फिरकी का जादूगर

राशिद खान और अफगानिस्तान की उनकी क्रिकेट टीम अगले हफ्ते बेंगलूरू में भारत के खिलाफ अपना पहला-पहला टेस्ट मैच खेलने जा रहे हैं

दिव्यांशु सरकार
दिव्यांशु सरकार

शम्या दासगुप्ता

शरणार्थियों की ओलंपिक टीम! 2016 के रियो डी जेनेरियो की छवियों में से शायद यही सबसे यादगार रही. बेशक उसने कोई मेडल नहीं जीता, लेकिन दर्शकों से तारीफ भरपूर हासिल की. और शरणार्थी अधिकारों पर चारों ओर चर्चाएं शुरू करवा लेना इस टीम की कोई कम बड़ी जीत नहीं थी.

अफगानिस्तान क्रिकेट टीम बेशक शरणार्थियों की नहीं है, लेकिन विश्व क्रिकेट में पहला कदम रखने वाली इस टीम के ज्यादातर खिलाड़ियों ने वर्षों चले युद्ध के दौरान पाकिस्तानी शरणार्थी शिविरों में रहते हुए इस खेल के गुर सीखे. भारत समेत तमाम पड़ोसी मुल्कों की तरह अफगानिस्तान में भी क्रिकेट भले ब्रिटिश काल से ही खेला जा रहा था पर अफगान क्रिकेट का जन्म पाकिस्तान में ही हुआ.

युद्ध की मार से तबाह अफगानिस्तान उस दौर से उबरने की कोशिश कर रहा है. वहां आतंकवादी हमले आज भी इतनी निरंतरता के साथ हो रहे हैं कि शांति दूर की कौड़ी नजर आती है. राशिद खान अभी बीस साल के भी नहीं हैं, लेकिन वे वहां किवदंती बनने की ओर हैं.

या फिर बन चुके हैं? बता पाना मुश्किल है. पर इतना तय है कि वे अफगानिस्तान के शीर्ष क्रिकेटर हैं. उनके शब्दों में, "हम रोजाना घरवालों का हाल-चाल लेते रहते हैं. लगातार दो-तीन दिन तक हम घर से बाहर नहीं रह सकते क्योंकि वहां कभी भी कुछ भी हो सकता है.''

बतौर क्रिकेटर राशिद की कई उपलब्धियां हैं. तेज लेग स्पिन डालने में उन्हें महारत है और नीची रहती घुमावदार गेंदों से लेकर तेजी से उछाल लेती गेंदों तक, उनके जादुई पिटारे में सब कुछ है. बड़े मौकों पर अफगानिस्तान के लिए बड़ी भूमिका निभाने वाला यह खिलाड़ी क्रिकेट की दुनिया का नायाब सितारा है.

आज दुनिया की हर टी-20 लीग उन्हें लेना चाहती है. वे करोड़ों कमा रहे हैं और टीमें उन्हें खुशी-खुशी पैसे दे रही हैं. वे बेहतरीन खिलाड़ी जो हैं. हाल ही आयरलैंड के साथ अफगानिस्तान को भी टेस्ट मैच खेलने वाले देशों में शुमार किया गया है और अपने देश को यह दर्जा दिलाने में भी राशिद की भूमिका कोई कम नहीं.

अफगानिस्तान बेंगलूरू में 14 जून से भारत के साथ अपने पहले-पहले टेस्ट मैच की तैयारी कर रहा है. अफगान टीम में राशिद की मौजूदगी का ही असर है कि भारत के लिए टेस्ट मैच को आसान नहीं माना जा रहा है.

युद्ध से जर्जर देश में बड़े लीग मैचों के स्टार और विश्व क्रिकेट में अभी-अभी पैर रखने वाले राशिद खान के लिए आखिर इन सबके क्या मायने हैं? यूं तो वे अफगानिस्तान में रहते हैं, लेकिन खेलने के सिलसिले में साल का ज्यादातर समय बाहर ही बीतता है. फिर भी उन्हें प्रशंसकों से घिरा नहीं पाएंगे. हंसते हुए वे इसकी वजह बताते हैं, "हम अमूमन बाहर नहीं निकलते. जाना जरूरी हुआ तो चेहरा छिपा लेते हैं.'' रेस्तरां वगैरह तो जाते होंगे? "हां, पर सिक्योरिटी के साथ.''

राशिद खान को मिल रहे प्यार-दुलार को समझा जा सकता है. 1970 के दशक में अफगानिस्तान युद्ध के मैदान में क्या तब्दील हुआ, तब से आज तक कमोबेश उसी हाल में है और अफगानों की जिंदगी में खुशी के मौके कम ही आते हैं. राशिद कहते हैं, "एक दफा हम मैच के लिए जा रहे थे. हमें कम से कम 20 जगहों पर रोका गया.

लोग कार रोक ले रहे थे, कहते थे, "रुकिए, हम आपकी तस्वीर लेना चाहते हैं.'' लोग इस कदर दीवाने हो रहे हैं. उन्होंने ऐसे खिलाडिय़ों को बस टीवी पर ही देखा है.'' तभी मैदान में उतरने पर राशिद पर पूरे देश की अपेक्षाओं का बोझ होता है. वे कहते हैं, "मैं एक भी मैच में बढिय़ा न खेल पाऊं तो वे परेशान हो जाते हैं.

उनकी हसरत है कि हर मैच में पांच विकेट लूं. न ले पाऊं तो कहते हैं, "तुम्हें क्या हो गया है?'' पर इस दबाव ने उनके हौसले को कम नहीं किया है. "मैं अपनी ओर से पूरी कोशिश करता हूं. मेरे हिसाब से तो सबसे बढिय़ा होता है कि खेल के मजे लो.

आप जितना इन्ज्वॉय करोगे, उतना अच्छा करोगे. हां, मेरे ऊपर इस वजह से दबाव जरूर होता है कि जितने मैचों में मैं बढिय़ा नहीं खेल सका, उनमें से ज्यादातर में हम हार गए.''

खिलाड़ी अक्सर कहते सुने जाते हैं कि यह सब प्रशंसकों के लिए है. पर जब बात अफगान क्रिकेटरों की हो तो इसके आयाम बदल जाते हैं. राशिद कहते हैं, "हमें घर की चिंता सताती रहती है. पिछले एक महीने में अफगानिस्तान में 3-4 बम धमाके हुए.

ये सब हमें बेहद मायूस कर जाते हैं. हम अपने लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने की कोशिश कर रहे हैं. हमारी कोशिश होती है कि थोड़ा और बेहतर खेल दिखाएं जिससे लोग जश्न मना सकें और उनके दिमाग से इस तरह की बुरी चीजें हट सकें.''

राशिद को दुनिया का बेहतरीन लेग स्पिनर ही नहीं, उन्हें मौजूदा समय के महान क्रिकेटर के रूप में देखा जा रहा है. पर आप महान क्रिकेटर तभी बन पाते हैं जब टेस्ट खेलें.

सुरक्षा कारणों से हर देश अफगानिस्तान की यात्रा से कतराता है. यही वजह है कि राशिद ने अब तक अपने सारे मैच देश से बाहर खेले हैं. वैसे, क्रिकेट की सबसे ऊंची श्रेणी में अफगानिस्तान को जगह देने की दुनियाभर में तारीफ हो रही है. राशिद कहते हैं, "अफगानिस्तान में क्रिकेट के लिए यह एक बड़ा मौका होगा.

एक टेस्ट क्रिकेटर कहलाने के लिए और इंतजार मुश्किल हो रहा है. मुझे नहीं लगता, अफगानिस्तान में ऐसा कोई भी होगा जो इस टेस्ट मैच को टीवी पर नहीं देखेगा. हम जब भी खेलते हैं, वो हमें देखना नहीं भूलते. टीवी पर नहीं तो ऑनलाइन ही सही.''

विश्व क्रिकेट में अफगानिस्तान का यह मुकाम पाना हाल के वर्षों में इस खेल की सबसे बड़ी घटना है और राशिद की चमक इस बात का सबूत कि महान खिलाड़ी बनने के लिए हमेशा पैसे और आधुनिक साधन की जरूरत नहीं होती. आधी सदी लंबी युद्ध की विभीषिका में भी वह पनप सकता है.

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