ये आत्महंता चूहामार!
चूहों के बहाने शॉर्ट फिल्म 'द रैट कैचर' हमें संभावनाओं और आशंकाओं के उस गर्भगृह में ला पटकती है, जहां प्रारब्ध और नियति दोनों ही निरर्थक हो जाती हैं.

एक चूहा कितना चालाक हो सकता है? और अगर चूहों की कहें तो? क्या शहर भर के चूहे मिलकर चूहों के एक ऐसे शिकारी का मुखौटा कुतर सकते हैं, जिसके इंसानी शरीर में अब चूहे की आत्मा रहती है. वो भी सबसे सयाने चूहे की आत्मा. एक कार मैकेनिक क्लॉड अपने गैरेज में बढ़ते चूहों की समस्या से उकता चुका है.
सब जतन, नुस्खे और मशविरे बेअसर हो चुके हैं. चूहे ईश्वर की तरह अदृश्य, अपार और असरकारी हो गए हैं. अंतिम उपाय के तौर पर क्लॉड एक रैट कैचर को बुलाता है. लेकिन, ये चूहों का कोई आम शिकारी नहीं है. खुद को चूहों के लिए मृत्युदूत घोषित करता ये चूहामार इतने बरसों से चूहों का काल बना हुआ है कि इसे भी अब ठीक-ठीक अपने पहले शिकार के बारे में याद नहीं.
कभी जंगी जहाज के पायलट रहे रोल्ड डाह्ल की लिखी अमर कहानियों में से चार कहानियां चुनकर वेस एंडरसन ने ये अपूर संसार रचा. द रैट कैचर इन्हीं में से एक किस्सा है, जिसे एक पत्रकार सुना रहा है. गैरेज के मालिक और एक अप्रतिम चूहामार के साथ पत्रकार एक ऐसी जादूई किस्सागोई बुनता है, जहां एक मामूली सी घटना अपने तथ्य, रस और दर्शन के साथ आत्मा को बेध देती है.
छपे हुए शब्दों के सिनेमाई तर्जुमे का एक यादगार काम है रैट कैचर. इतना बारीक, कि जब चूहामार अपनी जेब से जहर का डिब्बा निकालकर मैकेनिक क्लॉड को जहर के खतरे बताते हुए उस पर गर्व कर रहा है, तब असल में उसके हाथ में कोई डिब्बा होता ही नहीं.
चूहे और नेवले को अपनी जैकेट में लड़वाता चूहामार केवल कल्पना और स्मृति का सहारा लेता है. सिनेमा की तमाम तकनीकी संभावनाओं के बीच स्टेज की लाइव एक्टिंग में इस्तेमाल होने वाले इस टूल का इस्तेमाल ऐसा ही है जैसे इत्र को एक शीशी से दूसरी में पलटते हुए उसकी खुशबू बचा ले जाना.
चूहे को पकड़ने के लिए चूहे की तरह सोचना होता है. लेकिन, ये चूहामार तो चूहा हो चुका है. दबे पांव चलते हुए फुसफुसाहट में बात करना और सदा सचेत कान. रैट कैचर अपनी इस धज को कला का सर्वश्रेष्ठ बिंदु और अपने जीवन भर की पूंजी मानता है. हम सबकी तरह. चूहामार ये मानता है कि वो चूहों को मारने के लिए ही पैदा हुआ है. जिसने जो साध लिया, वही नियति.
जबकि, एक ना एक दिन हेलमेट पहनकर लबालब भरे स्टेडियम के बीच मैदान में उतरी महानता भी जीरो पर आउट होती है. फिर, शून्य का बोझ लादे हर फड़ पर हारता जुआरी गलत फैसले लेने लगता है. लगातार. इसी दरकते दंभ से चोट खाए चूहामार के अंतिम निर्णय की महागाथा है रैट कैचर. जब अनगिनत दफे आजमाए नुस्खे की चूक से छटपटाता चूहामार सीधा दर्शक से पूछता है 'तुमने क्या महारत हासिल की है पार्टनर?’
रोल्ड और एंडरसन बहुत सरलता से एक चूहे की मार्फत अपने सुनने-देखने वालों के भीतर गहरे उतरते हैं और एक बीज प्रश्न छोड़कर उतनी ही सफाई से हाथ झाड़ लेते हैं. आप ये मुड़ी तुड़ी पर्ची निकालते हैं और उस पर लिखा होता है 'तुमने दांव पर क्या लगाया है?’
कहीं आप चूहे मारने को अपनी कला या गणित से कम ना आंकें, इसलिए ये चूहामार बार-बार याद दिलाता है कि उसका काम सबके बस की बात नहीं है. ठीक आपकी विधा जैसे ही. लेकिन क्या आप उस दिन के लिए तैयार हैं जब चूहे आपको धोखा देंगे? क्योंकि आखिरकार, चूहे बहुत चालाक होते हैं.
द रैट कैचर नेटफ्लिक्स पर मौजूद याद रह सकने वाली कुछ उन चुनिंदा फिल्मों में से एक है जिनका शब्दों से दृश्य में सटीक, सार्थक और सरल अनुवाद हो पाया है
सिने-सुझाव
गजेंद्र सिंह भाटी
एक्सट्रैक्शन 2020
ब्लैक-ऑप्स मर्सिनरी टायलर रेक (क्रिस हेक्वसवर्थ) ढाका, बांग्लादेश जाता है. एक खतरनाक मिशन पर. एक भारतीय ड्रग लॉर्ड के बेटे को किडनैप कर लिया गया है. सामने दुश्मन भी ड्रग लॉर्ड है. माफिया. फिर बांग्लादेश का करप्ट सिस्टम भी है.
इस फिल्म में बेहद खतरनाक, बर्बर, माथा भन्ना देने वाले, कमाल का असर छोड़ जाने वाले एक्शन सीक्वेंस हैं. बहुत परिष्कृत एक्शन. दुनिया की बेस्ट एक्शन फिल्मों में से एक. हो भी क्यन, स्वयं जाने-माने स्टंट कॉर्डिनेटर सैम हारग्रेव ने इसे डायरेक्ट किया है.
कहां देखें: नेटफ्लिक्स
सीरियाना 2005
अगर पॉलिटिकल थ्रिलर्स का शौक है तो यह फिल्म आपके लिए है. नायाब. सीआइए एजेंट बॉब बार्क्स (जॉर्ज क्लनी) और कई याद रह जाने वाले किरदारों की यह कहानी है जो पांच कॉन्टिनेंट में घटती है. ये सब तेल से बेइंतहा रईस हो चुके मिडिल ईस्ट में एक कठपुतली सत्ता व्यवस्था को बदलने के ऑपरेशन का हिस्सा बन जाते हैं. एक ऐसा ऑपरेशन जिसकी वैधता संदिग्ध है. ग्लोबल ऑयल इंडस्ट्री, भ्रष्टाचार, सीआईए, बिजनेस डील्स, चरमपंथियों, मिडिल ईस्ट और जियो पॉलिटिक्स पर ऐसी सिर घुमाने वाली फिल्म नहीं बनी.
कहां देखें: प्राइम वीडियो
चार्ली विल्सन्स वॉर 2007
अमेरिकी सांसद चार्ली विल्सन (टॉम हैंक्स) और सीआइए का अधिकारी गस्ट (फिलिप सीमूर हॉफमैन) मिलते हैं. कुछ प्लान करते हैं. ऑपरेशन साइक्लोन. इसके अंतर्गत अफगानिस्तान में मुजाहिद्दीनों के बीच जिहाद को फंड करते हैं ताकि सोवियत संघ को हरा सकें. वे दुनिया के सामने इसे 'आजादी की लड़ाई’ का नकाब पहनाते हैं. अमेरिका की यह कारस्तानी आगे चलकर वैश्विक आतंकवाद का बीज बोती है. इस विषय पर बनी बेस्ट फिल्मों में से एक. फिलिप सीमूर हॉफमैन की कमाल एक्टिंग.
कहां देखें: जियोहॉटस्टार
द अमेरिकन्स 2013-18
वॉशिंगटन डीसी के शांत उपनगर में रहने वाले फिलिप और एलिजाबेथ जेनिंग्स किसी भी आदर्श, आम अमेरिकी दंपति जैसे हैं. लेकिन सचाई यह है कि दोनों रूसी एजेंसी केजीबी के सबसे घातक हथियार हैं. पड़ोसियों के साथ बार्बीक्यू, बच्चों का स्कूल और प्यार भरा वैवाहिक जीवन, यह सब उनका अभेद्य कवर है जिसके पीछे दुश्मनों की खामोश हत्याएं घटती हैं. इनके लिए दिक्कत तब शुरू होती है जब ठीक बगल में एफबीआई का एजेंट स्टैन बीमन रहने आ जाता है और सब बदल जाता है. एडिक्टिव सीरीज.
कहां देखें: जियोहॉटस्टार.