चुनावी रणनीति की संदर्भ पुस्तक
अमित शाह भाजपा की जीत के नायक बताए गए हैं और इसमें मोदी-शाह और जमीनी तैयारियों का बारीक ब्योरा भी है. इसमें शाह के 'थ्योरी ऑफ डिमंशिया' का जिक्र भी है. यानी चुनाव में प्रचार की शाह की समयबद्ध योजनाओं का खाका.

मंजीत ठाकुर
सत्ता में पांच साल रहने, नोटबंदी और जीएसटी जैसे अलोकप्रिय फैसलों के बावजूद भारत 2019 में मोदी के रंग में कैसे रंगता चला गया, पत्रकार संतोष कुमार की किताब भारत कैसे हुआ मोदीमय उसी विजय की अंतर्कथा के रहस्य ढूंढती है.
किताब के मुताबिक, मोदी की सुनामी तीन राज्यों में पराजय या फिर पुलवामा की घटना नहीं, बल्कि पिछले पांच साल तक संगठन और सरकार में अद्भुत समन्वय के साथ संगठन को ऊर्जावान बनाए रखने का नतीजा थी. बहरहाल, किताब पढऩे से पहले लेखक की इन पंक्तियों को दिमाग में बिठा लेंगे तो बाकी के अध्यायों की दिशा समझने में मुश्किल नहीं होगी.
किताब में अमित शाह भाजपा की जीत के नायक बताए गए हैं और इसमें मोदी-शाह और जमीनी तैयारियों का बारीक ब्योरा भी है. इसमें शाह के 'थ्योरी ऑफ डिमंशिया' का जिक्र भी है. यानी चुनाव में प्रचार की शाह की समयबद्ध योजनाओं का खाका.
आठ खंडों में बंटी किताब भाजपा की प्रचार रणनीति की परतें खोलती है. इसमें समर्थक बने कार्यकर्ता से लेकर विस्तार की रणनीति, दलितों पर पार्टी की दुविधा, हिंदुत्व पर नरम रुख, पार्टी की बूथ जीतने और महारथियों के अभियान पर जुट जाने की गाथा है. एक पूरा अध्याय विपक्ष की पराजित देहभाषा को समर्पित है.
असल में यह किताब एक भीमकाय पार्टी की चुनावी रणनीति की बारीकियों पर एक संदर्भ पुस्तक हो सकती है. पर किताब में कोई भी अध्याय भाजपा की जीत में आरएसएस की भूमिका पर रोशनी नहीं डालता और इसकी वजह से किताब अपूर्ण लगती है.ठ्ठ
भारत कैसे हुआ मोदीमय
लेखक: संतोष कुमार
प्रकाशक: प्रभात प्रकाशन, दिल्ली
कीमत: 300 रु.