अनदेखे शिखर, अनकहे किस्से
रंगों, रेखाओं और विस्मय से भरे हिमालय के डेढ़ सदी पुराने दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी जिन्हें पहली बार जर्मनी से भारत लाया गया .

दूर कहीं मठ की कांपती गेरुई रेखा, एक झील की रुपहली चुप्पी, किसी पहाड़ी के बादलों से ढंके बाल, कानों में देवदार के झुमके, एक बिलखती नदी और उसके किनारे बसावट. हिमालय केवल पर्वत नहीं, एक जीवित स्मृति है जो करोड़ों वर्षों की भूगर्भीय कथाओं को अपनी शिराओं में संजोए है.
जब कोई मनुष्य उसे अपनी तूलिका से उतारने बैठे तो ऐसी रचना होती है जो न तो पूरी तरह विज्ञान है, न कला, बल्कि दोनों के बीच की ऐसी सुनहरी रेखा जिसे हम दर्शन कह सकते हैं. ऐसी ही एक रचना यात्रा का साक्ष्य भारत की धरती पर आया है, हिमालयन एनकाउंटर्स, हिडन व्यूज फ्रॉम 170 इयर्स अगो.
यह प्रदर्शनी तीन जर्मन भाइयों हर्मन, अडोल्फ और रॉबर्ट श्लागिन्ट्वाइट के उन चित्रों-रेखाचित्रों को पहली बार सार्वजनिक कर रही है जो 170 वर्षों से जर्मनी के संग्रहालय में रखे हैं. एक दशक से ज्यादा के श्रम, राजनयिक प्रयास और विद्वतापूर्ण समर्पण के बाद पर्यावरणविद् शेखर पाठक और पीपल्स एसोसिएशन फॉर हिमालय एरिया रिसर्च की मेहनत इन्हें उस देश लाई है जहां इन्हें बनाया गया था.
जब हिमालय यूरोपीय मानचित्रों पर रहस्यमयी रिक्तियों से भरा था तब श्लागिन्ट्वाइट भाइयों ने 1854 से 1857 के बीच भूविज्ञान, भूगोल और मानव-संस्कृति का विशाल दस्तावेजीकरण किया.
कलात्मक दृष्टि से यह प्रदर्शनी असाधारण है. हिमालयी वनस्पति के चित्र हक्वबोल्ट की दृष्टि का अनुसरण करते हैं.
कश्मीर घाटी और उस समय सिल्क रूट के बीच बसा लेह व्यापारियों का पड़ाव था. हर्मन यहां रुकते हुए कुनलुन पर्वतमाला की ओर पहुंचे. दूसरी ओर अडोल्फ, बाल्टिस्तान की हिमाच्छादित घाटियों में उतर गए. वहां ग्लेशियर उनके तईं हिमविज्ञान की प्रयोगशाला बने. इस दौरान बनाए चित्र आश्चर्यचकित करते हैं.
पूर्वी भारत की ओर बढ़ते उन्होंने उन बस्तियों और साधारण भवनों की संरचनाओं को भी उकेरा जो आज या तो नष्ट हो चुकी हैं या बदल गई हैं. चेरापूंजी की शाश्वत हरियाली, बांस के अद्भुत पुल, शिलाओं पर टिके घर. तीनों भाइयों ने जैसे कुछ उपेक्षित नहीं किया, कलात्मकता से देखा.
दिल्ली के बाद यह प्रदर्शनी दून लाइब्रेरी, देहरादून (1-9 मई) और सीआइएसटी इंटर कॉलेज, नैनीताल (12-18 मई) की यात्रा करेगी. जो पहाड़ों से प्रेम करते हैं या हिमालय के प्रति निजी ऋण अनुभव करते हैं या जो केवल उस सौंदर्य के सामने खड़े होना चाहते हैं, उन्हें यह अदेखा जरूर देखना चाहिए.