लोग डर रहे, कहीं मैं फिर कुलपति न बन जाऊं: बीएचयू के कुलपति

छात्राओं पर लाठीचार्ज के बाद बीएचयू प्रशासन देश-विदेश में आलोचना के केंद्र में है. कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी कई तरह के आरोपों से घिरते जा रहे हैं. उन्होंने 25 सितंबर को बीएचयू के होल्कर भवन में असिस्टेंट एडिटर आशीष मिश्र से बातचीत में इन्हीं आरोपों पर अपनी सफाई दी. उनसे बातचीत के प्रमुख अंशः

प्रो. गिरीश चंद त्रिपाठी
प्रो. गिरीश चंद त्रिपाठी

छात्राओं पर लाठीचार्ज के बाद बीएचयू प्रशासन देश-विदेश में आलोचना के केंद्र में है. कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी कई तरह के आरोपों से घिरते जा रहे हैं. उन्होंने 25 सितंबर को बीएचयू के होल्कर भवन में असिस्टेंट एडिटर आशीष मिश्र से बातचीत में इन्हीं आरोपों पर अपनी सफाई दी. उनसे बातचीत के प्रमुख अंशः

बीएचयू लगातार अराजकता का केंद्र क्यों बना हुआ है?

बीएचयू ही नहीं, देश में उच्च शिक्षा के सभी सरकारी संस्थान राजनीति का अखाड़ा बन गए हैं. यह सभी विश्वविद्यालयों का निजीकरण करने की साजिश भी है. बीएचयू में छेडख़ानी की घटना इतनी बड़ी नहीं थी कि उसके लिए इतना बड़ा प्रदर्शन किया जाए.

बीएचयू में छात्राओं से छेडख़ानी बढ़ी है.

बीएचयू 20 विश्वविद्यालयों के बराबर है. अगर यहां 20 घटनाएं होती हैं और दूसरे विश्वविद्यालय में एक, तो कौन ज्यादा है? अगर प्रशासन कहता है कि रात आठ बजे के बाद बाहर जाएं तो बताकर जाएं तो छात्राओं को आपत्ति होती है. आरोप लगता है कि वे जेल में बंद कर दी गई हैं.

बीएचयू में छात्र आक्रोशित हैं.

युवा सत्य और न्याय के लिए संघर्ष करता है. अगर असत्य और अन्याय को भी सत्य तथा न्याय जैसा खड़ा कर दिया जाए तो युवा उसके साथ भी खड़ा हो जाता है. बीएचयू की घटना इसी का उदाहरण है.

आप पर संवादहीनता का आरोप है.

यह गलत है. मैं लगातार छात्रों से मिलता हूं. बीएचयू में प्रदर्शन कर रही छात्राओं से भी मैं स्वयं मिला था. छात्राओं की सुरक्षा के लिए मैं सारे प्रयत्न कर रहा हूं.

विश्वविद्यालय की नियुक्तियों पर सवाल खड़े हुए हैं?

जो लोग मेरे कार्यकाल की नियुक्तियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं, उनकी खुद की नियुक्ति गलत ढंग से हुई है. मेरे समय हुई गलत नियुक्ति का एक उदाहरण दिखा दीजिए, मैं मुंह नहीं दिखाऊंगा.

बीएचयू का भगवाकरण करने का आरोप है.

भगवा वाले ही तो मेरे खिलाफ धरने पर बैठे हैं. जिनका स्वार्थ पूरा नहीं हो रहा, वे मेरे पीछे पड़े हैं.

बीएचयू में छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहे.

क्या मेरे कार्यकाल से पहले छात्रसंघ चुनाव होते थे?

विश्वविद्यालय में कई दागी शिक्षक प्रशासनिक पदों पर तैनात हैं.

कई लोगों पर आरोप हैं पर वे यहां नौकरी कैसे कर रहे हैं? मैं तो उन्हें बीएचयू लाया नहीं.

फिजी में यौन उत्पीडऩ की सजा पाने वाले शिक्षक को मेडिकल सुपरिटेंडेंट बना दिया गया.

अगर ये यौन उत्पीडऩ की सजा पाए थे तो इन्हें किसने बीएचयू का शिक्षक बनाया. मैंने तो नहीं बनाया.

बीएचयू के शिक्षक भी आपके खिलाफ हैं.

अवैध ढंग से नियुक्ति पाए शिक्षक मेरे खिलाफ खड़े हैं. ऐसे लोग हैं जो किसी स्कूल में पढ़ाते थे और सीधे बीएचयू में शिक्षक बन गए. अब ऐसा लाभ दोबारा नहीं मिल पा रहा तो मेरा विरोध कर रहे हैं. ये लोग डर रहे हैं कि कहीं मैं दोबारा कुलपति न बन जाऊं.

बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर ने अपने बेटे-बहू को विश्वविद्यालय में नियुक्ति दिलवाई है.

बीएचयू में कौन-सा प्रोफेसर है जिसकी बहू यहां काम नहीं कर रही? मैं गिनाऊं, डीन फैकल्टी ऑफ कामर्स किसके बेटे हैं? इंस्टीट्यूट ऑफ एन्वायरनमेंट ऐंड डेवलपमेंट के पूर्व निदेशक किसके दामाद हैं, इनकी पत्नी कहां हैं? हमारा बेटा तो यहां नहीं तैनात हुआ.

कुछ परीक्षाओं में भी गड़बडियां हुई हैं.

मेरी जानकारी में किसी परीक्षा में गड़बड़ी नहीं हुई है, जबकि मैंने तो सारी गड़बड़ी दूर कर दी है.

आप दोबारा बीएचयू के कुलपति बनने के लिए लामबंदी कर रहे हैं?

हमारी पैरवी छोटे-मोटे लोगों ने नहीं की है. काशी विद्वत परिषद, अन्नपूर्णा मंदिर के महंत हमारे पक्ष में खड़े हैं. मैंने इनके रिश्तेदारों को नियुक्त नहीं किया है. मैंने पहले भी कुलपति पद के लिए कोई दरख्वास्त नहीं दी थी. वैसे भी बीएचयू कुलपति रहने के दौरान मुझे कई तरह की बीमारियों ने जकड़ लिया है.

बीएचयू कुलपति के रूप में तीन वर्ष के कार्यकाल से आपने क्या सबक लिया?

मैं इकनॉमिक्स में 'थ्योरी ऑफ इनविजिबल हैंड्स' पढ़ाया करता था. यह मैंने बीएचयू में आकर अनुभव किया. यहां 'अदृश्य हाथ' काम कर रहे हैं.

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