सिनेमाः भारत की प्रतिनिधि फिल्में

दुनिया के प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में से एक बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में इस साल देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं दो प्रयोगात्मक फिल्में

ख्वाब-सा (बाएं) जोले डूबे ना के एक दृश्य में खेया चट्टोपाध्याय; द कोस्ट का एक दृश्य
ख्वाब-सा (बाएं) जोले डूबे ना के एक दृश्य में खेया चट्टोपाध्याय; द कोस्ट का एक दृश्य

दो अवां गार्द या पूरी तरह से अलग मिजाज वाली फिल्में हैं जो इस साल 71वें बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में देश को अपना चेहरा बचाने में मदद कर रही हैं. ये हैं दिल्ली के फोटोग्राफर-फिल्मकार सोहराब हुरा की 17 मिनट की शॉर्ट फिल्म द कोस्ट और नईम मोहाईमन की फीचर फिल्म जोले डूबे ना (वे जो डूबते नहीं), जो जापान-स्वीडन-भारत के सहनिर्माण में बनी 64 मिनट की फिल्म है.

दोनों फिल्में फेस्टिवल के प्रयोगात्मक फिल्मों वाले हिस्से 'फोरम एक्सपांडेड’ में शामिल की गई हैं, जो दूसरी कलाओं के साथ सिनेमा के रिश्तों की पड़ताल करता है. कोविड के चलते बर्लिनाले को दो हिस्सों में बांटा गया है. फिल्मों का चयन 1 से 5 मार्च तक यूरोपीय फिल्म बाजार को ऑनलाइन दिखाया जा रहा है, जबकि उत्सव स्थल यानी बर्लिन के सिनेमाघरों मे यह फेस्टिवल 9 से 20 जून के बीच होगा.

द कोस्ट प्रयोगात्मक शॉर्ट फिल्म है जिसमें कोई संवाद नहीं है. प्रतिष्ठित फोटोग्राफर, फिल्मकार, लेखक और मैगनम फोटोज के सदस्य हुरा की यह फिल्म तमिलनाडु के कुलशेखरपत्तनम का दशहरा देखती-दिखाती है. इसमें धार्मिक अनुष्ठान जोड़े गए हैं, जिनमें से कुछ हिंसक उन्माद जगाने वाले हैं—एक आदमी अपने सिर पर नारियल फोड़ता है.

तकरीबन सब कुछ दोहराव से भरा और स्लो मोशन में है, जिसमें यांत्रिक साउंड ट्रैक कुतूहल बढ़ा देता है. ढाका और लाहौर के रहने वाले माता-पिता की संतान हुरा कहते हैं, ''तट जगह बदल रहा है, बिल्कुल कगार पर आ गया है. जमीन ठोस और स्थिर है, लेकिन समुद्र की लहरें आपको ठीक से खड़ा नहीं रहने देतीं, अपनी स्थिति बदलने को मजबूर कर देती हैं. आज मैं दुनिया में ऐसा ही महसूस करता हूं.’’

लंदन में जन्मे फिल्मकार-कलाकार-लेखक नईम मोहाईमन की जड़ें बांग्लादेश में हैं. वे न्यूयॉर्क और ढाका के बीच काम करते हैं और दुनिया भर में अपने काम प्रदर्शित कर चुके हैं. बांग्ला में बनी उनकी फिल्म जोले डूबे ना बर्लिनाले में उनकी दूसरी फिल्म है. उनकी पहली शॉर्ट फिल्म अबू अमार इज कमिंग 2016 के फेस्टिवल में दिखाई गई थी.

दूसरों की देखभाल करने वालों की बाद की उनकी जिंदगी को दिखाने वाली जोले डूबे ना योकाहामा त्रिनाले 2020 जापान ने कमीशन, रक्स मीडिया कलेक्टिव ने क्यूरेट और बिल्डमुसीत स्वीडन ने को-कमीशन की थी.

कोलकाता के एक खाली अस्पताल की स्वप्निल दुनिया में रंजिशजदा युगल ज्योति (साग्निक मुखर्जी) और सूफिया (खेया चट्टोपाध्याय) एक अनजान बीमारी के बाद हिचकिचाहट के साथ फिर एक दूसरे के करीब आते हैं. ई-मेल के जरिए एक बातचीत में मोहाईमन बताते हैं, ''सूफिया की जिंदगी के आखिरी दिनों में ज्योति इस तरह उसे दुलारना और उसकी देखभाल करना चाहता है जिस तरह दवाई नहीं कर सकती.

सूफिया उसे बताती है कि प्लास्टिक-धातु के अवरोधों को हटा देना भी उसके लिए राहत हो सकती है; अपने साथी को भीषण अंतिम संस्कार से मुन्न्त करने की राहत.’’
जोले डूबे ना दिल्ली में 3-10 मार्च को (एक्सपेरिमेंटर, बीकानेर हाउस) और कोलकाता में 19 मार्च (एक्सपेरिमेंटर, बॉलीगंज प्लेस) को दिखाई जाएगी.
—मीनाक्षी शेड्डे

 

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