‘अंग्रेजी से दिक्कत नहीं पर हिंदी को चुना’
अभिनेता जीशान अय्यूब अपनी हालिया रिलीज वेब सीरीज स्कूप में ऐक्टिंग, डायरेक्शन और भाषा पर.

● स्कूप में इमरान सिद्दीकी जैसा किरदार निभाने के लिए कोई खास तैयारी करनी पड़ी?
मेरे कैरेक्टर में फिक्शन का बहुत स्कोप था. और हंसल मेहता का तरीका यह रहता है कि स्क्रिप्ट से ही आपको किरदार उठाना होता है. जिस शख्स पर वह किरदार हो उसकी स्टडी तो नहीं ही करनी होती है क्योंकि उसमें कई बार मिमिक्री होने का खतरा रहता है. किरदार को नई नजर से देखना बहुत जरूरी होता है. तो स्क्रिप्ट जितनी बेहतर होती है, तैयारी उतनी आसान हो जाती है.
● इस सीरीज में इमरान के डायलॉग बहुत ताकतवर हैं और उसी तरह उनकी अदायगी भी हुई है. क्या सेट पर भी आपने अपने डायलॉग्स में कुछ जोड़ा-घटाया था?
कुछ डायलॉग जो वायरल हुए उनमें थोड़ा इंप्रोवाइजेशन किया था, इसके अलावा न के बराबर. सब कुछ पहले से लिखा हुआ था. जहां पर इंप्रोवाइज किया वहां पहले से हंसल सर से डिस्कस करने के बाद किया कि यहां यह बोलकर देखें क्या? लेकिन 99 फीसद जो है वह स्क्रिप्टिंग है.
● इमरान का किरदार एडिटर-इन-चीफ है एक अंग्रेजी अखबार का, इसे करने में कोई चैलेंज आया?
लोग कह रहे थे कि जीशान कैसे करेगा यह अर्बन कैरेक्टर? अंग्रेजी तो आती नहीं उसको. लेकिन मैं बस सोचता हिंदी में हूं. इंटरनेशनल क्रिटिसिज्म हो या कॉन्टेंट, वह अंग्रेजी में ही पढ़ता-देखता हूं. मैंने इंटरव्यूज या प्रमोशन में हिंदी बोलना चुना है. पर अंग्रेजी बोलने में कहीं कोई दिक्कत नहीं मुझे.
● एक समय था जब आप ट्विटर पर बहुत एक्टिव थे. अब सोशल मीडिया से दूरी की वजह?
एक तरह का डिजिटल डीटॉक्स समझ लीजिए. इंसान वहां दो चार लाइनों और मिनट दो मिनट के वीडियो में खर्च हो जाता है. मुझे पढ़ने और अच्छा देखने की आदत है. ये बहुत कम हो पा रहा था. इसीलिए ब्रेक लिया है सोशल मीडिया से. अपने भीतर झांककर कुछ नया गढ़ने के लिए समय तो चाहिए ही होता है.