थिएटरः बेगूसराय के खलीफा

पांच सिनेमाघरों में रजनीकांत की 2.0, भोजपुरी लागल नथुनिया के धक्का और केदारनाथ जैसी फिल्में चल रहे होने के बावजूद सड़क चलते लोग गुंजन को रोककर पूछ रहे हैं, "ई बताइए, अबकी कौन-कौन नाटक बुलाए हैं?''

प्रवीण गुंजन
प्रवीण गुंजन

भारत में नाट्य कला के सबसे प्रतिष्ठित केंद्र राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में प्रवेश इतना दुश्वार होता है कि हर साल कई प्रदेशों के एक भी छात्र को दाखिला नहीं मिल पाता. एक जिले की तो बात ही छोड़ दें. लेकिन इस साल बिहार के बेगूसराय जिले के तीन कलाकारों को इसमें कामयाबी मिली है. इनमें से दो—खुशबू कुमारी और चंदन कुमार—शहर के चर्चित रंगकर्मी, 42 वर्षीय प्रवीण कुमार गुंजन के ही ग्रुप द फैक्ट के हैं. तीसरे आलोक ने भी उनके साथ रंगकर्म किया है. लेकिन पचीसेक साल से मंच से जुड़े और खुद एनएसडी शिक्षित गुंजन इसे उपलब्धि से ज्यादा स्वाभाविक प्रक्रिया मानते हैं.

दरअसल, गुंजन ऊंचे ख्वाबों की बजाए यथार्थ की दुनिया में जीते रहे हैं. एनएसडी में प्रवेश के वक्त इंटरव्यू बोर्ड से उन्होंने साफ कह दिया था कि "मैं तुतलाता हूं इसलिए ऐक्टर नहीं बनूंगा. पर अभिनय करवा सकता हूं क्योंकि इसकी समझ है मुझे.'' उन्होंने इसका प्रमाण दिया समझौता नाटक में. मुक्तिबोध की इसी शीर्षक की कहानी पर तैयार एकल नाटक में मानवेंद्र त्रिपाठी ने कमाल का अभिनय किया. भारतीय रंगमंच का ऑस्कर माने जाने वाले "मेटा'' में उसके लिए उन्हें 2012 में श्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड मिला. 2009 में एनएसडी से निकलने के बाद गुंजन मुंबई, दिल्ली या पटना में डेरा डालने की बजाए सीधे बेगूसराय आ गए.

अब सवाल था कि एक टीम का और मंचन के लिए सुविधाओं-संसाधनों का. उन्होंने कस्बे और आसपास के गांवों के बीसेक युवाओं को जोड़कर द फैक्ट ग्रुप बनाया (पास के डुमरी गांव की खुशबू की आवाज में छिपी प्रतिभा उन्होंने उसी दौरान पहचानी). संसाधन जुटाने के अलावा नगर के लोगों से सीधे जुड़ाव के लिए वे वामपंथ, कांग्रेस, आरएसएस, जद (यू), राजद यानी हर विचारधारा वालों से राब्ता कायम किया. उसी का नतीजा है कि 21 दिसंबर से नगर के टाउनहॉल में होने जा रहे द फैक्ट के सातवें सालाना जलसे रंग-ए-माहौल के लिए जैसे पूरा शहर खड़ा हो गया.

पांच सिनेमाघरों में रजनीकांत की 2.0, भोजपुरी लागल नथुनिया के धक्का और केदारनाथ जैसी फिल्में चल रहे होने के बावजूद सड़क चलते लोग गुंजन को रोककर पूछ रहे हैं, "ई बताइए, अबकी कौन-कौन नाटक बुलाए हैं?'' उन्हीं के उत्सव में बेगूसराय के लोग कुलभूषण खरबंदा और आशीष विद्यार्थी सरीखे नामी अभिनेताओं का जीवंत अभिनय देख चुके हैं. चर्चित अभिनेत्री सीमा बिस्वास तो अगले हक्रते दूसरी बार नए नाटक के साथ आ रही हैं.

पर उत्सव की शुरुआत तो गुंजन निर्देशित एक अकेली औरत से ही होगी, जिसमें शहर के लोग एक बार फिर ठेठ गांव से निकली खुशबू की अभिनय प्रतिभा के गवाह बनेंगे.

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