सिनेमाः गुरू दक्षिणा इरफान को

बकौल पंकज, ''अंग्रेजी मीडियम में मुझे बड़ा रोल ऑफर हुआ था पर व्यस्तता की वजह से मेरे लिए उसे कर पाना संभव नहीं हो पा रहा था. और इरफान की वजह से यह फिल्म मैं छोडऩा भी नहीं चाहता था. वजह: वे मेरी प्रेरणा रहे हैं.

 पंकज त्रिपाठी
पंकज त्रिपाठी

मायानगरी मुंबई आने से पहले अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने पटना में अपने आदर्श मनोज वाजपेयी की चप्पल को सहेजकर रख लिया था. लेकिन उनके गुरु दरअसल इरफान खान हैं. एजुकेशन सिस्टम पर चोट करने वाली फिल्म अंग्रेजी मीडियम में वे इरफान के साथ हैं. बकौल पंकज, ''अंग्रेजी मीडियम में मुझे बड़ा रोल ऑफर हुआ था पर व्यस्तता की वजह से मेरे लिए उसे कर पाना संभव नहीं हो पा रहा था. और इरफान की वजह से यह फिल्म मैं छोडऩा भी नहीं चाहता था. वजह: वे मेरी प्रेरणा रहे हैं. मुझ पर उनके ऐक्टिंग स्टाइल का प्रभाव है. मेरे अनुरोध पर मेरे लिए एक छोटा-सा रोल तैयार किया गया और मैंने किया. इरफान साहब के लिए यह मेरी तरफ से गुरु दक्षिणा है.'' 20 मार्च को रिलीज हो रही अंग्रेजी मीडियम में वे सकारात्मक किरदार में नजर आएंगे.

पंकज इन दिनों राजस्थान के चूरू में लक्ष्मण उतेकर निर्देशित मिमी फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं. इसकी कहानी राजस्थान पर आधारित है. पंकज बताते हैं, ''मिमी अब तक किए गए मेरे सभी किरदारों से बिल्कुल हटकर है. इसे करते हुए मन को बेहद सुकून मिल रहा है.''

सिनेमा में वे इतने व्यस्त हैं कि नई स्क्रिप्ट पढऩे तक के लिए समय नहीं है. इस साल उनकी सात फिल्में रिलीज होने वाली हैं. वेब पर उन्होंने अलग जगह बना रखी है. तीनों बड़े प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स, अमेजन और हॉटस्टार पर चल रहे क्रमश: सैक्रेड गेम्स, मिर्जापुर और क्रिमिनल जस्टिस सबसे कामयाब शो में से हैं और तीनों में पंकज केंद्रीय किरदारों में हैं. उनके शब्दों में, ''मैं हिंदुस्तान का इकलौता ऐक्टर हूं जो सभी बड़े प्लेटफॉर्म पर सीरीज कर रहा है. स्कॉटलैंड यात्रा के दौरान कई प्रशंसकों ने बताया कि उन्होंने मिर्जापुर और सैक्रेड गेम्स देखे हैं.'' अब उनकी मिर्जापुर-2 और क्रिमिनल जस्टिस सीरीज आने वाली है.

वेब और सिनेमा के लिए अभिनय में आखिर फर्क क्या है? वे बताते हैं, ''बतौर ऐक्टर कुछ भी फर्क नहीं. आजकल सिनेमा से ज्यादा डिजिटल की पहुंच है क्योंकि मोबाइल हर किसी के पॉकेट में है. जब, जहां चाहा, देख लिया. पर सिनेमा के लिए थिएटर में जाना होता है जहां समुदाय, समूह के साथ देखते हुए एक उत्सव का माहौल महसूस होता है.'' पंकज ऐसे ऐक्टर हैं, जो संवादों को सेल्फ सेंसर भी करते हैं. ''मैं बेवजह गालियां नहीं देता. मिर्जापुर में बमुश्किल दो जगह गाली दी है, वह भी बातों में भाव लाने के लिए. बहुत जागरूक रहता हूं.''

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