'चंद लोग नीतीश जी को डिक्टेट करते हैं'

हम सीएम बनें या न बनें यह सवाल नहीं है, मगर समाज के लोग चाहते हैं कि कोई न कोई उनके बीच से हो

पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा
पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा

उपेंद्र कुशवाहा बिहार की गठबंधन सरकार, खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नाराज हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि पूर्व केंद्रीय मंत्री, 62 वर्षीय कुशवाहा कभी भी अपना रास्ता बदल सकते हैं. वे ऐसा पहले भी कर चुके हैं. वे मार्च 2021 में अपनी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का जद (यू) में विलय करने से पहले 2009-13 के दौरान जद (यू) के साथ रह चुके हैं. बताया जाता है कि वे मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने और नीतीश कुमार की ओर से राजद नेता तेजस्वी यादव को अपने उत्तराधिकारी के रूप में प्रोत्साहित करने से परेशान हैं. विशेष संवाददाता पुष्यमित्र ने उनके घर पर उनसे उनके असंतोष की वजह और भावी योजनाओं के बारे में बातचीत की. पेश है कुछ अंश:

आपकी नीतीश कुमार से आखिर नाराजगी क्या है?
पहली नाराजगी तो यह है कि वे पार्टी खुद नहीं चला रहे. पार्टी में ज्यादातर फैसले दूसरे लोग ले रहे हैं. नीतीश जी को उनके आसपास के लोग डिक्टेट करते हैं. इस बात पर हमें ऐतराज है. इसके अलावा राजद के कई नेता सार्वजनिक रूप से एक डील की चर्चा कर रहे हैं कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का पद छोड़ें और तेजस्वी को सौंप दें. इन लोगों का दावा है कि महागठबंधन के वक्त यह डील हुई थी.

इसको लेकर लोगों में, खास कर जद (यू) कार्यकर्ताओं में काफी कन्फ्यूजन है. अगर इस मामले पर एक तरफ से चुप्पी रहेगी तो दिक्कत होगी, इसलिए इस संबंध में स्थिति जल्द स्पष्ट होनी चाहिए.

चर्चा तो यह भी थी कि जब तेजस्वी सीएम बनेंगे तो जद (यू) की तरफ से आपको डिप्टी सीएम बनाया जाएगा. अब क्या उस डील में कोई दिक्कत आ गई?  
यह मुख्यमंत्री जी का विशेष अधिकार है कि वे किसको कहां फिट करेंगे. यह बड़ा विषय नहीं है. बड़ा विषय वह है जो राजद की तरफ से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कहा जा रहा है.
 
आप कहते हैं कि पार्टी छोड़कर नहीं जाएंगे, लेकिन अगर जद (यू) आपको निकाल दे तो फिर कहां जाएंगे?
हमको ऐसा नहीं लगता. भले पांच वोट का हो या पच्चीस का, मेरे रहने से पार्टी को फायदा तो होता ही है. ऐसे में पार्टी हमें क्यों निकालेगी.  

चर्चा है कि आप लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ जा सकते हैं. 
न-न, अभी तो जद (यू) की मजबूती के लिए हम अंतिम लड़ाई लड़ रहे हैं. मुख्यमंत्री जी पर मेरा भरोसा अभी भी है. हम उनसे ही आग्रह कर रहे हैं. करोड़ों लोगों के अरमानों की पार्टी को बचा लीजिए. अभी तो हम इसी अभियान में लगे हैं और इस उम्मीद के साथ कि नीतीश जी निश्चित रूप से इस दिशा में कोई कदम उठाएंगे.

क्या कुशवाहा जाति यह मानती है कि उसकी सत्ता में भागीदारी अभी बाकी है?
अगर बहुत सारे लोगों को यह बात लगती है तो उनकी बातों को खंडन हम क्यों करें. स्वाभाविक तौर पर देखें तो त्रिवेणी संघ जो बना था, उसका एक मकसद था. इस मकसद को पूरा करने के लिए लालू जी ने भूमिका निभाई, नीतीश जी ने भूमिका निभाई तो स्वाभाविक रूप से बचे हुए लोगों को लगेगा कि हमारी भी भूमिका होनी चाहिए.

और कुशवाहा जाति के सबसे बड़े नेता आप हैं?
नहीं, हम खुद को उस रूप में नहीं मानते मगर समाज की अपेक्षा तो रहती है.

तो आपका समाज चाहता है कि आप बिहार के सीएम बनें?
हम सीएम बनें या न बनें यह सवाल नहीं है, मगर समाज के लोग चाहते हैं कि कोई न कोई उनके बीच से हो.

अगले पांच साल में दोनों बड़े चुनाव के बाद खुद को कहां देखना पसंद करेंगे. केंद्र में मंत्री या बिहार में सीएम-डिप्टी सीएम?
उधर मेरा ध्यान बिल्कुल नहीं है, मगर मेरा ध्यान इस तरफ जरूर है कि लोगों के हितों की रक्षा के लिए, जो भी दबे कुचले लोग हैं, उनकी बेहतरी के लिए जहां भी मेरी आवश्यकता हो उस भूमिका में रहूं.

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