दुनिया के गोपनीय सैन्य अभियान

हम किन घटनाओं को याद रखते हैं और किन्हें इतिहास की परछाइयों में विलीन होने देते हैं, हिडन वॉरफेयर पुस्तक इसकी भी पड़ताल है

हिडन वॉरफेयर पुस्तक का कवर
हिडन वॉरफेयर पुस्तक का कवर

आज जब दुनिया के बहुतेरे देश युद्धरत हैं और कूटनीति किनारे झांक रही है तब यह समझना बेहद जरूरी है कि युद्ध और शांति के बीच का 'ग्रे जोन’ अक्सर जासूसी और रणनीतिक संकेतों में झूल रहा होता है.

यही आधुनिक संघर्ष का केंद्र है और यही सचाई प्राय: युद्धों को उनके प्रचंड आक्रमणों, विख्यात सेनापतियों और निर्णायक विजयों के जरिए याद रखा जाता है.

लेकिन इन भव्य आख्यानों के पीछे कुछ गुप्त अभियान, रणनीतिक भूल, गोपनीय कूटनीति और वे क्षणिक भ्रांतियां भी होती हैं जिनसे दुनिया विनाश के कगार पर पहुंच सकती है. हिडन वॉरफेयर में मंगेश सावंत इन्हीं अदृश्य रेखाओं को केंद्र में लाते हैं और पारंपरिक सैन्य इतिहास की सीमाओं को चुनौती देते हैं.

सावंत कहते हैं कि सैन्य इतिहास का विमर्श लंबे समय तक यूरोप और अटलांटिक तक सीमित रहा है, जबकि प्रशांत और हिंद महासागर के इलाके भी बीसवीं शताब्दी की विश्व राजनीति को आकार देने में उतने ही निर्णायक रहे. यानी यह भौगोलिक विस्तार एक वैचारिक विस्तार भी है और इतिहास को बहुकेंद्रीय बनाने का प्रयास भी.

पुस्तक की विषय सूची भू-राजनैतिक मानचित्र की तरह है, जो भूले-बिसरे संघर्षों को रेखांकित करती है. जर्मन जहाज कोरमोरान और ऑस्ट्रेलियाई युद्धपोत एचएमएएस सिडनी के संघर्ष से शुरु होकर यह किताब साइलेंट स्ट्राइक ऑन यामामोतो तक पहुंचती है, जो जापानी नौसेना के सबसे प्रभावशाली सैन्य मस्तिष्कों में से एक थे.

शैलीगत रूप से सावंत अकादमिक गंभीरता और रोचक कथात्मकता का संतुलन बनाते हैं. घटनाओं के वर्णन के साथ व्यापक संदर्भों जैसे जासूसी नेटवर्क, गुप्त कोडिंग, कूटनीतिक वार्ताएं, तकनीकी नवाचार और वैचारिक संघर्ष को पाठक पृष्ठ-दर-पृष्ठ समझ सकता है.

लेखन विश्लेषणात्मक होते हुए भी दृश्यात्मक है. जैसे,अगोवा से जुड़े न्यूट्रल टेरिटरी वाले पाठ में सावंत लिखते हैं, ''वॉल्टर फ्लैचर, मालाबार हिल के एसओई दफ्तर में द टाइम्स ऑफ इंडिया पढ़ रहे थे. तभी उनके पास नोट के जरिए संदेश आता है. वे उस पर लिखा केवल एक शब्द पढ़ते हैं और बगल वाले कमरे में चले जाते हैं. डेस्क पर बैठे एलेक्स पीटर से कहते हैं, लॉन्गशैंक्स. उन्होंने कर दिखाया.’’

पात्रों के संवाद, वॉर डायरी के अंश, सेना से जुड़ी बारीकियां और उस वातावरण की रचना सिनेमा की कहानी-सा एहसास देता है. पुस्तक का कवर भी संभवत: यही ध्यान में रख बनाया गया लगता है.
हम किन घटनाओं को याद रखते हैं और किन्हें इतिहास की परछाइयों में विलीन होने देते हैं, हिडन वॉरफेयर इसकी भी पड़ताल है.

1945 का साल यहां किसी समापन रेखा की तरह नहीं बल्कि एक संक्रमण रेखा की तरह उपस्थित है. बोध कराता हुआ कि इतिहास के निर्णायक मोड़ अक्सर किसी अवरोधित संदेश में, किसी गोपनीय बैठक में, किसी समुद्र में चल रहे अभियान में ओझल रहते हैं. मंगेश ने इन्हीं छायाओं को स्वर दिया है इसलिए पुस्तक को केवल सैन्य अभियानों की तरह नहीं बल्कि समकालीन विश्व को समझने की दिशा में भी पढ़ा जाना चाहिए.

पुस्तक का नाम: हिडन वॉरफेयर
अननोन मिलिट्री ऑपरेशन्स फ्रॉम वर्ल्ड वार टू टु द कोल्ड वॉर
लेखक: मंगेश सावंत
प्रकाशन: रूपा पब्लिकेशंस
कीमत: 695 रुपए.

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