"भगवान राम तो शाश्वत सम्राट हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में सभी नेताओं के आदर्श हैं"

जियो सिनेमा के लिए अपनी नई डॉक्युमेंट्री राम जन्मभूमि: रिटर्न ऑफ अ स्प्लेंडिड सन पर काम करना लेखक अमीश के लिए एक नितांत आध्यात्मिक अनुभव था.

शिव ट्रायॉलजी, सीता, रावण और इस तरह के कई सारे प्रसिद्ध उपन्यासों के रचयिता अमीश त्रिपाठी
शिव ट्रायॉलजी, सीता, रावण और इस तरह के कई सारे प्रसिद्ध उपन्यासों के रचयिता अमीश त्रिपाठी

आपके लिए और हिंदुस्तान के लिए राम के क्या मायने हैं?

भगवान राम तो शाश्वत सम्राट हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में सभी नेताओं के आदर्श हैं. आप पूरा इतिहास उठाकर देख लीजिए, उप-महाद्वीप के राजवंशों ने भगवान राम और राम राज्य से प्रेरित होने का दावा किया है.

यह डॉक्युमेंट्री करने के दौरान आपके लिए खास बात क्या रही?

पुरातत्ववेत्ता के.के. मोहम्मद की एक प्यारी लाइन. उन्होंने कहा, "बाबर तो उज्बेकिस्तान का आक्रांता था और मैं एक भारतीय मुसलमान हूं. एक विदेशी से मेरा क्या लेना-देना भला!" बाबरी मस्जिद का विवाद हिंदू-मुसलमान का नहीं बल्कि हिंदुस्तानी-विदेशी का था. और उस अर्थ में मंदिर का पुनर्निर्माण एक मायने में राष्ट्रीय चेतना का प्रोजेक्ट था.

वह क्या चीज थी जो आपको पौराणिकता के करीब लेकर आई?

हिंदुत्व और धार्मिक मार्ग ने हमें परंपरा और उदारवाद का एक अनूठा संतुलन प्रदान किया. अगर पश्चिम की तर्ज पर आपने सिर्फ उदारवाद अपनाया तो आप एकाकीपन, गिरावट और अराजकता जैसी समस्याओं से दो-चार होंगे. और अगर सिर्फ परंपरा को थामा तो मध्य पूर्व की तरह मुश्किलें झेलेंगे जहां महिलाओं या एलजीबीटी जैसे अधिकारों की कोई जगह नहीं. दोनों के बीच संतुलन चाहिए. प्राचीन हिंदुत्व  बताता है कि हम दोनों के श्रेष्ठ पहलुओं को अपना सकते हैं.

अमीश की अगली पहल?

रामचंद्र सीरीज की पांचवीं किताब आनी है जो (2015-22 के बीच आई) सीरीज को (2010-13 के बीच आई) शिव त्रयी से जोड़ेगी. यह सफर खासा लंबा रहा है और जैसा कि मैंने अपनी एक किताब में लिखा है, "शुरू वाली जगह पर न लौटने तक आपके सफर को सही मायने में पूरा माना नहीं जाता." पांचवीं किताब का शीर्षक राइज ऑफ मेलुहा पूरे विषय को स्पष्ट कर देता है.

—अमित दीक्षित

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