केरल से उठी आवाज फिल्म जगत में यौन उत्पीड़न के बारे में क्या बताती है?

हेमा कमेटी की रिपोर्ट के खुलासे से केरल में मचा भारी बवाल, कई अभिनेत्रियां यौन उत्पीड़न की शिकायतें खुलकर जाहिर करने लगीं

अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा
अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा

पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली केरल सरकार की तरफ से पिछले 19 अगस्त को सार्वजनिक की गई हेमा कमेटी की रिपोर्ट ने तो जैसे भानुमती का पिटारा ही खोल दिया. 31 दिसंबर, 2019 को पेश होने के करीब पांच साल बाद जारी रिपोर्ट सामने आते ही मलयालम फिल्म उद्योग गंभीर संकट में घिर गया.

जस्टिस के. हेमा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति फरवरी 2017 में कोच्चि में एक लोकप्रिय अभिनेत्री का अपहरण करके उसके साथ कार में यौन उत्पीड़न किए जाने के चार माह बाद गठित की गई थी. दो अन्य सदस्य वरिष्ठ अभिनेत्री शारदा और सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी के.बी. वलसलाकुमारी थीं. समिति को यह पता लगाने का जिम्मा सौंपा गया था कि फिल्म उद्योग में काम करने वाली महिलाओं को किन परिस्थितियों से जूझना पड़ता है.

पीड़िता के दोस्तों की तरफ से विमेन इन सिनेमा कलेक्टिव (डब्ल्यूसीसी) का गठन करने और सरकार पर दबाव डालने के बाद गठित समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर बवाल मचना तो जैसे तय था. शायद यही वजह है कि पिनाराई सरकार ने यह कहकर रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया कि इसे सार्वजनिक किया जाना पीड़ितों और दोषियों दोनों की निजता पर हमला होगा. दरअसल, जस्टिस हेमा ने खुद भी सरकार को लिखे पत्र में कहा था कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए क्योंकि इसमें यौन शोषण पर बेहद संवेदनशील जानकारी है.

हालांकि, केरल हाइकोर्ट के आदेश ने आखिरकार सरकार को इसके लिए मजबूर कर दिया और उसने 299 पन्नों की अंतिम रिपोर्ट के 233 पन्नों का संशोधित संस्करण जारी किया. इसके साथ ही मॉलीवुड की एक बेहद घिनौनी तस्वीर उभरकर सामने आई. इसमें बताया गया है कि कैसे ऑडिशन और शूटिंग स्थलों पर कम उम्र के कलाकारों का यौन शोषण किया गया. यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि नाबालिग पर यौन हमले के बारे में जानते हुए भी पुलिस को सूचना न देना एक अपराध है और यह मुख्यमंत्री कार्यालय को सक्रियता न बरतने का दोषी बनाता है.

इस बीच, मॉलीवुड में कथित यौन शोषण की नई कहानियां हर दिन सामने आ रही हैं. 23 अगस्त को बांग्ला अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा ने आरोप लगाया कि प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक और अब सरकार संचालित केरल चलचित्र अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रंजीत ने 2009 में उनके साथ उस समय दुर्व्यवहार किया जब वे उनकी फिल्म पालेरी मणिक्यम: ओरु पतिरकोलापतकथिंते कथा के लिए ऑडिशन देने गई थीं. कोलकाता में रहने वाले मलयालम फिल्म निर्देशक जोशी जोसफ ने भी इसकी पुष्टि की. उनके मुताबिक, श्रीलेखा ने उस रात एकदम सदमे जैसी स्थिति में उनसे संपर्क साधा था.

आरोपी फिल्म निर्देशक रंजीत

जोशी ने आरोप लगाया, "प्रोडक्शन कंपनी ने उन्हें वापसी का किराया भी नहीं दिया." हालांकि, रंजीत ने आरोपों से इनकार किया और बाद में अकादमी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. लेकिन इससे पहले ही संस्कृति मंत्री साजी चेरियन ने यह बयान देकर खुद को मुसीबत में फंसा लिया कि अध्यक्ष को 'केवल आरोपों’ के आधार पर इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है. उन्होंने यहां तक कहा कि सत्तारूढ़ माकपा उनका पूरा समर्थन करती है. उनकी इस टिप्पणी पर आशिक अबू और भद्रन जैसे वामपंथी फिल्म निर्माताओं को तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए कहना पड़ा कि दोषी पाए जाने वालों को दंडित किया जाना चाहिए. माकपा विधायक और वरिष्ठ अभिनेता मुकेश भी अब आरोपियों की सूची में शामिल हैं.

इस सबके बीच, मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (एएमएमए) को सबसे बुरी स्थिति का सामना करना पड़ा. 2017 की घटना के बाद उसकी उदासीनता किसी से छिपी नहीं है. लेकिन इस बार हेमा कमेटी के निष्कर्षों ने भारी उथल-पुथल मचा दी. एएमएमए की पूरी 17 सदस्यीय कार्यकारी समिति ने 27 अगस्त को इस्तीफा दे दिया, जिसमें उसके अध्यक्ष और सुपरस्टार मोहनलाल शामिल हैं.

इसके कम से कम तीन सदस्यों के खिलाफ भी कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं. करीब 500 कलाकार एएमएमए सदस्य हैं और हेमा कमेटी की रिपोर्ट में 10-15 पुरुषों के एक 'ताकतवर गिरोह’ का जिक्र है, जिसका पूरी इंडस्ट्री में सिक्का चलता रहा और उनके मुताबिक काम न करने वाले का बर्बाद होना तय था. जाहिर है, इससे एएमएमए का हिल जाना लाजिमी था.

इन तमाम वजहों से पिनाराई विजयन सरकार पर राजनैतिक दबाव बढ़ रहा है. यहां तक कि वामपंथी सहयोगी भाकपा ने भी कड़े तेवर अपना रखे हैं. एक पार्टी नेता ने इंडिया टुडे से कहा, "सिनेमा के इन खलनायकों के साथ हमारी कोई सहानुभूति नहीं है, भले ही वे कितने ताकतवर क्यों न हों." राज्य में विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने भी हमले तेज कर दिए हैं. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तथा कांग्रेस विधायक वी.डी. सतीशन ने सवाल उठाया, "सरकार आरोपियों को बचा रही है तो फिर मुख्यमंत्री किस मुंह से स्त्रियों के साथ इंसाफ का दावा करते रहे हैं?"

अब 10 सितंबर को हाइकोर्ट में जब मामले की अगली सुनवाई होगी तो वाम मोर्चा सरकार के लिए यह बताना मुश्किल होगा कि आखिर उसने रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की थी.

हर दिन नए-नए आरोप सामने आ रहे हैं लेकिन उम्मीद है कि मौजूदा आक्रोश सड़ांध मारती इंडस्ट्री में कुछ बदलाव लाएगा. जैसा कि अभिनेत्री और डब्ल्यूसीसी की संस्थापक सदस्य पार्वती तिरुवोत कहती हैं, "सभी उद्योग कीड़ों से भरे हैं और हमें इसे खुद ही साफ करना होगा. लेकिन मुझे लगता है कि अब चीजें बदल रही हैं. जब हम अपने लिए बोलते हैं, तो बाकी सबके लिए भी खड़े होते हैं."

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