कोविड 19ः थकाने पर उतारू कोविड

थकान कोविड का सामान्य लक्षण है लेकिन ओमिक्रॉन आने के बाद हल्के मामलों में भी थकान के वाकए बढ़े हैं

रोज निगरानी दिल्ली के एक कोविड अस्पताल में मरीज की पड़ताल करती एक स्वास्थ्यकर्मी
रोज निगरानी दिल्ली के एक कोविड अस्पताल में मरीज की पड़ताल करती एक स्वास्थ्यकर्मी

सोनाली आचार्जी

वर्ष 2022 की शुरुआत पुणे की 34 वर्षीया नताशा शर्मा के लिए इतनी मुश्किल तरीके से हुई कि वे कल्पना भी नहीं कर सकती थीं. जनवरी के पहले हफ्ते में चार बरस के जुड़वां बच्चों की मां नताशा की कोविड जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई. उन्हें ओमिक्रॉन निकला. दो दिन से उन्हें लगातार तेज बुखार और गले में तकलीफ थी. डॉक्टर की सलाह से उन्होंने पैरासीटामोल और मल्टीविटामिन लिए. तीसरे दिन बुखार चला गया और गले में भी आराम आने लगा. मगर अगले 10 दिन उन्हें कमजोरी, पैर की मांसपेशियों में दर्द और थकान महसूस होती रही. नींद नहीं आती सो अलग. डॉक्टर ने पाया कि उन्हें मायल्जिक एनसिफैलोमाइलाइटिस है. यह शरीर की बहुत-सी प्रणालियों में होने वाला जटिल विकार है, जिसे क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम (सीएफएस) भी कहते हैं.

रोज सुबह दौड़ने और योग करने वाली नताशा याद करती हैं, ''मुझे लगता कि मानो उंगलियों में कोई ताकत ही नहीं है. कुछ दिन तो अपने को जगाना और बिस्तर से उठना भी दुश्वार होता था. कमजोरी की वजह से बच्चों, घर, यहां तक कि अपनी भी देखभाल करना मुश्किल हो गया.'' नताशा बताती हैं कि कोविड के लक्षण खत्म होने के करीब दो हक्रते बाद वे आखिरकार हांफे बगैर सीढ़ी चढ़ने में कामयाब हो पाईं.

पस्त कर दे रहा वायरस

थकान वैसे तो महामारी की शुरुआत से ही कोविड का सामान्य लक्षण है, पर ओमिक्रॉन के आने के बाद हल्के मामलों में भी सीएफएस की घटनाएं बढ़ी हैं. जेडओए सिंपटम ट्रैकिंग स्टडी से पता चला कि 3 और 10 दिसंबर के बीच नाक बहना, सिरदर्द, थकान, छींक और गले में तकलीफ ओमिक्रॉन के सबसे सामान्य लक्षण थे. इसी तरह अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (सीडीसी) थकान को नए वैरिएंट के चार सबसे सामान्य लक्षणों में से एक बताती है.

दक्षिण अफ्रीका की शुरुआती रिपोर्ट भी यही कहती हैं कि ओमिक्रॉन के कई हल्के मामलों में दूसरे लक्षण खत्म होने के बाद भी तीव्र थकान बनी रही. मुंबई के फोर्टिस हीरानंदानी अस्पताल के क्रिटिकल केयर के डायरेक्टर डॉ. चंद्रशेखर टी. कहते हैं, ''कोविड के कई बदलने और नहीं बदलने वाले लक्षण हैं और शुरुआत से ही व्यक्ति के लक्षण ठीक-ठीक तय कर पाना मुश्किल है. ज्यादातर तो अलग-अलग लोगों को कोविड-19 बीमारी की तीव्रता अलग-अलग होती है. हम देख रहे हैं कि तीव्रता जितनी भी हो, कुछ मरीज ठीक होने के बाद कमजोरी की शिकायत कर रहे हैं.''

कोविड के बाद सीएफएस होना हालांकि हैरानी की बात नहीं, क्योंकि वायरल संक्रमण से कोशिकाओं की रक्षा करने में शरीर अच्छी-खासी ऊर्जा और संसाधन खर्च कर देता है. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी थकान मलेरिया, टायफॉइड, डेंगू और इंफ्लुएंजा सहित कई बीमारियों से उबरने की अवधि के दौरान आम बात है. कमजोरी का स्तर इस पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को बीमारी कितनी तीव्र थी. जिन्हें वेंटिलेटर और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ी हो, उन्हें सीएफएस अक्सर इतना तीव्र होता है कि महीनों बिस्तर पर पड़े रहना पड़ता है. नई दिल्ली में साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विवेक नांगिया कहते हैं, ''शरीर को ठीक होने में वक्त लगता है. बीमारी के लक्षण खत्म होने के बाद शुरुआती दिनों में कमजोरी के कुछ लक्षण रहेंगे.''

कमजोरी कितने वक्त रहेगी, यह इस पर निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति को बीमारी कितनी तीव्र थी. जनवरी 2022 में नॉर्वे में 66 ओमिक्रॉन-पॉजिटिव मरीजों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि कोविड के लक्षणों की शुरुआत से सात से 14 दिनों तक थकान बनी रही. चरम मामलों में थकान कुछ हफ्तों से ज्यादा रह सकती है, लेकिन ज्यादातर हल्के रूप से बीमार मरीजों में यह ठीक होने के बाद बस कुछ दिन रहेगी.

पोषक आहार है कुंजी

डॉ. चंद्रशेखर कहते हैं, ''मरीज कितनी जल्दी उबरता है, यह इस पर भी निर्भर है कि बीमारी के दौरान और ठीक होने के बाद मरीज ने कितना पोषक आहार लिया.'' दिल्ली के मणिपाल अस्पताल की न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. वैशाली वर्मा कहती हैं, ''मिनरल और विटामिन से भरपूर आहार लेना और उसके साथ पर्याप्त आराम शरीर के उबरने और बीमारी से ठीक होने के लिए बेहद जरूरी है.''

पबमेड के 2021 के एक अध्ययन से पता चला कि कुछ निश्चित चीजें—अंडे, मछली व सीफूड, फल, मांस, दूध, स्टार्चयुक्त कंद, शक्तिवर्धक चीजें, वानस्पतिक चीजें, अखरोट-बादाम, वनस्पति तेल और सब्जियां—खाने का कोविड से उबरने पर अच्छा असर होता है. आम तौर पर प्रोटीन और वसा की ज्यादा मात्रा वाली चीजें खाने का वायरस से उबरने पर अच्छा असर होता देखा गया है, जबकि अल्कोहल वाले पेय लेने का विपरीत असर पड़ता है. 

ओमिक्रॉन का संक्रमण झेल चुके दिल्ली के 39 वर्षीय कुलदीप सिंह कहते हैं, ''ठीक होने के दौरान मैंने खूब सारी प्रो और प्रीबायोटिक चीजें खाईं. इससे मेरी ऊर्जा वापस आने और पाचन तंत्र पर वायरस का असर कम करने में मदद मिली. दही, छाछ, कांजी और कोम्बुचा मेरी पसंद थे.'' दिल्ली की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. मेघा जैना के मुताबिक, विटामिन के रासायनिक सप्लीमेंट के बजाए ताजे फल और सब्जियों से भरपूर आहार ऊर्जा के स्तर को फिर भरने में ज्यादा असरदार ढंग से मदद कर सकता है, क्योंकि शरीर प्राकृतिक स्रोतों से पोषक तत्व ज्यादा अच्छी तरह ग्रहण करता है. वे कहती हैं, ''कोविड के बाद का आहार तभी अच्छा होता है जब उसमें संतुलन और विविधता हो. एसिडिटी, पेट फूलने और कब्जियत सरीखे पाचन से जुड़े लक्षण हों तो न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेना जरूरी है ताकि पेट के स्वस्थ बैक्टीरिया बहाल किए जा सकें.''

मानसिक सेहत

सही पोषक आहार और आराम के अलावा यह भी जरूरी है कि मरीज अपना मानसिक तनाव कम करें. डॉ. चंद्रशेखर कहते हैं, ''सोशल मीडिया की वजह से वायरस, म्यूटेशन और वैक्सीन को लेकर व्यापक चिंता और दहशत है. ऑनलाइन आ रहे कई संदेश सही हैं, पर कई झूठे हैं और अफवाहें फैलाते हैं. इनसे कई मरीजों का मानसिक तनाव और बढ़ जाता है. कुछ लोग ऐसा इलाज कर बैठते हैं जिसे डॉक्टर मंजूर नहीं करते. सबसे अच्छी सिफारिश यही है कि डॉक्टर की सलाह से ही कोविड से उबरने की योजना बनाएं. कोविड के दौरान और बाद का इलाज मरीज की हालत और स्वास्थ्य के मानदंडों को ध्यान में रखकर करना होता है. यह ऑनलाइन जानकारियों के भरोसे नहीं किया जा सकता.''

मुंबई के मनोचिकित्सक डॉ. केदार तिल्वे कहते हैं कि मानसिक तनाव का शारीरिक ऊर्जा पर घातक असर हो सकता है. यह हमारे शरीर की बीमारी से उबरने की प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा डालता है. डॉ. तिल्वे कहते हैं, ''आपका दिमाग और शरीर गहराई से आपस में जुड़े हैं. चिंता, कम नींद और तनाव शारीरिक थकान बढ़ा देंगे.''

ऊर्जा की कमी और कमजोरी को समझना और इनसे निबटना मुश्किल हो सकता है. कई डॉक्टरों का कहना है कि मरीज को तनाव तब महसूस होता है जब वह कोविड के लक्षणों के जाने के बाद भी फौरन रोजमर्रा के काम शुरू नहीं कर पाते. मगर, जैसा कि विशेषज्ञ कहते हैं, कोविड ठीक होने के बाद भी बने रहने वाले इस लक्षण से जूझते वक्त आराम, पोषक आहार और दिमागी बेफिक्री का चोली-दामन का साथ है.

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