असम से उठती एक उम्मीद
असमिया फिल्मकार रीमा दास से उनकी नई फिल्म टोराज़ हस्बैंड और अब तक के संघर्ष के बारे में बातचीत का एक अंश

अगर डायरेक्टर रीमा दास की टोराज़ हस्बैंड अगले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में जीत जाए तो जरा भी हैरानी की बात नहीं. सितंबर, 2022 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट (टिफ ) में इसका वर्ल्ड प्रीमियर हुआ तो दर्शक खड़े हो तालियां बजाते रह गए. अब 29 सितंबर को यह फिल्म कुछ बड़े शहरों में रिलीज हो गई है. रीमा की पिछली फिल्मों की तरह यह भी सोयगांव, असम के उनके गांव कोलरदिया में स्थित है.
आत्मकथात्मक भी है. कोविड के समय में आसपास क्या घट रहा था, परिवारों में क्या जटिलताएं थीं, मौतें हो रही थीं, आय के संकट थे, लेकिन जीवन का चलना जारी था. यह सब इस फिल्म में उन्होंने पिरोया. शूट शुरू होने के एक महीने बाद पिता भरत चंद्र दास नहीं रहे. इतनी निराश हुईं कि फिल्म को पूरी तरह से बंद करने का मन बना लिया. लेकिन फिर हिम्मत करके जारी रखा.
विश्व सिनेमा के नक्शे पर तीन फिल्मों से ही अपनी खास जगह बना चुकीं रीमा की कहानी कमाल है. उन्हें ऐक्टर बनना था. बताती हैं कि 2004 के आसपास का समय रहा होगा जब मुंबई गई थीं. कद छोटा था तो हर समय हील पहने रहतीं. पूरे दिन लिपस्टिक और मेकअप लगाए ऑडिशन के लिए जातीं. लेकिन छोटे रोल ही मिलते. उन्हीं के शब्दों में, "सीआईडी जैसे सीरियलों में छुटकर काम मिलता था. रोल छोटे होते थे तो दो-तीन एपिसोड के बाद मेरा पात्र मर जाता था. यह देखकर मम्मी फोन पर बोलती थी कि तू दो-तीन दिन में ही मर क्यों जाती है? तेरे रिश्तेदार यहां सवाल पूछते हैं."
इस बीच 2009 में उन्होंने वर्ल्ड सिनेमा देखना शुरू किया और उनका जीवन बदल गया. उन्होंने फिल्ममेकर बनने की ठान ली. एडिटिंग, सिनेमैटोग्राफी, डायरेक्शन, राइटिंग सीखने लगीं. 2017 में उनकी दूसरी फीचर विलेज रॉकस्टार्स आई जो चार नेशनल अवॉर्ड जीती. भारत ने ऑस्कर में उसे अपनी ऑफिशियल एंट्री बनाकर भेजा. रीमा बताती हैं कि चार साल लगाकर उन्होंने यह फिल्म बनाई. गांव के लोग उन्हें पागल कहने लगे थे.
अगली फिल्म बुलबुल कैन सिंग को भी बेस्ट असमी फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला, जिसकी जानकारी खुद शाहरुख खान ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न फिल्म फेस्ट के मंच पर दी. टोराज़ हस्बैंड से पहले आई इन दो फिल्मों को दुनिया के 120 से ज्यादा फिल्म फेस्ट में दिखाया गया और 70 से ऊपर अवॉर्ड मिले. रीमा कहती हैं, "यह आसान न था. शुरू में तो मैं इतनी डिप्रेस्ड थी कि घर के पीछे नदी किनारे जाकर रोती थी. टूट चुकी थी मैं. फिर खुद को मोटिवेट करना शुरू किया."
अब वे विलेज रॉकस्टार्स-2 पर काम कर रही हैं. तिलोत्तमा शोम (मॉनसून वेडिंग, सर, किस्सा) के साथ भी एक प्रोजेक्ट के चर्चे हैं. उनकी फिल्म मालती माई लव-2023 के एशियन प्रोजेक्ट मार्केट में चुनी गई 30 फिल्मों में से है, जो कि एशिया का सबसे बड़ा को-प्रोडक्शन मार्केट है.
पर क्या हम कभी उन्हें अपने समाज-प्रकृति वाले मिजाज के जॉनर से बाहर फिल्में बनाते भी देखेंगे? इस पर चटख हंसी के साथ रीमा का जवाब उनके प्रशंसकों को जरूर खुश कर जाएगा. "मुझे लोककथा आधारित हॉरर बनाने का मन है. पीरियड ड्रामा और म्यूजिकल में भी रुचि है. जब भी (अकीरा) कुरोसावा को देखती हूं, जिन्होंने अनेक तरह की फिल्में ट्राई की, तो मौका मिलने पर मैं भी करना चाहूंगी."
- गजेंद्र सिंह भाटी