ गड़बड़ी करने वालों को कड़ी सजा मिले. पुरानी व्यवस्था के तहत हो या नई व्यवस्था के तहत, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.
● नीट में हाल ही कुछ लोग गिरफ्तार किए गए हैं. क्या उन पर नए कानून के तहत मुकदमा चलेगा?
हो सकता है. लेकिन मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
● भर्ती परीक्षाओं के मामले में भी हमने प्रश्नपत्र लीक होते, परीक्षाएं स्थगित होती हुई और ऐसे ही दूसरे मसले देखे हैं. क्या एनटीए के मामले में विचार करने के लिए बनाई गई समिति भर्ती परीक्षाओं की भी जांच करेगी?
नौकरियों के लिए हों या शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए, परीक्षाओं में जो भी बाधा डालेगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी. दोनों ही मामलों में जिस चीज के साथ छेड़छाड़ की गई है, वह परीक्षा है. जो समिति बनाई गई है, उसे एनटीए के ढांचे और कार्यप्रणाली को नए सिरे से देखना और उस पर विचार करना होगा, वह निश्चित रूप से इस पर विचार करेगी, क्योंकि एनटीए, जो प्राथमिक तौर पर शैक्षणिक प्रवेश परीक्षाओं के लिए है, भर्ती के लिए भी ऐसी (परीक्षाएं आयोजित) कर रही है.
● कई परीक्षाएं राज्य एजेंसियां आयोजित करती हैं. आप उन्हें कैसे साथ लेकर चलना चाहते हैं?
हर राज्य को यह चुनौती...यह कैंसर झेलना पड़ रहा है. हर सरकारी विभाग इसका सामना कर रहा है, क्योंकि सभी विभाग भर्तियां करते हैं. हम सब इसे छेड़छाड़ से पूरी तरह मुक्त और 100 फीसद त्रुटिरहित बनाना चाहते हैं. इसलिए केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर इस चुनौती से निबटना पड़ेगा. हम उसके लिए प्रतिबद्ध हैं.
● आपने फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला है. सामने मौजूद संकट से निबटने के अलावा शिक्षा मंत्रालय में आपका ध्यान किन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा?
शिक्षा आधारभूत मंत्रालय है. भारत का आर्थिक महाशक्ति बनना तय है. काम न केवल चल रहा है, बल्कि इसे रोका नहीं जा सकता. लक्ष्य तय है. अगले 25 सालों में भारत को विकसित देश बनना है. 21वीं सदी ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था का युग है. इस क्षेत्र में भारत की अपनी ताकत है. हमारे शिक्षा मंत्रालय का फोकस इस पर है कि घरेलू जरूरतों और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं दोनों को कैसे पूरा करें.
हमें और ज्यादा उद्यमी बनाने की जरूरत है. हमें नौकरियों के लिए तैयार ज्यादा छात्र, और ज्यादा हुनर से लैस ज्यादा पेशेवर बनाने हैं. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) ने अपने दस्तावेज में तमाम सिफारिशें की हैं और एनईपी को सफलता से जमीन पर उतारना हमारी प्राथमिकता है.

