बिजनेस के गुर सिखाता ऑटो चालक
मिलिए उस शख्स से जिसे अपने काम में इतना मजा आता है कि बड़े-बड़े कारोबारी भी उस पर ध्यान दे रहे हैं

टी.वी.एस सोमू
चेन्नै के ऑटो ड्राइवर 38 वर्षीय अन्नादुरै ने सार्वजनिक परिवहन को एक नए स्तर पर ले जाकर हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. बड़े कॉर्पोरेट घरानों ने अपने कर्मचारियों से कारोबार प्रबंधन के बारे में बात करने के लिए उन्हें आमंत्रित किया. कई शीर्ष पदाधिकारियों ने उनकी तारीफ की.
आनंद महिंद्रा ने ट्वीट किया, ''अगर एमबीए के विद्यार्थी (अन्नादुरै के साथ) एक दिन बिता लें, तो वह ग्राहक अनुभव प्रबंधन का एक संक्षिप्त कोर्स हो जाएगा. यह शख्स महज एक ऑटो ड्राइवर नहीं है...बल्कि प्रबंधन का प्रोफेसर है.’’ हाल ही में तमिलनाडु के डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) डॉ. सी. सिलेंद्र बाबू ने अन्नादुरै को बुलाया था और उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया.
चेन्नै के इंजामबक्कम के रहने वाले अन्नादुरै ने अपने ग्राहकों के लिए यात्रा को खासतौर पर सुखद बनाने का फैसला लिया था. उनके ऑटो में यात्रियों के लिए कई सारे समाचार पत्र, साप्ताहिक पत्रिकाएं उपलब्ध रहती हैं. उनके ऑटो में एक छोटा सा स्मार्ट टीवी, मुफ्त वाइफाइ और एक फ्रिज भी है जिसमें ठंडा पानी तथा जूस उपलब्ध रहता है. यात्रियों के नाश्ते के लिए फलों, चॉकलेट और चिप्स से भरा एक जार भी रहता है. अन्नादुरै ने अपने ऑटो को डिजिटल टूल्स से भी लैस कर रखा है ताकि यात्रियों को उनकी यात्रा के आगे के ट्रैफिक के बारे में भी अंदाजा लग सके.
इससे बढ़िया और क्या होगा कि वे ये सारी सेवाएं मुफ्त में प्रदान करते हैं. अन्नादुरै कहते हैं, ''मैं यात्रियों के लिए उनकी यात्रा सुखद और उपयोगी बनाना चाहता हूं.’’ वे विकलांगों के लिए अतिरिक्त पहल भी करते हैं—मसलन, उन्होंने उन लोगों के लिए सांकेतिक भाषा उपकरण लगा रखा है जो सुन नहीं सकते.
वे अपने ऑटो में पांच-छह छाते भी रखते हैं ताकि अचानक बारिश होने पर वे उन्हें यात्रियों को दे सकें. उनके यात्री उस छाते को अपनी अगली यात्रा पर वापस कर सकते हैं. उनका कहना है कि उन्हें इसकी कोई फिक्र नहीं है कि यात्री छाता उन्हें वापस नहीं करके उन्हें कहीं धोखा न दें. उन्होंने यात्रियों की राय के लिए एक प्रणाली भी स्थापित कर रखी है और वे सर्वश्रेष्ठ सलाह देने वालों को इनाम भी देते हैं.
अन्नादुरै उत्साहपूर्वक बताते हैं, ''मैं अपनी सेवाओं के बारे में ग्राहकों की राय को समझने के लिए पांच सवाल के साथ एक कागज, एक पेन और एक पैड रखता हूं. आपको बस बॉक्स पर टिक करना है और अपना ईमेल एड्रेस लिखना है. मैं सर्वश्रेष्ठ सलाह को चुनता हूं और अपनी आमदनी से 1,000 रुपए का इनाम उसे लिखने वाले को देता हूं.’’
तो यह अलहदा और शानदार शख्स कौन हैं? अन्नादुरै बताते हैं, ''तंजावूर जिले में पेरावुरानी के पास रेट्टावयल गांव उनका गृहनगर है.’’ अपने पारिवारिक इतिहास को उन्होंने सरलता से बताया, ''मेरे पिता गणेशन भोजन पकाने में उस्ताद हैं. मेरी मां अमसावल्ली गृहिणी हैं. मेरा परिवार चेन्नै में 38 साल पहले आ गया था—तब मेरे पिता ने ऑटो चलाना शुरू किया. मैंने बारहवीं तक पढ़ाई की है.
मेरे माता-पिता ने मेरी पढ़ाई में काफी सहयोग दिया, लेकिन मैं कुछ और ही बनना चाहता था. मुझे अपने पिता का ऑटो चलाते हुए 12 साल हो चुके हैं. कुछ अलहदा करने का विचार उनके मन में कब आया? अन्नादुरै मुस्कुराते हुए बताते हैं, ''इस पेशे से मुझे वाकई प्यार है. मैंने सोचा कि अपने ऑटो में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कुछ सुविधाएं प्रदान करना अच्छा होगा. मैं उनकी यात्रा को सुखद बनाना चाहता हूं.’’ तकनीक-पसंद होने की वजह से अन्नादुरै ने कैशलेस लेन-देन लोकप्रिय होने से पहले ही क्रेडिट और डेबिट कार्ड के जरिए भुगतान स्वीकार करना शुरू कर दिया था.
उनके काम करने के अभिनव तौर-तरीके ने उन्हें शीर्ष पर पहुंचा दिया. उन्होंने गूगल और माइक्रोसॉफ्ट सरीखे दिग्गजों की ओर से आयोजित सम्मेलनों में भाषण दिया है. उन्हें 2020 में दिल्ली में एक बैठक में भी आमंत्रित किया गया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों ने हिस्सा लिया था.
सवारियों की उम्मीदों की समझ के जरिए उन्होंने अपने कामकाज का अलहदा तरीका विकसित किया है. वे बताते हैं, ''(अपनी यात्रा के दौरान) वे बस सुरक्षा का एहसास और सक्वमान चाहते हैं. हम कैसा दिख रहे हैं, यह भी मायने रखता है. मैं रोज अपनी दाढ़ी बनाता हूं और साफ-सुथरा रहता हूं. अपने यात्रियों को सेवा देने के दौरान मैं हमेशा यूनिफॉर्म पहनता हूं.’’
ग्राहक-केंद्रित पहलों के अलावा, अन्नादुरै परोपकारी सेवाएं भी प्रदान करते हैं. मिसाल के तौर पर वे शिक्षकों, डॉक्टरों, सफाईकर्मियों और नर्सों को मुफ्त की यात्रा कराते हैं. बाल दिवस पर वे बच्चों और महिला दिवस पर महिलाओं से पैसे नहीं लेते. वे अपनी गाड़ी में उपलब्ध सुविधाओं के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेते हैं और केवल सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क ही लेते.
वे कहते हैं, ''हर किसी को पैसे की दिक्कत होती है, लेकिन दूसरों की जेब से पैसे लेने के बारे में सोचना क्या गलत बात नहीं है? मैं पैसे पर ध्यान नहीं देता. अगर हम ईमानदारी के साथ अपने काम के प्रति सच्चे हैं तो ग्राहक हमारे पास वापस आएंगे.’’
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खुशी का मंत्र
''मैं इस करियर से दिल से प्यार करता हूं. मैंने सोचा कि यात्रियों के लिए कुछ सुविधाएं देना बढिय़ा रहेगा’’
-अन्नादुरै
—टी.वी.एस. सोमू.