मोहित सूरी ने कैसे 'सैयारा' के जरिए बॉलीवुड में रोमांस को किया जिंदा?

ऐसे वक्त में जब माना जा रहा था कि रोमांटिक बॉलीवुड फिल्मों का दौर लगभग खत्म हो गया है, मोहित सूरी ने इसी समय एक जबरदस्त हिट फिल्म बना डाली. आखिर किस तरह से उन्हें यह कामयाबी हासिल हुई?

फिल्म सैयारा के पोस्टर में अहान-अनीत
फिल्म सैयारा के पोस्टर में अहान-अनीत

कोई रील शूट की गई, न कोई इंटरव्यू दिया गया. शहरों में घूमकर या मॉल-कॉलेजों का चक्कर लगाकर कोई प्रचार नहीं किया गया. मगर दिल में गहराई तक उतर जाने वाले शानदार साउंडट्रैक और निर्देशक मोहित सूरी (जिन्होंने रिलीज से पहले मोटे तौर पर अकेले ही माहौल बनाने की जिम्मेदारी संभाल रखी थी) के कंधे पर टिकी रोमांटिक ड्रामा फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कदम रखते ही अच्छा-खासा धमाका कर दिया.

नए कलाकारों अहान पांडे और अनीत पड्डा की इस पहली फिल्म ने पहले ही दिन 20 करोड़ रुपए की कमाई कर डाली. इस पर संदेह जताते हुए कहा गया था कि आंकड़ा बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा या फिर गलत दावा किया जा रहा है. मगर 18 जुलाई वाले सप्ताहांत तक कोई भी इससे इनकार नहीं कर सकता था कि एक युवा जोड़े की कहानी सैयारा ने दर्शकों के दिल में गहरी जगह बना ली है.

इनके प्यार में सबसे बड़ी अड़चन खड़ी हो जाती है जब उनमें से एक को अल्जाइमर हो जाता है. यह कहानी जबरदस्त हिट साबित हुई. तीन दिनों में 83 करोड़ रुपए! रिकॉर्ड तो पहले ही बन चुके हैं—नए कलाकारों वाली किसी फिल्म के लिए सबसे बड़ा ओपनिंग वीकेंड, भारतीय सिनेमा में किसी रोमांटिक फिल्म की सबसे बड़ी ओपनिंग...पहले हफ्ते में 150 करोड़ रुपए का आंकड़ा छूने की उम्मीद के साथ फिल्म के 300 करोड़ रु. वाले क्लब में शामिल होने की संभावना दिख रही है. ये आंकड़े ऐसे समय में और भी उत्साह जगाते हैं जब माना जाने लगा था कि बड़े परदे पर रोमांटिक फिल्मों का बेहतरीन दौर खत्म हो चुका है.

पर यह सब आखिर हुआ कैसे? तो जवाब है, शायद इसका शानदार साउंडट्रैक, जो आमतौर पर सूरी की तमाम रोमांटिक फिल्मों (मर्डर-2, आशिकी-2, एक विलेन) की जान रहा है. यह न केवल भावनाओं का उबाल जगाता है, बल्कि कई बार तो कहानियों का पूरक बनने से कहीं ज्यादा गहरी बात कह जाता है. सैयारा के एल्बम में फहीम अब्दुल्ला के तौर पर एक नई प्रतिभा उभरी है. फहीम ने चार्ट बस्टर बने इसके टाइटल ट्रैक सैयारा तू तो को गाया तो है ही, इसके सह-कंपोजर भी हैं, जिस पर युवाओं को झूमते और गाते देखा जा सकता है.

सूरी कहते हैं, ''मेरा म्यूजिक रिकॉर्ड अच्छा होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि मैंने एक ऐसी कंपनी के साथ काम सीखा जो म्यूजिक और गानों पर बहुत ध्यान देती है. यही उसकी प्राथमिकता रही है.’’ वे इसका श्रेय अपने मामा महेश और मुकेश भट्ट को देते हैं, जिनके बैनर विशेष फिल्म्स ने उन्हें बड़ा ब्रेक दिया. वे कहते हैं, ''संगीत और रोमांस एकदम हमराही जैसे हैं.

मुझे एक ऐसी प्रेम कहानी बताइए जिसने अच्छा प्रदर्शन किया हो लेकिन उसका संगीत अच्छा न रहा हो. मुझे जमीन से जुड़े रहना पसंद है ताकि मैं लोगों की कही-सुनी बातों को सही अर्थों में समझ सकें.’’ फिर मोहब्बत, तुम ही हो और गलियां जैसे उनके गाने आज भी लोगों के कानों में रस घोल रहे हैं, जो बताता है कि उन्हें पता है कि क्या और कैसे करना है.

फिल्म और म्यूजिक का अटूट बंधन
हालांकि, सूरी का एक सफल रोमांटिक रिलीज वाला ट्रैक रिकॉर्ड ही सिर्फ इसके लिए काफी न था कि वे फिल्म निर्माताओं को बेच पाएं. इस कहानी को उन्होंने ऐसे समय परदे पर उतारा, जब दर्शक ऐसी प्रेम कहानियों के प्रति कोई रुचि नहीं दिखा रहे थे. उद्योग जगत का मानना है कि कोविड-19 के बाद से दर्शक अपने घरों में आराम से बैठकर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रेम कहानियां देखने का लुत्फ उठाते हैं और रोमांच से भरपूर, जानदार ऐक्शन फिल्में देखने के लिए ही सिनेमा हॉल का रुख कर रहे हैं.

सूरी को इसी में संभावनाएं नजर आईं. उन्होंने हाल ही में नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री सीरीज द रोमांटिक्स देखी जो यशराज फिल्म्स (वाइआरएफ) की शुरुआत और उसकी अथाह सफलता पर आधारित थी. यह उनके लिए काफी मददगार रही. वे कहते हैं, ''मैं स्क्रिप्ट लेकर इधर-उधर घूमता रहता था और सभी मेरे बारे में बहुत फिक्रमंद होते हुए कहते थे कि कोई भी इस तरह की फिल्म नहीं बनाएगा.’’ कोरियाई फिल्म ए मोमेंट टू रिमेंबर से प्रेरित होकर सूरी एक रचनात्मक साझेदारी पर केंद्रित म्यूजिकल रोमांस वाली फिल्म बनाना चाहते थे, जो एक गायक और एक गीतकार पर केंद्रित हो. यह मजमून उन्हें हमेशा उत्साहित करता रहा है.

वे बताते हैं, ''नायक (पांडे ने जो किरदार निभाया) एकदम अनगढ़ प्रतिभा है, जिसे नहीं पता कि उसे क्या करना चाहिए, और नायिका (पड्डा का निभाया किरदार) शब्दों की धनी है. वह जानती है कि नायक से सर्वश्रेष्ठ कैसे कराया जा सकता है. वे दोनों बस एक-दूसरे के लिए ही बने हैं लेकिन साथ नहीं रह सकते.’’ यह तालमेल उनकी दूसरी ब्लॉकबस्टर रोमांस फिल्म आशिकी-2 से अलग है, जिसमें दोनों प्रतिस्पर्धी के बजाए सहयोगी ज्यादा रहे.

सूरी को इसका अंदाजा न था कि अपने स्पाइ यूनिवर्स में व्यस्त यशराज फिल्म्स को एक प्रेम कहानी की तलाश भी है. वे बीस-तीस साल के दो नए कलाकारों वाली फिल्म पर 50 करोड़ रुपए का दांव लगाने को तैयार हो गए. अनुष्का शर्मा, रणवीर सिंह और भूमि पेडणेकर जैसी प्रतिभाओं को बॉलीवुड में कास्ट करने वाले डायरेक्टर शानू शर्मा को पांडे (अनन्या पांडे के चचेरे भाई) और पड्डा में एक आदर्श जोड़ी नजर आई. पड्डा को इससे पहले वेब सीरीज बिग गर्ल्स डोंट क्राइ में देखा गया था. मगर वाइआरएफ को रोमांस पर केंद्रित अपनी देखी-परखी शैली पर पूरा भरोसा था.

सूरी कहते हैं, ''यह बात मेरे लिए बहुत मायने रखती है कि वाइआरएफ ने मेरी फिल्म के साथ अपनी पुरानी शैली में वापसी का फैसला किया. रोमांटिक फिल्मों में मेरी तालीम सिनेमाघरों में जाकर यश (चोपड़ा) जी और आदि (आदित्य) सर की फिल्में देखने के साथ ही हुई है. हम सभी उनकी फिल्मों के दीवाने थे और उन्हें देखकर ही बड़े हुए हैं.’’

दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के नए और युवा कलाकारों को प्रचार के बोझ से बचा लिया गया. सूरी कहते हैं, ''हम किसी तरह की खास उम्मीदें नहीं पालना चाहते थे. मुझे लगता है कि उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन कर दिया है. उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. उनमें काम के प्रति एक तरह का जुनून नजर आता है. हमारे शुरुआत करने की तुलना में वे ज्यादा कुशल और तैयार दिखे. वे चाहते हैं कि उनका काम बोले.’’

रोमांस की वापसी
अब ऐसी चर्चाएं जोरों पर हैं कि 27 वर्षीय पांडे को अगली बड़ी फिल्म का मौका मिल सकता है. इस बात पर भी खूब बातें हो रहीं कि कैसे यह फिल्म हिंदी सिनेमा में एक बार फिर रोमांटिक फिल्मों का दौर वापस ला सकती है. आखिरकार, 25 वर्ष पहले आई कहो ना प्यार है  के बाद अब जाकर नवोदित कलाकारों वाली किसी प्रेम कहानी पर दर्शकों ने इतना प्यार उंड़ेला है.

वैसे, अभी बहुत कुछ एकदम साफ नहीं है. कहो ना...एक दशक से जारी प्रेम कहानियों के दौर की अंतिम कड़ी की तरह थी. उससे पहले बांहें फैलाकर डांस करने वाले शाहरुख खान इस शैली के बेताज बादशाह बने हुए थे. और हाल के समय की बात करें तो संदीप रेड्डी वांगा की कबीर सिंह (2019) एकमात्र ऐसी हिंदी रोमांटिक फिल्म थी जिसे दर्शकों ने पूरे दिल से अपनाया, जिसमें एक उग्र नायक के बेकाबू गुस्से ने दर्शकों के एक वर्ग को बेचैन कर दिया था.

बहरहाल, उद्योग में उम्मीदें बढ़ गई हैं. आशीर्वाद थिएटर्स के निदेशक और फिल्म प्रदर्शक अक्षय राठी कहते हैं, ''शुक्र है सैयारा ने सबका ध्यान खींचा और यह बता दिया कि इसी तरीके से ही बॉक्स ऑफिस पर असली सफलता हासिल की जा सकती है...उम्मीद है इससे इंडस्ट्री को एहसास होगा कि हमें बार-बार एक ही ढांचे में सीमित रहने की जरूरत नहीं. हमें दर्शकों को विविधता परोसनी होगी.’’

अगले कुछ महीनों में कोई रोमांटिक फिल्म दर्शकों के बीच सैयारा जैसी कामयाबी हासिल कर पाएगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त बताएगा. पर एक बात तो साफ है कि पांडे और पड्डा के रूप में इंडस्ट्री को दो युवा सितारे मिल गए हैं.

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