तार पर सितारा

शुजाअत खां, सितारवादक, वे जोधपुर में इसी हफ्ते वर्ल्ड सैक्रेड स्पिरिट फेस्टिवल में शिरकत करेंगे

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सितारवादक शुजाअत खां से विस्तृत बातचीत, पेश हैं अंशः

इमदादखानी घराने की खासियतें क्या हैं?

मेरे परदादा के नाम पर इस घराने का नाम पड़ा. सितार को आज हम जिस रूप में जानते हैं, उसे मोटे तौर पर मेरे वालिद उस्ताद विलायत खां ने स्थापित किया. सितारवादन में गायिकी अंग उन्होंने ही शुरू किया. इसमें हम एक साज बजा रहे होते हैं लेकिन उसमें मेलोडी वाले पहलू को काफी ऊपर रखते हैं.

आपके कुछ पसंदीदा राग कौन-से हैं और क्यों?

यह बता पाना बहुत मुश्किल है. कुछ रागों से आपका व्यक्तित्व और आपके विचार मिल जाते हैं. मेरे पसंदीदा राग यमन कल्याण, शुद्ध कल्याण, श्याम कल्याण, मालकोंस, दरबारी और कुछ भोर के राग हैं.

पिता के साथ की आपकी कुछ अच्छी यादें?

वालिद के साथ ही उम्दा यादें साथ-साथ सफर की हैं. उनकी नजर बहुत बारीक थी. छोटी-छोटी बातें भी पकड़ लेते. ये बातें कंसर्ट के वक्त आपके संगीत में प्रवेश कर जाती हैं. इसी तरह से उनका विट भी बहुत पैना था.

आपको लगता है भारतीय शास्त्रीय संगीत अच्छे दौर में है?

है ही, वो हमेशा से रहा है. हाल ही दिल्ली में मैंने 3,000 श्रोताओं के सामने बजाया. जो लोग शास्त्रीय संगीत की शुद्धता को पसंद करते हैं, वे इससे प्राप्त होने वाले आनंद को समझते हैं. शास्त्रीय संगीत कभी आप तक चलकर नहीं आएगा, आपको ही उसके पास चलकर जाना पड़ेगा. इसका इस तरह का यह अभिमान मुझे रास आता है.

संगीतकार या सितारवादक न बनते तो आप क्या होते?

अरे बाप रे! मैं अक्सर सोचता हूं कि दूसरे मामलों में मेरी कितनी काबिलियत है, फिर ऊपरवाले का शुक्रिया अदा करता हूं कि मैं यहां हूं. और कहीं मैं कुछ भी खास न कर पाता. मुझे सैरसपाटा, परिजनों-दोस्तों के साथ वक्त बिताना, दिन भर टीवी देखना और पड़े रहना पसंद है. पर बजाने बैठता हूं तो लगता है, मैं बस इसी के लिए बना हूं.

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