"चुनौती भरा था इंदिरा गांधी का किरदार, पकड़ना चाहती थी उनकी स्पिरिट"
फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के जीवन पर बनी और मेघना गुलजार निर्देशित फिल्म सैम बहादुर में फातिमा सना शेख इंदिरा गांधी के किरदार में

● आप अभी उम्र के तीसरे दशक में हैं. ऐसे में इंदिरा गांधी का किरदार निभाना कितना चुनौतीपूर्ण था?
यह चैलेंजिंग था क्योंकि इतनी बड़ी शख्सियत का किरदार निभाना बड़ी जिम्मेदारी होती है. पर मेघना गुलजार को पता था वे क्या चाहती हैं. उन्होंने प्रोस्थेटिक्स का इस्तेमाल नहीं किया. उनका नजरिया इंदिरा गांधी की स्पिरिट को पकड़ने का था.
● अब महिला-केंद्रित फिल्मों की स्वीकार्यता बढ़ी है?
आज कंटेंट ही किंग है. इससे फर्क नहीं पड़ता कि लीड रोल में पुरुष है या महिला. यह फासला सिमट रहा है. गंगूबाई काठियावाड़ी और क्वीन जैसी फिल्मों की सफलता से भी यह स्पष्ट है. इंडस्ट्री में महिला प्रधान फिल्मों पर दांव लगाने को लेकर खुलापन आया है क्योंकि ओटीटी ने बॉक्स ऑफिस के इतर फिल्मों की सफलता के लिए राह खोल दी है.
● आप अपनी मिर्गी की बीमारी को लेकर मुखर रही हैं. करियर में बाधा की फिक्र...
उससे उबर पाई क्योंकि मैं इस पर बात करने में सहज थी. मुझे लगा जब तक मैं इस पर सहज नहीं होऊंगी, आसपास के दूसरे लोग कैसे हो पाएंगे! लोग इसे जानें और स्वीकारें इसके लिए मैंने अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया. इसे लेकर बनी भ्रांति थोड़ी भी कम हो पाई तो मुझे खुशी होगी.
● दंगल से सैम बहादुर तक आपके लिए सबसे बड़ा सबक क्या रहा है?
यही कि इंडस्ट्री सबको तहेदिल से अपनाती है. यह ऐसी जगह है जहां हुनर ही मायने रखता है. हुनर है तो आपकी जाति, रंग, पंथ, ओहदा और तालीम वगैरह जो भी जैसी भी हो, आपका काम ही आपकी कामयाबी तय करेगा. भले ही आप यहां किसी को जानते हों या नहीं.
शशि सन्नी