''मैं अंग्रेजी टाइप नहीं हूं''
अली फजल जल्दी ही डेथ ऑफ द नाइल पर आधारित फिल्म में केनेथ ब्रैना के निर्देशन में काम करेंगे, स्वदेश में उन्हें अब भी एक बड़े मौके का इंतजार.

विक्टोरिया ऐंड अब्दुल के बाद अगली अंतरराष्ट्रीय फिल्म साइन करने में खासा वक्त लिया...
वीऐंडए ने मुझे धक्का देकर मेरे कंफर्ट जोन से बाहर निकाला. मैं ऐसे डायरेक्टर चाहता हूं जो ऐसा कर सकें. मैं देखता हूं कि पश्चिम के डायरेक्टर ज्यादा जोखिम उठाते हैं. मैं अगाथा क्रिस्टी और सर केनेथ ब्रैना का बड़ा मुरीद हूं. वे थिएटर के शख्स हैं जो अपना काम बखूबी जानते हैं. यह किसी सांचे में ढला नहीं है और सबसे ज्यादा इसी वजह से मैंने इसे स्वीकार किया. यह अग्रणी किरदार है.
क्या आपको लगता है कि बॉलीवुड आपकी प्रतिभा का अच्छा इस्तेमाल कर रहा है?
नहीं. फुकरे सरीखी फिल्में कोई भी आसानी से कर सकता है. हां, इन फिल्मों का हिस्सा बनना बहुत अच्छा है, पर मुझे हिंदुस्तान में अब भी ऐसे डायरेक्टर की तलाश है जो मुझ पर दांव खेल पाए. धारणा यह है कि अली फजल तो बारीक ऐक्टिंग करता है, वो आर्टी और अंग्रेजी टाइप लगता है. मैं वो सब हूं नहीं. एक्सेल के किसी शख्स ने हालांकि मिर्जापुर में वह जोखिम नहीं लिया.
अगर आप हॉलीवुड से कोई एक चीज वापस ला सकें तो वह क्या होगी?
हमें हकीकत से रू-ब-रू होने की जरूरत है. राजनीति और कला साथ-साथ चलते हैं. कलाकारों ने हमेशा आवाज उठाई है. अदाकार के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि ताकतवरों को रौंदने न दें. पश्चिम में #मीटू इसलिए हुआ क्योंकि कलाकारों ने इसकी जिम्मेदारी ली.
आपको लगता है कलाकारों का अपना नजरिया होना चाहिए?
हर वक्त सियासी तौर पर सही होने का क्या मतलब है? हमारी फिल्में लाखों लोग देखते हैं, जिन पर इकोनॉमी का सीधा असर पड़ता है. मुझे नहीं लगता कि हमें डरना चाहिए. हां, इसके खराब नतीजे होंगे, पर हम मजबूत लोग हैं.
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