कंगना रनौत का ले पंगा

कंगना रनौत, अभिनेत्री, बागी स्वभाव, भाई-भतीजावाद और विवादप्रियता पर

बंदीप सिंह
बंदीप सिंह

कुछ लोगों को आपका स्वभाव क्यों पसंद नहीं आता?

बचपन से ही मैं कुछ अलग स्वभाव की रही हूं. पिता जब खिलौने खरीदते वक्त बेटा और बेटी में भेदभाव करते थे तब भी मैं उनसे सवाल कर दिया करती थी. अब तो यह मेरी जिंदगी का नियम-सा बन गया है. अपनी किस्मत ही कुछ ऐसी है. छोटी से छोटी चीज के लिए भी मुझे लडऩा पड़ता है. लेकिन जो मेरा हक है वह मुझे हासिल करना ही है. चाहे इसके लिए मुझे लडऩा ही क्यों न पड़े. इस वजह से मुझे कोई विद्रोही, बगावत करने वाली या लड़ाकू कहे तो कोई फर्क नहीं पड़ता.

यह स्वभाव कहीं करियर पर ब्रेक न लगा दे?

स्वभाव बदलना मुश्किल है. जहां तक करियर का सवाल है तो मुझमें प्रतिभा है, यह मैंने साबित किया है. और इस इंडस्ट्री में प्रतिभा ही आपको अपने मुकाम तक पहुंचाती है.

बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद को लेकर आप दुखी हैं?

यह गलत परंपरा है. बॉलीवुड से जुड़े लोग अपने बच्चों और रिश्तेदारों को शानदार तरीके से पेश करते हैं जबकि छोटे शहरों से आए कलाकारों का डेब्यू वैसा नहीं होता. ऐसा नहीं होना चाहिए.

कंगना और विवाद का चोली-दामन का साथ हो गया लगता है. सिमरन के लेखक अपूर्व असरानी का आरोप है कि उनकी मर्जी के खिलाफ आपने बतौर स्क्रिप्टराइटर नाम शामिल करा लिया.

सरासर गलत आरोप है. अपूर्व के कहने पर ही लेखक के रूप में मेरा नाम शामिल किया गया है. फिल्म की कहानी मेरे ऊपर ही है. मेरा किरदार जीवंत रहे, इसके लिए मुझसे राइटिंग में मदद ली गई. तभी अपूर्व ने कहा कि मैंने हेल्प की है, इसलिए मुझे अपना नाम लेखक के तौर पर देना चाहिए.

आप लोगों का दिल इतना दुखाती हैं, आखिर क्यों?

सिमरन के निर्देशक हंसल मेहता ने बताया कि गैंगस्टर के बाद वे मुझे लेकर फिल्म बनाना चाहते थे. उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट सुनने दफ्तर बुलाया. मैने सोचा, मुझे अंग्रेजी आती नहीं तो मुझे काम नहीं देंगे. मैंने स्क्रिप्ट सुनने से इनकार कर दिया. मुझे वैसे यह वाकया याद नहीं. पर मुझे अफसोस भी नहीं. 

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