सिनेमा : रहस्य और रोमांच की नई कहानियों से सराबोर रहने वाला है यह मॉनसून
गर्मियों के सूखे निकले सत्र के बाद आ गई तड़पते दर्शकों को तर करने के लिए नई फिल्मों की पूरी एक ताजा सीरीज

वर्ष 2024 की गर्मियां बॉलीवुड के लिए कुछ ज्यादा ही तपिश भरी साबित हो रही हैं. आधा साल बीत चुका है और टिकट खिड़कियों पर छाया सन्नाटा दूर होने का नाम नहीं ले रहा, जबकि पिछले साल इसने रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन किया था.
तब तीन फिल्मों पठान, गदर-2 और जवान ने राष्ट्रीय स्तर पर 500 करोड़ की कमाई का आंकड़ा पार करके नया बेंचमार्क स्थापित कर दिया था. अप्रैल-मई में तो हिंदी फिल्मों के लिहाज से इतना खराब रहा कि दर्शकों के अभाव ने सिनेमा मालिकों को शो रद्द करने के लिए ही बाध्य कर दिया.
ऐसे में उन्होंने क्रिकेट मैच दिखाना या पुरानी फिल्मों (रॉकस्टार, लक्ष्य, स्वदेस) को फिर रिलीज करना बेहतर समझा. आशीर्वाद थिएटर्स के निदेशक अक्षय राठी कहते हैं, "अभी हिंदी फिल्म उद्योग सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरने की समस्या से नहीं जूझ रहा बल्कि हमने अपने कंटेंट पर भरोसा भी खो दिया है."
वे लोकसभा चुनाव और आईपीएल को भी कमाई घटने का बड़ा कारण मानते हैं. उनके मुताबिक, "बॉक्स ऑफिस सूने रहने की वजह दर्शकों की उदासीनता नहीं, उद्योग की तरफ से पेश किया गया बेहद औसत दर्जे का कंटेंट है. यह ऐसा नहीं है जिसके लिए दर्शक समय और पैसा खर्च कर थिएटर तक आने की जहमत उठाएं."
इस साल अब तक सर्वाधिक कमाई वाली फिल्म फाइटर रही जिसने देश में 200 करोड़ रुपए कमाए. पर करीब 250 करोड़ रुपए के इसके बजट को देखते हुए इस प्रदर्शन को औसत से भी नीचे माना जाएगा. निर्देशक सिद्धार्थ आनंद की देसी सितारों ऋतिक रोशन-दीपिका पादुकोण से सजी इस एरियल एक्शन थ्रिलर से बॉक्स ऑफिस पर धमाल की उम्मीद थी.
इससे ज्यादा कमाई तो उन्होंने की जिनसे ज्यादा उम्मीद नहीं की जा रही थी. काले जादू के इर्द-गिर्द केंद्रित और अजय देवगन और आर. माधवन अभिनीत शैतान इस साल की सरप्राइज हिट बनकर उभरी. इसके अलावा आर्टिकल 370, लापता लेडीज और क्रू जैसी महिला किरदार प्रधान फिल्मों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया. पर छुपा रुस्तम साबित हुई हॉरर कॉमेडी मुंज्या. इसमें कोई स्टार नहीं बल्कि यह सीजीआई निर्मित एक मुख्य किरदार पर केंद्रित है. इसने 85 करोड़ रुपए कमाए हैं.
चूंकि बड़ी फिल्में कुछ खास असर नहीं दिखा पाईं तो राठी जैसे थिएटर संचालक उम्मीद कर रहे हैं कि शायद 'मध्यम श्रेणी की फिल्में' ही बॉक्स ऑफिस की सोई किस्मत जगा दें. वे कहते हैं, "थोड़े समय की बात है, बड़े बजट की एक-दो बड़ी फिल्में हिट होते ही न केवल कंटेंट-निर्माता बिरादरी को गति मिल जाएगी, बल्कि दर्शक भी सिनेमाघरों की तरफ खिंचे चले आएंगे. उन फिल्मों का इंतजार करना भी कम रोमांचक नहीं होता, जो अचानक से आती हैं और रुपहले पर्दे पर छा जाती हैं."
पूरी एक नई दुनिया
वैसे तो गर्मियों में रिलीज होने वाली फिल्में विविधतापूर्ण हैं लेकिन 2024 में कल्कि 2898 एडी (27 जून) से बड़ी कोई फिल्म आने की संभावना कम ही है. यह अमानवीय जीवन जीते समाज पर केंद्रित तीन घंटे का साइंस-फिक्शन ऐक्शन ड्रामा है जिसका अनुमानित बजट 600 करोड़ रुपए है. इसमें अमिताभ बच्चन और कमल हासन जैसे दिग्गजों के साथ लोकप्रिय कलाकार प्रभास और दीपिका पादुकोण भी तेलुगु फिल्म निर्माता नाग आश्विन की रचनात्मक सोच को पर्दे पर साकार करते नजर आएंगे.
मुंबई में हाल ही एक मीडिया आयोजन के मौके पर अश्वत्थामा की भूमिका निभा रहे अमिताभ बच्चन ने एक ऐसे प्रोजेक्ट की परिकल्पना करने के लिए युवा लेखक-निर्देशक की प्रशंसा की, जो "भविष्य में काफी हद तक संभव परिस्थितियों पर केंद्रित है." उन्होंने कहा, "इसका हिस्सा बनना...एक ऐसे सेट-अप में काम करना बड़े सम्मान की बात है, जिसमें उन्होंने हम सबकी सोच और कल्पनाओं से परे जाकर काम किया है."
ड्यून और मैड मैक्स फिल्मों की याद दिलाते दृश्यों के साथ आश्विन ने अपनी फिल्म में ऐसे देशकाल की कल्पना की है जब काशी यानी वाराणसी दुनिया का आखिरी जीवंत शहर है और गंगा नदी सूख चुकी है. अपनी व्यापक सोच का परिचय देते हुए आश्विन ने कल्कि 2898 एडी के लिए तीन एकदम अलग रंग-ढंग वाली दुनिया रची हैं. इसमें एक 'कॉम्प्लेक्स' है, जो 'उल्टा पिरामिड की तरह है और आसमान में घूमती रहती है.
इस दुनिया के लोग खुद को खास मानते हैं क्योंकि यहां तमाम तरह के संसाधन उपलब्ध हैं; दूसरी दुनिया है काशी, जहां रहने वाले कॉम्प्लेक्स का हिस्सा बनने का ख्वाब देखते हैं. वहीं, शंबाला एक रहस्यमय भूमि और एक 'विशाल शरणार्थी शिविर' है, जिसमें कॉम्प्लेक्स के अत्याचार के खिलाफ खड़े होने वाले बसे हैं.
फिल्म में दीपिका पादुकोण सुमति नामक गर्भवती महिला की भूमिका निभा रही हैं, जो अवतार माने जाने वाले बच्चे को जन्म देने वाली है. इसी पर केंद्रित होने के कारण कल्कि 2898 एडी खासी उत्सुकता भी जगाती है. कल्कि में हमें वो सब नजर आने वाला है जिसे न हमने कभी देखा, न अनुभव किया. ऐसा दावा है.
आखिरी ऐक्शन हीरो
दिलचस्प है कि किल के निर्माता भी दावा कर रहे हैं कि वे अपनी महज 100 मिनट की फिल्म में ऐसे खूनखराबे और बर्बरता से रू-ब-रू कराएंगे कि दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे. करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस और गुनीत मोंगा के सिख्या एंटरटेनमेंट की प्रस्तुति किल (5 जुलाई) एक ट्रेन के खूनी सफर पर केंद्रित हैं, जिसमें कम से कम 40 लोग मारे जाते हैं. फिल्म का शीर्षक छोटा पर प्रभावी है.
मुंबई में फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर करण ने बताया कि यह ऐक्शन फिल्म 'मारधाड़ से भरपूर' है और उन्होंने इससे काफी उम्मीदें लगा रखी हैं क्योंकि यह पूरी तरह एक नए कलाकार लक्ष्य के कंधों पर टिकी है. लॉन्च के मौके पर उन्होंने कहा, "मैंने (भाई-भतीजावाद पर) बहुत कुछ देखा-सुना है और इतने वर्षों तक सहा भी है. मुझे लगा कि हमें यह कदम उठाना चाहिए क्योंकि अगर इंडस्ट्री को एक संभावित फिल्म स्टार मिल जाए तो हमें बहुत अच्छा लगेगा."
किल के जरिए जौहर और मोंगा दर्शकों को यही बताना चाहते हैं कि तबाही को भी कितने कलात्मक तरीके से दर्शा सकते हैं. ऐक्शन को एक विधा के तौर पर स्थापित करने वाली ट्रेन टू बुसान और जॉन विक सीरीज आदि का हवाला देते हुए करण ने कहा कि यह हिंसा के समर्थन का प्रयास नहीं बल्कि "भारत को अच्छी तरह कोरियोग्राफ कलात्मक ऐक्शन फिल्म दिखाने की कोशिश है, ताकि लोग जानें कि ऐक्शन कला के किसी अन्य रूप से कम नहीं."
लेखक-निर्देशक निखिल नागेश भट ने अपनी स्क्रिप्ट को जोरदार बनाने के लिए बेहतरीन स्टंट निर्देशक सीयंग ओह (स्नोपियर्सर, वॉर) की काबिलियत का सहारा लिया जो ऐक्शन पर बहुत बारीकी से काम करते हैं. भट ने मोंगा से कहा था कि, "वे एक भावनात्मक ऐक्शन फिल्म बनाना चाहते हैं." कल्कि 2898 में विजुअल इफेक्ट की भरमार है वहीं किल में हिंसक दृश्यों को असल-सा दर्शाने के लिए 150 लीटर नकली खून का इस्तेमाल किया गया है.
अपने दम पर उड़ान
किल एक युवा अभिनेता के कंधों पर टिकी है तो सरफिरा (12 जुलाई) में इंडस्ट्री के शानदार अभिनेताओं में से एक अक्षय कुमार ने अभिनेता सूर्या वाली भूमिका निभाई है. सूर्या ने मूलत: तमिल में बनी सोराराई पोटरू में निभाई भूमिका के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था. तमाम मुश्किलों से जूझने के बावजूद सस्ती विमान सेवा एयर डेक्कन की शुरुआत करने वाले कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ के जीवन पर आधारित फिल्म सरफिरा का निर्देशन सुधा कोंगरा ने किया है. मूल तमिल संस्करण का निर्देशन भी कोंगरा ने किया था.
कोंगरा कहती हैं, "ओटीटी प्लेटफॉर्म की बदौलत सोराराई पोटरू बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंची लेकिन मैं हमेशा इसे बड़े पर्दे पर देखना चाहती थी और इसे हिंदी में बनाना एक बड़ा मौका था." बहरहाल, मूल फिल्म से तुलना होना स्वाभाविक है, जिसने पांच राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे. कोंगरा ने इंडिया टुडे से कहा, "मुझे उम्मीद है कि सरफिरा युवाओं के लिए प्रेरणादायक साबित होगी."
सरफिरा में भौगोलिक पृष्ठभूमि भी तमिलनाडु से बदलकर महाराष्ट्र कर दी गई है. कोंगरा कहती हैं, "मेरा मानना है कि अलग-अलग टैलेंट और विविध सांस्कृतिक परिवेश के सम्मिलित होने से दोनों ही फिल्मों में कुछ न कुछ अनूठा नजर आएगा. हमने रीमेक में उद्यमशीलता की यात्रा और स्वप्नदृष्टा की भावना पर विशेष ध्यान दिया है."
अब देखना होगा कि क्या सरफिरा वह फिल्म बन पाती है जो फिल्में पिटने की वजह से इस साल काफी उतार-चढ़ाव देखने वाले अक्षय कुमार की किस्मत बदल पाती है! हालांकि, कोंगरा की नजरों में इस प्रेरक व्यक्तित्व को निभाने के लिए उसने बेहतर कोई और नहीं हो सकता था. वे कहती हैं, "एक अलग भावनात्मक संवेदनशीलता, एक अलग व्यक्तित्व के साथ उन्होंने इसे एक मुकाम पर पहुंचाया है."
दमदार वापसी
वैसे अक्षय कुमार की सरफिरा को बॉक्स ऑफिस पर कमल हासन अभिनीत हिंदुस्तानी: जीरो टॉलरेंस (12 जुलाई) से टकराना होगा, जो 28 वर्ष बाद स्वतंत्रता सेनानी से सतर्कता सेनानी बने सेनापति (हासन) की वापसी है. शंकर निर्देशित इस सीक्वल में दिग्गज अभिनेता सोशल मीडिया के इस युग में अपने बगावती तेवरों के साथ एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ते नजर आएंगे. पिछले कुछ सालों से राजनीति में सक्रिय हासन ने मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि भ्रष्ट राजनेताओं के खिलाफ लड़ाई का सबसे कारगर हथियार मतदान है.
उनके शब्दों में, "इस तरह की हमारी फिल्में तो बस याद दिलाती हैं कि हम कितने भ्रष्ट हो चुके हैं. सब कुछ सामूहिक विवेक से ही बदलेगा." फिल्म में अपने क्रांतिकारी किरदार को साकार करने के लिए हासन को तीन-चार घंटे कुर्सी पर बैठकर मेकअप कराना पड़ता था. इसमें उन्होंने अपनी उम्र को मात दे दी है. पहली बार इस दिग्गज अभिनेता के साथ काम कर रहे सिद्धार्थ कहते हैं, "उन्हें ऐसे लोग कतई बर्दाश्त नहीं होते जो अपनी कला को गंभीरता से नहीं लेते."
शंकर को 2.0 (2018) का विचार आने से पहले 1996 में आई पहली फिल्म लगातार उनके दिमाग में घूमती रहती थी. वे कहते हैं, "यह तय करने में काफी समय लगा कि क्या नहीं करना है." मूल फिल्म एक राज्य के इर्द-गिर्द केंद्रित थी लेकिन सीक्वल में उस घटना के साथ इसका दायरा काफी व्यापक हो गया है.
यही कारण है कि शंकर ने फिल्म को दो हिस्सों में पिरोया है. कोविड-19 महामारी से पहले ही फिल्म का निर्माण शुरू हो चुका था लेकिन सेट पर कुछ हादसों की वजह से लंबे वक्त के बाद फिल्म आखिरकार सिनेमाघरों में पहुंच रही और इसके साथ ही उम्मीद की जा रही है कि यह देशभर में धमाका कर देगी.
पिटारे में और भी बहुत कुछ
वैसे 2024 में बॉलीवुड के पिटारे में और भी बहुत कुछ है. इनसे बहुत ज्यादा उम्मीदें भले ही न की जा रही हों लेकिन पता नहीं दर्शक किस पर मेहरबान होकर चौंका दें. मध्यम बजट की फिल्मों में शुमार हैं—बैड न्यूज (19 जुलाई), जो विक्की कौशल, एमी विर्क और तृप्ति डिमरी अभिनीत एक कॉमेडी फिल्म है; उलझ (2 अगस्त), इस नाम के स्पाई ड्रामा में जान्हवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं.
विक्रांत मैसी की साबरमती रिपोर्ट (2 अगस्त) भी लाइन में है जो कश्मीर फाइल्स और केरल स्टोरी की तरह विवादास्पद राजनीतिक ड्रामा साबित हो सकती है. इस गर्मी 2018 में सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन करने वाली हॉरर कॉमेडी स्त्री का दूसरा भाग भी आने वाला है. यह तो तय माना जा सकता है कि बॉलीवुड के लिए यह एक सुरक्षित दांव साबित होगी. स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज होने वाली वेदा (जॉन अब्राहम) और खेल खेल में (अक्षय कुमार) से भी उम्मीद है कि दर्शकों को बोरियत से बाहर निकालेंगी.
किल 5 जुलाई
निर्देशक: करण जौहर, गुनीत मोंगा
कलाकार: लक्ष्य, राघव जुयाल
ऐक्शन का धमाल. द ट्रेन टु बुसान की तरह इसमें सारा ड्रामा ट्रेन पर घटता है. 40 लाशों और 150 लीटर नकली खून वाली यह फिल्म कमजोर दिल वालों के लिए तो कतई नहीं है.
कल्कि 2898 एडी 27 जून
डायरेक्टर: नाग आश्विन
कलाकार: अमिताभ बच्चन, कमल हासन, प्रभाष, दीपिका पादुकोण
हॉलीवुड की ड्यून और मैड मैक्स जैसी त्रासदी की कहानी कहने वाली इस फिल्म में आश्विन ने भविष्योन्मुखी और पौराणिक दुनिया रची है. गंगा के सूख जाने पर इसमें पानी वालों और वंचितों में युद्ध होता है.
सरफिरा 12 जुलाई
निर्देशक: सुधा कोंगारा
कलाकार: अक्षय कुमार, परेश रावल
पांच नेशनल अवार्ड जीतने वाली तमिल फिल्म सूराराई पोत्तरू की यह हिंदी रीमेक कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ की जिंदगी से प्रेरित है. उन्होंने तमाम चुनौतियों के बीच सस्ती एअरलाइन डेक्कन एअर शुरू की थी.
बरसात में आ रही फिल्मों में तो वैसे विविधता है लेकिन 2024 में कल्कि 2898 एडी जैसी दूसरी और कोई फिल्म नहीं आने वाली. मानव त्रासदी को दिखाने वाली इस साइंस-फिक्शन ऐक्शन ड्रामा की अनुमानित लागत 600 करोड़ रु. है.
...और इधर ओटीटी पर क्या आ रहा नया?
मिर्जापुर सीजन 3, (अमेजन प्राइम) 5 जुलाई
भले मुन्ना (दिव्येंदु) न हों अब लेकिन कालीन भैया (पंकज त्रिपाठी) और गुड्डू (अली फजल) के बीच अभी भी ठांय-ठांय और वनलाइनर जुमलों वाली जंग जारी रहने वाली है. इसमें दो राय नहीं कि यह देश की सबसे पॉपुलर वेब सीरीज में से एक है. रसिका दुग्गल, विजय वर्मा, श्वेता त्रिपाठी ईशा तलवार सरीखे प्रतिभाशाली कलाकारों की जमात इस क्राइम ड्रामा के जादू में और जान डालने वाली है.
वाइल्ड वाइल्ड पंजाब, (नेटफ्लिक्स) 10 जुलाई
प्यार का पंचनामा और सोनू के टीटू की स्वीटी जैसी अनूठे रोमांस वाली हिट फिल्में बनाने वालों का उपक्रम है यह. इसमें चार दोस्त (वरुण शर्मा, मनजोत सिंह, सन्नी सिंह, जस्सी गिल) "ब्रेक-अपरोड ट्रिप" पर निकलने वाले हैं. और उनका ठिकाना? एक तो अपनी एक्स गर्लफ्रेंड की शादी में उसके सामने खड़ा होने जा रहा है. वह सीधे यही कहने वाला है कि "मैं अब तेरे हवाले." इस रास्ते में बहुत-से स्पीडब्रेकर आने वाले हैं.
काकूदा, (जी 5) 12 जुलाई
ताजा ब्लॉकबस्टर मुंज्या जैसी फिल्म देने वाले आदित्य सरपोतदार ने साबित कर दिया है कि वे खौफ पैदा कर पाने में सक्षम हैं. अब फिर वे एक हॉरर कॉमेडी के साथ हाजिर हो रहे हैं, सीधे ओटीटी पर. इसमें रितेश देशमुख, सोनाक्षी सिन्हा और साकिब सलीम लीड रोल्ड में हैं.
लाइफ हिल गई, (डिज्नी+हॉटस्टार)
उत्तराखंड की पृष्ठभूमि पर बनी वेब सीरीज रोज-रोज देखने को नहीं मिलतीं. इस सीरीज में इसी राज्य की एक कहानी है. असल जिंदगी पर आधारित इस प्रस्तुति में दिव्येंदु, विनय पाठक, कुशा कपिला और मुक्ति मोहन प्रमुख भूमिकाओं में हैं.