अपने समय से बड़ा फिल्मकार

सफदर हाशमी ने अपने विस्तृत लेख में उन्हें भारतीय सिनेमा को अपनी भाषा देने वाला कहा है तो अरुण खोपकर उन्हें बंगाल का शाही बाघ पुकारते है.

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ऋत्विक घटक

- अजय कुमार शर्मा

बंगाली सिनेमा के साथ ही भारतीय सिनेमा को कलात्मक छवि प्रदान करने वाली त्रयी (सत्यजित राय, मृणाल सेन के साथ) के सबसे प्रतिबद्ध सदस्य थे ऋत्विक घटक. हिंदी में उन पर संपादित पुस्तक ऋत्विक घटक: नव यथार्थवादी सिनेमा का कलात्मक सर्जक  शीर्षक से आई है.

सात अध्यायों में उनके पूरे व्यक्तिगत, वैचारिक और सृजनात्मक जीवन को जांचा-परखा गया है. लेकिन इसके लिए जगह-जगह से पूर्व प्रकाशित बांग्ला और अंग्रेजी सामग्री को अनूदित किया गया है.

धरोहर अध्याय के अंतर्गत ऋत्विक घटक के लिखे लेख और वक्तव्यों में सत्यजित राय पर लिखा उनका लेख संकलित है तो दृष्टिकोण अध्याय में घटक के परिवार, साथी कलाकारों और फिल्मकारों ने उन्हें याद किया है जिनमें प्रमुख हैं, उनकी पत्नी सुरमा घटक, बहन प्रतीति देवी, भतीजी महाश्वेता देवी, सत्यजित राय, मृणाल सेन, सलिल चौधरी, उत्पल दत्त, अनिल चटर्जी, गुलजार, मणि कौल, अडूर गोपालकृष्णन आदि.

सफदर हाशमी ने अपने विस्तृत लेख में उन्हें भारतीय सिनेमा को अपनी भाषा देने वाला कहा है तो अरुण खोपकर उन्हें बंगाल का शाही बाघ पुकारते है. घटक के साथ काम करने वाले और अभी तक जीवित एकमात्र निर्माता हबीबुर्रहमान खान जो उस समय 27-28 साल के थे, इसी अध्याय में कहते हैं कि तितास एकटि नदीर नाम की शूटिंग ढाका समेत पांच जगहों पर एक साल तक हुई. वे अक्सर बोलते थे, ''तुम चले जाओ.’ लेकिन मैं साए की तरह पूरा क्रू लेकर पड़ा रहा. डर लगता था पीते हैं, मूडी आदमी हैं, कहीं भाग न जाएं.’’

मूल्यांकन अध्याय में घटक के रंगमंच, इप्टा, एफटीआईआइ में उनके कार्य और सिनेमा को मुख्यत: हिंदी लेखकों-पत्रकारों ने परखा है जिसमें मंगलेश डबराल ने उनके सिनेमा को कविता का सिनेमा कहा है. रविभूषण ने अपने अति विस्तारित लेख में बताया कि घटक हिंदी कवि मंगलेश डबराल, गिरधर राठी, विनोद भारद्वाज और विष्णु खरे आदि से लगातार संपर्क में रहे. तीन अन्य संक्षिप्त अध्यायों में उनके तीन साक्षात्कार, कुछ विचार और फिल्म आलोचकों की नजर में उनके काम आदि शामिल हैं.

पुस्तक की सराहना इसलिए की जानी चाहिए कि यह हिंदी पाठकों को ऋत्विक घटक पर जरूरी सामग्री एक जगह उपलब्ध कराती है. हालांकि अनुवाद अधिक है और मूल हिंदी आलेख कम. उम्मीद की जानी चाहिए कि ऐसे कद्दावर फिल्मकार पर हिंदी में कुछ और बेहतर और मौलिक काम शीघ्र ही आएगा.

पुस्तक का नाम: ऋत्विक घटक
नव यथार्थवादी सिनेमा का कलात्मक सर्जक 
संपादक: ज़ाहिद ख़ान 
लेखक: जयनारायण प्रसाद
प्रकाशन: गार्गी प्रकाशन
कीमत: 400 रुपए.

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