ज्ञान की परिधि में मनुष्य
नीरज कुमार अपनी पुस्तक कालचक्र तंत्र के दूसरे खंड में सदियों पहले लिखे या कहें कि गढ़े गए समीकरण को बिल्कुल नई व्याख्यात्मक और तार्किकता की जमीन से मापते हैं.

समय को क्या सीधी रेखा की जगह एक चक्र माना जा सकता है? जहां घटनाएं, अनुभव और बदलाव अपने ही भीतर लौटते रहते हैं. दुनिया को भीतर-बाहर से देखने का यह एक क्रांतिकारी नजरिया है. नीरज कुमार की कालचक्र तंत्र का दूसरा खंड इसी बदली हुई दृष्टि की एक गहरी, जटिल और साहसिक पड़ताल है.
भारतीय ज्ञान परंपरा में समय पर सबसे सटीक ग्रंथ की व्याख्या करती यह किताब आधुनिक समय, विज्ञान और मानवीय अनुभवों के बीच शून्य से संवाद का अति विषद कार्य करती है. शायद यही कारण है कि नीरज कुमार की यह किताब समय के एक बिंदु पर इतनी वैज्ञानिक दिखाई पड़ती है कि इसे किताब न कहकर ग्रंथ ही कहना ठीक जान पड़ता है. लेखक कालचक्र को तीन स्तरों पर समझाते हैं. बाह्य, आंतरिक और अन्य.
समय के तंत्र पर सदियों पहले लिखे या कहें कि गढ़े गए समीकरण को लेखक बिल्कुल नई व्याख्यात्मक और तार्किकता की जमीन से मापते हैं. जैसे सदियों पुराने किसी फलदार, लेकिन लुप्तप्राय पेड़ की कलम से नया पौधा उगाकर उसके बीजरूप को समय के चक्र में पुनर्जीवित करना. संख्याओं, पैटर्न्स और प्रतीकों के भीतर अर्थ खोजते हुए लेखक बेहद दिलचस्प और जोखिम भरी व्याख्याओं तक पहुंचते हैं.
एक महाग्रंथ की मीमांसा के लिए महामारी के दौर में भी अथक और अटल प्रयासों में लीन लेखक ने तमाम तरह के विरोध, आलोचना, ऑनलाइन उत्पीड़न और धमकियों के बावजूद जिस संकल्प से पांच खंडों के इस काम को पूरा किया है, वह इस किताब को एक अकादमिक कोशिश से कहीं आगे ले जाकर एक साहसिक बौद्धिक हस्तक्षेप बनाता है.
पहले खंड को दुनिया भर के विद्वानों ने इसके अर्थ निर्माण की व्यापकता में एक सांस्कृतिक पुनर्स्थापना माना है. पांच खंडों में किया गया यह काम वरिष्ठ लोकसेवक नीरज कुमार की उपलब्धि के तौर पर दर्ज किया जाएगा जिन्होंने एक अत्यंत जटिल, रहस्यमय और प्राय: सीमित दायरे में समझे जाने वाले विषय को वर्तमान कालचक्र के केंद्र में ला खड़ा किया है.
अपनी अति-आवश्यक पेशेवर व्यस्तताओं में भी लेखक ने जिस हठ से इस गंभीर विषय को साधा है वह याद दिलाता है कि यह साधकों का महादेश है, जहां ज्ञान केवल ग्रंथों में ही नहीं बल्कि उस जिद में भी होता है जिसके साथ कोई साधक उसे खोजता है.
पुस्तक का नाम: कालचक्र तंत्र खंड 2
लेखक: नीरज कुमार
प्रकाशन: डीके प्रिटवर्ल्ड
कीमत: 2,000 रुपए.