यहां तो रंगासामी सदाबहार
पुदुच्चेरी में मतदाताओं के बीच एन. रंगासामी की लोकप्रियता के बूते पर NDA ने कांग्रेस की अगुआई वाली चुनौती को ध्वस्त किया.

नटेशन रंगासामी पांचवीं बार पुदुच्चेरी के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. उनकी पार्टी ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (एआइएनआरसी) की अगुआई वाले एनडीए ने 30 सदस्यों वाली विधानसभा में 18 सीटें जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी. उसने कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन को करारी शिकस्त दी जिसे केवल छह सीटें हासिल हुईं.
सत्ता-विरोधी लहर और गठबंधन के हिसाब-किताब की वजह से मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद थी मगर रंगासामी की लोकप्रियता एक बार फिर विपक्ष के बिखरे हुए अभियान पर भारी पड़ी. एनडीए में एआइएनआरसी को 12 सीटों पर जीत मिली, भाजपा को चार तो अन्नाद्रमुक और लचिया जननायक काच्चि को एक-एक सीटें मिली हैं.
विचारधारा या पार्टी संगठन से ज्यादा, इस चुनाव ने रंगासामी के सियासी ब्रांड को फिर स्थापित किया है. दो दशकों से ज्यादा समय से लोगों के बीच आसान पहुंच, सादगी और कल्याणकारी शासन की छवि के बूते उनका यह सियासी ब्रांड तैयार हुआ है. राजनैतिक विश्लेषक मुदलवन कहते हैं, ''तमिलनाडु के विपरीत, यहां के नतीजे उम्मीदों के अनुरूप ही हैं. विपक्ष शुरू से ही लड़खड़ाता नजर आया.
नए रंगरूटों ने थोड़ी कोशिश जरूर की मगर उसका तमिलनाडु जितना बड़ा प्रभाव नहीं पड़ सका.’’
पुदुच्चेरी की राजनीति में निजी विश्वसनीयता अब भी निर्णायक भूमिका में है. एनडीए ने अपने अभियान में रंगासामी को सुशासन और निरंतरता के निर्विवाद चेहरे के रूप में पेश किया और इसका उसे बड़ा लाभ मिला. भाजपा भी चुनावी नैरेटिव में रंगासामी की मुख्य भूमिका से संतुष्ट नजर आई और इससे गठबंधन को काफी फायदा हुआ.
विपक्ष में तालमेल की कमी
दूसरी तरफ, कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन उल्टी ही समस्या से जूझता रहा. उसे उम्मीद थी कि उसे सत्ता-विरोधी रुझान, आर्थिक असंतोष और शासन को लेकर उठे सवालों का लाभ मिलेगा. मगर सीट-बंटवारे के मतभेद, आपसी महत्वाकांक्षाओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल की कमी की खबरों ने जमीनी स्तर पर भ्रम पैदा कर दिया.
विकास और प्रशासनिक मुद्दों पर सरकार को घेरने के बावजूद, विपक्षी गठबंधन रंगासामी को हटाए जाने की ठोस वजह नहीं दे पाया. रंगासामी जैसा भावनात्मक जुड़ाव रखने वाले किसी स्पष्ट मुख्यमंत्री के चेहरे के अभाव ने भी उसके अभियान को कमजोर किया.
22 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस केवल एक सीट जीत सकी. वहीं उसकी सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कलगम (द्रमुक) ने उसकी तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया और 13 सीटों पर लड़कर उनमें से पांच सीटें जीतने में कामयाब रही.
छोटी पार्टियों, निर्दलीयों और तमिलगा वेत्रि कलगम (टीवीके) और नयम मक्कल कलगम (एनएमके) सरीखी नई पार्टियों ने भी खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच खुद को विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश की.
मगर चुनाव जीतने के लिए आवश्यक संगठनात्मक ताकत उनमें नहीं थी. उनकी मौजूदगी ने सत्ता-विरोधी मतों को बांटने में भी योगदान दिया. वैसे टीवीके दो सीटें और एनएमके एक सीट हासिल करने में कामयाब रही. पुदुच्चेरी का 2026 का जनादेश स्थिरता की धारणा पर आधारित रहा. मतदाताओं ने बिखरे हुए विपक्ष के बजाए, जाने-समझे मॉडल को चुना.