शब्दों की बुनियाद कत्ल
चेतन भगत का ताजा उपन्यास अगले महीने आ रहा है. देखें कि इसमें वे प्रेम और नफरत में कैसे संतुलन बिठाने की कोशिश करते हैं

श्रीवत्स नेवतिया
●आपके पिछले उपन्यास द गर्ल इन रूम 105 की बुनियाद कत्ल पर आधारित थी? आपके अगले उपन्यास का नाम ऐन अरेंज्ड मर्डर है. चेतन भगत क्या अपना जॉनर बदल रहे हैं?
कह सकते हैं. भई ऐन अरेंज्ड मर्डर है तो चेतन भगत की ही लिखी हुई. इसमें हिंदुस्तानी मिजाज की उलटबासियां, कॉमेडी और एक लव स्टोरी है. यह खांटी थ्रिलर नहीं है. पर बतौर एक लेखक मैं अपराध विधा की ओर बढ़ रहा हूं. आज चीजों से ध्यान बहुत जल्द हट जा रहा है, ऐसे में लड़के के लड़की को पा लेने से ज्यादा उत्तेजक होगा कि लड़के ने लड़की को मारा कैसे.
●कभी आपने राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की तुलना अरेंज्ड मैरिज से की थी. जब भी आप कोई सियासी रुख अख्तियार करते हैं, आपको अंदेशा होता है कि इससे आपके पाठकों का एक तबका आपसे अलग हो जाएगा?
मैं अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गया हूं जहां मैंने खुद को साबित कर दिया है. अगर मुझे लगता है कि कोई जरूरी बात है जिसे कहा जाना चाहिए तो एक ऐसे लेखक के तौर पर जो बड़े पैमाने पर पढ़ा जाता है, मैं वह क्यों न कहूं.
●परिवारवाद/भाई-भतीजावाद और अभिजात तबके का पक्षपात आज राष्ट्रीय चर्चा के विषय हैं लेकिन आप तो इन पर पहले से बोलते आ रहे हैं.
यह मेरा जेहाद है. मुझे लगता है कि बतौर लेखक मैं सामंती ढांचे को तोड़कर भारतीय समाज के लिए अपना योगदान कर सकता हूं. हिंदुस्तानियों को हर चीज एक जातिवादी ढांचे में ढाल देना बहुत भाता है. आप कितने ही कामयाब क्यों न हो जाएं, उस ऊंची ब्राह्मणवादी सतह पर नहीं पहुंच सकते, यह कड़वा सच है. यह सुशांत (सिंह राजपूत) के लिए सच था और यही मेरे लिए भी सच है.
●सोशल मीडिया पर आप अक्सर नफरत का शिकार हो जाते हैं. क्या इसे आप अपनी लोकप्रियता से जोड़कर देखते हैं?
सुशांत की मौत के बाद से मुझे नहीं लगता कि खुद से संवरे लोगों से नफरत करना या उनके काम को खारिज कर देना अब सहज बात रह गई है. अपनी नई किताब को लेकर मैं ट्रोल नहीं हो रहा हूं. संभ्रांत तबका चुप है. सुशांत की मनोदशा का मसला इससे जुड़ा था कि प्रेस में उनके साथ कैसा बर्ताव हुआ.