''हम शिक्षा के अधिकार को सशक्त बना रहे हैं"

केंद्र सरकार का कहना है कि वह प्रारंभिक शिक्षा को लेकर काफी कुछ कर रही है. इसी सिलसिले में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर से इंडिया टुडे के सीनियर सब-एडिटर सरोज कुमार की बातचीत के प्रमुख अंशः

प्रकाश जावडेकर
प्रकाश जावडेकर

हाल ही में उत्तर प्रदेश में शिक्षा मित्रों जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन किया. बिहार में भी ऐसा ही है. आपका क्या कहना है?

पहले सर्व शिक्षा अभियान और फिर राइट टू एजुकेशन के बाद काफी संख्या में शिक्षक नियुक्त हुए. सबको तुरंत परमानेंट करना असंभव था. महाराष्ट्र में वे पहले तीन साल शिक्षा मित्र के रूप में रहते हैं और फिर उन्हें परमानेंट किया जाता है. चूंकि शिक्षा मूलतः राज्य का विषय है लिहाजा इस मामले में सबके अपने-अपने नियम हैं. लेकिन केंद्र ने एक क्वालिफिकेशन रखा कि वे टीईटी पास होने चाहिए.

और आपने देखा कि उत्तर प्रदेश में जो टीईटी पास नहीं हुए थे, उनकी बहाली रद्द कर दी गई. अब सरकार ने उसी तरह की दूसरी टीईटी परीक्षा का आयोजन किया है. आरटीई के बाद जो 15 लाख शिक्षक पहली से पांचवी तक पढ़ा रहे हैं, उनके पास डीएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) होना चाहिए. उनको 2015 तक डीएड करने का मौका दिया था, चार-पांच लाख टीचरों ने डिप्लोमा कोर्स कर लिया बाकी करीब 15 लाख ऐसे ही रह गए. अब हमने दो साल का एक्सटेंशन दिया है और उन्हें 2019 तक डिप्लोमा कर लेना चाहिए.

पिछले साल दिसंबर में संसद में सरकार ने बताया कि   प्रारंभिक स्तर पर करीब नौ लाख शिक्षक पद खाली हैं?

नहीं ऐसा नहीं है. 30 छात्रों पर एक टीचर होना चाहिए. देशभर में पर्याप्त टीचर हैं.  दरअसल, समस्या डिप्लायमेंट में है. यानी देहात में जाने को लोग तैयार नहीं रहते तो वहां कमी महसूस होती है. इसी लिए हमने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि डिप्लॉयमेंट सही तरीके से करें. जहां कमी है उन राज्यों को रिक्तियां भरने को कहा है.

उत्तर प्रदेश और बिहार में रिक्तियां ज्यादा हैं?

नहीं, आप शिक्षा मित्रों को नहीं जोड़ रहे हैं.

शिक्षक कब तक ठेके पर रखे जाएंगे?

हर राज्य ने अलग-अलग तरीके से नियुक्तियां की है. अभी सब जगह तकरीबन परमानेंट बनाने की व्यवस्था तय हुई है. जहां बिना विज्ञापन से नियुक्तियां हुईं, वहां विज्ञापन निकाल कर और प्रतियोगिता के जरिए नियुक्तियां होनी चाहिए.

राज्यों को क्या कोई निर्देश दिया गया है?

सभी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि रिक्तियां न रहें, उचित डिप्लॉयमेंट हो, क्वालिफिकेशन हो और शिक्षकों के प्रदर्शन का मूल्यांकन होते रहना चाहिए.

कई राज्यों के स्कूलों में बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव है.

यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है.

प्रारंभिक शिक्षा को लेकर व्यापक तरीके से केंद्र सरकार क्या कर रही है? आरटीई को रिव्यू कर रहे हैं?

हम रिव्यू नहीं, आरटीई को सशक्त बना रहे हैं. हमने लर्निंग आउटकम्स डिफाइन किया है. इसी के आधार पर 13 नवंबर को नेशनल एसेसमेंट सर्वे भी किया है. यह हर साल होगी. दूसरी बात यह कि 15 लाख शिक्षक प्रशिक्षण पूरा कर लें. तीसरा, हमने 5वीं और 8वीं में परीक्षा परीक्षा लेने का अधिकार राज्यों को देने के लिए संसद में बिल पेश किया है, जो जल्द पास हो जाएगा. 25 राज्य परीक्षा कराना चाहते हैं और जो चार राज्य ऐसा नहीं चाहते उन्हें छूट रहेगी. चौथा, दसवीं में सीबीएसइ की परीक्षा ऑप्शनल थी, जिसे हमने कंपलसरी किया. उसका बहुत फायदा हुआ.

राज्यों का कहना है कि उनके पास प्रारंभिक शिक्षा के लिए पर्याप्त फंड नहीं है.

नहीं, ऐसा नहीं है. 2014 में तीन लाख करोड़ रु. राज्यों को मिलते थे, अब छह लाख करोड़ रु. मिलने लगे. हर साल एजुकेशन में 10 प्रतिशत पैसा बढ़ाना है, ऐसा 14वें वित्त आयोग ने कहा है. जो राज्य ऐसा नहीं करते उनको यह शिकायत है. केंद्र सरकार अपना पैसा सर्व शिक्षा में दे रही है.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति कब तक आएगी?

ड्राफ्ट 31 दिसंबर तक तैयार हो जाएगा और उसके बाद एक-दो महीने और लगेंगे.

उसमें प्रारंभिक शिक्षा को लेकर कुछ विशेष होगा?

निश्चित रूप से उसे भी इसमें शामिल किया जाएगा.

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