आमिर खान की फिल्म 'सितारे जमीं पर' बनने में कैसे लगे पांच साल?
आमिर खान अभिनीत और उनकी प्रोड्यूस की हुई 'सितारे ज़मीं' पर के बनने की कहानी कम दिलचस्प नहीं. उसके पूरे सफर के बारे में बता रहे हैं फिल्म निर्देशक आर.एस. प्रसन्ना

"जब सारी दुनिया लॉकडाउन में थी, मेरे लिए नई दुनिया खुल रही थी." यह कहना है फिल्मकार आर.एस. प्रसन्ना का. बात 2022 की है. प्रसन्ना उन दिनों चेन्नै में रहते थे. उन्हें किसी तरह आमिर खान से मिलने का मौका हाथ लगा था.
हालांकि यह वर्चुअल मुलाकात ही थी. प्रसन्ना कॉमेडी फिल्म शुभ मंगल सावधान के निर्देशन के लिए जाने जाते रहे हैं. यह तमिल में उन्हीं की निर्देशित और हिट साबित हुई फिल्म कल्यान समायल साधम का रीमेक थी.
प्रसन्ना के लिए आमिर से यह मुलाकात एक ऐसे सपने की तरह थी जिसे उन्हीं के शब्दों में कहें तो उन्होंने कभी देखने की जुर्रत तक न की थी.
नुक्ताचीनी के लिए मशहूर आमिर को अपनी स्क्रिप्ट पर राजी कर लेना आसान काम न था. लेकिन प्रसन्ना और लेखक दिव्य निधि शर्मा असामान्य दिमागी ढंग से काम करने वाले लोगों की बास्केटबॉल टीम को प्रशिक्षण देते बालिग हुए शख्स के बारे में मजेदार किस्सा सुनाकर उनकी तवज्जो पाने में कामयाब रहे. पांच साल बाद वह सितारे ज़मीन पर की शक्ल में सामने आया, जिसके निर्माता भी आमिर ही हैं.
आमिर खान प्रोडक्शंस के सांताक्रूज स्थित दफ्तर में विराजमान प्रसन्ना जिस तरह के जज्बात जाहिर करते हैं, उससे आमिर भी इत्तेफाक रखते होंगे. वे ''किस्सागो के तौर पर अपनी जवाबदेही" की बात करते हैं, जिसके लिए ''दिल" से निकली कहानियां लेकर लोगों तक पहुंचना जरूरी है.
वे बताते हैं कि तकरीबन सात साल तक फिल्म बनाने के फलक से नदारद रहने के बावजूद उन्हें किसी तरह का कोई ''असुरक्षा" बोध नहीं हुआ. वे इस बात पर जोर देते हैं कि अपने विषय को लेकर ''मन में पक्का भरोसा" जरूरी है.
लेकिन यही पक्का भरोसा उस वक्त थोड़ा डगमगा गया जब वे भारतीय सिनेमा के आखिरी सुपरस्टारों में से एक और वह भी तुनकमिजाज आमिर खान के दायरे में आए. प्रसन्ना कहते हैं, ''मैं बहुत बेचैन था. मैं इंपोस्टर सिंड्रोम से ग्रस्त था. मुझे यकीन नहीं हो सका कि मैं उन्हें निर्देशित कर रहा हूं. मुझे लगता, 'निश्चित ही वे तुम्हें आड़े हाथों लेने जा रहे हैं'."
दक्षिण भारतीय नाश्ते पर शुरू हुई आठ घंटे की बातचीत से वे सारे डर और आशंकाएं छूमंतर हो गईं और तत्काल सहजता का बोध तारी हुआ.
प्रसन्ना कहते हैं, ''आमिर सर काफी खुले हैं और उन्हें केवल प्रतिभा और सिनेमा के प्रति जोश दिखाई देता है, कोई और पहचान चिह्न नहीं. मैं आम तौर पर उन्हें अटलांटिस कहता हूं, (क्योंकि) वे जोशीले फिल्मकारों के शरणार्थी शिविर की तरह हैं. वे निर्देशक की काफी हिमायत करते हैं और उन्हें ताकतवर बनाते हैं."
अकेला जोश ही प्रसन्ना को आगे नहीं बढ़ाता. उन्हें ''जुनून" शब्द ज्यादा पसंद है. वे कहते हैं, ''मुझे कहा गया कि तुम बहुत ज्यादा इनवाल्व हो गए हो. आपको सब कुछ देना होता है. न अहंकार और न ओहदे की ऊंच-नीच, आप सभी से इनुपट लेते हैं."
शायद इसीलिए वे खुद को सबके बीच मिसफिट पाते हैं. और इसीलिए उन्होंने उन लोगों से साथ काम करने के बारे में एक कॉमेडी फिल्म बनाई जिन्हें समाज मिसफिट मानता है.
सितारे ज़मीन पर के केंद्र में वे लोग थे जो ऑटिज्म और डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त थे. उनकी जिम्मेदारी कास्टिंग डायरेक्टर टेस जोसफ और अनमोल आहूजा ने संभाली और 2,500 से ज्यादा ऑडिशन लिए. आखिर में 10 को चुनकर उनके साथ वर्कशॉप की गईं.
प्रसन्ना कहते हैं, ''वे ही मेरे स्टार हैं. उनमें जोश है, सकारात्मक जज्बा और अदाकारी का कीड़ा है. आपको बस उन्हें बताना होता है कि कैमरे का सामना कैसे करें और संवाद कैसे बोलें." वे यह भी कहते हैं कि उनकी मौजूदगी ने सेट को खुशियों से भर दिया और पेशेवर जगह बना दिया.
उनकी मदद के लिए शूट के दौरान बच्चों के डॉक्टर मौजूद थे जिन्हें सबको साथ लेकर चलने और दिमागी तौर पर असामान्य काम करने वाले लोगों के साथ काम करने में महारत हासिल है.
खान की बाकी फिल्मों की तरह ही इस फिल्म में भी एक समाजी पैगाम छुपा हुआ है. प्रसन्ना कहते हैं, ''आज हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां किसी से भी राब्ता नहीं रखते —न्यूरोडाइवर्जेंट लोगों को तो छोड़ ही दीजिए." इस फिल्म के जरिए वे चाहते हैं कि लोग अपने अंदर के बच्चे को याद करें. ''आप एक मासूमियत और बिना किसी पूर्वग्रह के पैदा होते हैं. फर्क करना तो हम बाद में सीखते हैं."
सितारे ज़मीन पर ऐसे वक्त आ रही है जब बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी की कसौटी में आमूलचूल बदलाव आया है. जोरदार डोले-शोले वाले हीरो की तमाशाई फिल्मों के बजाए जिंदगी की हल्की-फुल्की झलक दिखाने वाली फिल्मों को ज्यादा पसंद किया जा रहा है.
खान की पिछली फिल्म लाल सिंह चड्ढा, जो हॉलीवुड की हिट फिल्म फॉरेस्ट गम्प की रीमेक थी, बॉक्स ऑफिस पर चारों खाने चित गिरी. सितारे ज़मीन पर को खान के निर्देशन में बनी पहली फिल्म तारे ज़मीन पर का ''आध्यात्मिक सीक्वल" कहा जा रहा है और यह स्पैनिश फिल्म कैंपियोनेस (2018) से प्रेरित है.
प्रसन्ना मौजूदा फलक पर फिल्म के अलग और बेमेल होने को लेकर परेशान नहीं हैं. वे कहते हैं, ''हर कोई जायका बदलना चाहता है. फिल्म तब कामयाब होती है जब दिल बहलाए और लोगों के साथ जोरदार जज्बाती जुड़ाव कायम करे. एक चीज से सारी चीजें बदल जाती हैं. वह आमिर खान हैं जो आम तौर पर नया चलन शुरू करते हैं."