किताब समीक्षाः पीआर और मीडिया को ऐसे समझें

बाजार, पब्लिक रिलेशन और नए माध्यमों के रिश्तों का विश्लेषण.

मीडिया और बाजार
मीडिया और बाजार

किताब की संपादक वर्तिका नंदा हैं. इसका प्रकाशन सामायिक बुक्स ने किया है.

यह पुस्तक जानी-मानी मीडियाकर्मी वर्तिका नंदा के हाथों संपादित पुस्तक है जिसमें जनसंपर्क से लेकर विज्ञापन की सीमाएं और प्रभाव का उदाहरणों के साथ कई लेखों में वर्णन किया गया है. लेखक कई हैं इसलिए उनकी गुणवत्ता भी उन्हीं के लिहाज से है.

वर्तिका लेखक और समाजसेवी दोनों हैं, लिहाजा उनके तजुर्बे और लहजा अलग है. लेखों के क्रम में दिलीप मंडल ने जनसंपर्क पर प्रभावी ढंग से पत्रकारिता और पब्लिक रिलेशनः में अपनी बात केस स्टडी के साथ रखी और समझाई है.

मंडल ने जनसंपर्क को विज्ञापन का पूरक और बिलकुल अलग असर देने वाला माध्यम करार दिया है. उन्होंने सिद्ध किया है कि विज्ञापन का सीमित असर होता है और इससे आगे जाने के लिए किस तरह कंपनियां जनसंपर्क का इस्तेमाल करती हैं.

इस लेख को पढऩे से कॉपोरेट की मीडिया के प्रति रणनीति का असली पहलू पाठकों के सामने आता है. जयदीप कर्णिक का चैराहे पर खड़ा सोशल मीडिया पठनीय है और प्रभाव छोड़ता है.

वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव की भूमिका मीडिया और बाजार मीडिया के सभी माध्यमों का बारीक विश्लेषण है जो सराहनीय है. उम्मीद है कि इस पुस्तक के चुनिंदा लेख मीडिया के बारे में पाठकों की समझ बढ़ाने में मददगार साबित होंगे. बाकी फैसला पाठक ही करेंगे.

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