बनाकर हम भी देखेंगे
हिंदी फिल्मों की कई अभिनेत्रियां प्रोड्यूसर बनकर महिलाओं के मजबूत किरदारों वाली कहानियां सामने लाने में बड़ी भूमिका निभा रहीं

अपनी 9 बरस की जिंदगी में आलिया भट्ट ने अपने डैडी महेश भट्ट से ज्ञान की कई बातें सुनीं, पर उनमें से एक उन्हें याद रही. निर्माता-निर्देशक पिता ने एक बार उनसे कहा था, ''तुम कब तक अपनी ही गाड़ी में पेट्रोल भरवाती रहोगी? तुम्हें दूसरों की गाड़ियों में भी पेट्रोल भरवाना शुरू करना चाहिए.’’
इसलिए जब स्क्रीनराइटर जसमीत के. रीन ने उन्हें घरेलू हिंसा के इर्द-गिर्द घूमती डार्क कॉमेडी सुनाई तो आलिया को डैडी की सलाह ध्यान में आई. उन्होंने बड़ी बहन शाहीन के साथ मिलकर प्रोडक्शन कंपनी बनाई और उसका नाम चार्ली कॉफमैन की लिखी और मिशेल गोंडरी निर्देशित अपनी पसंदीदा फिल्म इटरनल सनशाइन ऑफ द स्पॉटलेस माइंड (2004) के नाम पर इटरनल सनशाइन रखा.
उनकी पहली फिल्म रीन की डार्लिग्स इसी 5 अगस्त को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है. भट्ट कहती हैं, ''मुझे लगा कि शुरू करने का यह अच्छा तरीका है. यह उस तरह की कहानी है जिसे हम उठाना चाहते हैं. हम नए लेखकों और निर्देशकों को मौका देना चाहते हैं.’’
डार्लिग्स के साथ भट्ट उन अदाकाराओं की बढ़ती फेहरिस्त में आ रही हैं जिन्होंने निर्माता का चोला धारण किया है. अनुष्का शर्मा ने अपने भाई कर्णेश के साथ मिलकर क्लीन स्लेट की शुरुआत की. अभी तक वे चार फीचर फिल्म और दो वेब सीरीज बना चुकी हैं. दीपिका पादुकोण के बैनर का प्रोडक्शंस की पहली फिल्म छपाक (2020) थी, जबकि प्रियंका चोपड़ा अपनी प्रोडक्शन कंपनी पर्पल पेबल पिक्चर्स के साथ 2015 से ही इस खेल में हैं.
चोपड़ा की मराठी भाषा में बनी ड्रामा-कॉमेडी फिल्म वेंटिलेटर (2016) सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है. हाल में तापसी पन्नू ने आउटसाइडर फिल्म्स का निर्माण किया और पहले प्रोजेक्ट में नमूदार हुईं, जबकि कंगना रणौत ने प्रोड्यूसर के रूप में अपने दूसरे प्रोजेक्ट इमरजेंसी का ऐलान किया है, जिसमें वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभा रही हैं.
लगता है कि ये सारी फिल्में महिला केंद्रित कहानियों को गले लगाना चाहती हैं. चाहे वह मनमोहक किरदारों का चित्रण हो—क्लीन स्लेट की परी (2018) और बुलबुल (2020)—या असल जिंदगी की कहानियां—छपाक तेजाब के हमले की शिकार साहसी लक्ष्मी की जिंदगी को परदे पर उकेरती है—ये शीर्ष अभिनेत्रियां महिलाओं के उन पहलुओं को सामने लाने वाली कहानियों में पैसा लगा रही हैं जिन्हें अभी तक व्यावसायिक फिल्मों में विरले ही देखा गया है.
डार्लिग्स की डायरेक्टर और को-राइटर रीन को लगता है कि इस कदम की बहुत जरूरत थी. उन्हें उम्मीद नहीं थी कि आलिया उनकी पटकथा में पैसा लगाएंगी. रीन कहती हैं, ''बेहतरीन प्रोड्यूसर वे हैं जो डायरेक्टर को अपनी इच्छा के मुताबिक कुछ भी करने की ताकत और आजादी देते हैं. प्रोड्यूसर में जोखिम लेने की क्षमता होनी चाहिए. उन्हें किसी के विजन पर भरोसा करना, साथ मिलकर काम करना और इनपुट देना होता है. आलिया हमेशा मेरा सहारा रहीं.’’
डार्लिग्ज की अद्भुत परिकल्पना ने आलिया को छलांग लगाने को प्रेरित किया, तो पन्नू खासकर ''मार्केटिंग और उसका ताना-बाना बुनने’’ के लिहाज से कुछ निश्चित फिल्मों पर ज्यादा ''नियंत्रण’’ हासिल करने के लिए प्रोड्यूसर बनना चाहती थीं. पिछले साल इंडिया टुडे के साथ एक बातचीत में पन्नू ने कहा, ''मैं दखलअंदाजी करने वाली अभिनेत्री कहलाना नहीं चाहती, पर बिल्कुल निचली कड़ी से शामिल होना चाहती थी.’’ उन्होंने प्रोड्यूसर प्रांजल खंढडिया से हाथ मिलाया.
पन्नू अपने नए काम की बारीकियां अभी सीख रही हैं. उनकी दूसरी फिल्म में रत्ना पाठक शाह, दिया मिर्जा, फातिमा सना शेख और संजना सांघी हैं. फिल्म इन चारों महिलाओं की ''सड़क से जाने लायक दुनिया के सबसे ऊंचे दर्रे’’ की जिंदगी बदल देने वाली यात्रा पर आधारित है, जिसमें उन्हें पता चलता है कि ''आजादी हासिल करनी होती है, दी नहीं जाती.’’
नाम शबाना (2017), सांड की आंख (2019), थप्पड़ (2020) और शाबाश मिठू (2022) सरीखी महिला केंद्रित फिल्मों का चेहरा रहीं पन्नू कहती हैं, उन्हें लगा कि वे बाकियों को वही मौके दे सकती हैं जिनके लिए वे खुद तरसती थीं. ''मुझे कांप्लीमेंट मिलते थे कि ये फिल्में और भूमिकाएं करने में कितनी हिम्मत दिखाई. मगर जब मैंने उन्हें प्रोड्यूसर के तौर पर खटखटाना शुरू किया तो देखकर अवाक् रह गई. लोग कुछ भी ऐसा स्वीकारने में हिचकते हैं जिसमें जोखिम हो.’’’ अलबत्ता पन्नू और भट्ट सरीखी अदाकाराएं इससे डिगने वाली नहीं हैं.
ये फिल्में दरअसल स्त्रियों के उन पहलुओं को सामने लाती हैं जो कमर्शियल किस्म की शुद्ध मनोरंजन वाली फिल्मों में उभरकर नहीं आ पाते
जिन्होंने बनाकर देख लिया...
हॉलीवुड की वे अभिनेत्रियां जिन्होंने प्रोड्यूसर बनने का जोखिम उठाया
जेसिका चैस्टेन
उनकी प्रोडक्शन कंपनी फ्रेकल फिल्म्स के अहम पदों पर महिलाएं हैं. इसने अवा (2020), द आईज ऑफ टैमी फाए (2021) और द 355 (2022) जैसी फिल्में बनाई हैं. ऑस्कर विजेता चैस्टेन ने एक बार कहा था, ''मैं जैसी महिलाओं को जानती हूं उस तरह के किरदार देखना चाहती हूं—होशियार, दबंग और थोड़ा भावुक.’’
रीस विदरस्पून
इसी साल मार्च में फोर्ब्स मैगजीन ने उन्हें दुनिया की सर्वाधिक पैसे वाली अभिनेत्री बताया था. पर वे चुकाने में भी यकीन करती हैं. 2014 में शुरू उनके प्रोडक्शन हाउस हैलो सनशाइन ने गॉन गर्ल (2014) जैसी फिल्में और बिग लिट्ल लाइज (2019) सरीखे स्त्री-केंद्रित शो बनाए हैं.
चार्ली थेरॉन
थेरॉन की प्रोडक्शन कंपनी डेनवर ऐंड डेलाइला प्रोडक्शंस का नाम बताते हैं, उनके कुत्तों के नाम पर रखा गया है. उन्होंने एटॉमिक ब्लॉन्ड (2017) और टुली (2018) सरीखी फिल्में प्रोड्यूस की हैं, जिनमें उन्होंने खुद अभिनय किया है लेकिन उन्होंने गर्लबॉस (2017) जैसी सीरीज भी बनाई जिसमें अभिनय नहीं किया है.