बारूदी बुमरा
इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने हाल में बुमराह को लेकर कहा: ''सनकी बंदा है.’’

- निखिल नाज
अनुशासित, हुनरमंद, निर्विवाद और कामयाब—जसप्रीत बुमरा एक आदर्श खिलाड़ी की लगभग हर कसौटी पर खरे उतरते हैं. फिर भी उनके करिअर से मिलने वाला सबक थोड़ा उल्टा है. आम तौर पर बच्चों को सिखाया जाता है: अच्छी तैयारी करो, मेहनत से पढ़ो.
उसके बाद कोई भी विषय मुश्किल नहीं रहेगा. पर दुनिया भर के शीर्ष बल्लेबाजों से पूछिए, जिन्होंने पिछले एक दशक का बड़ा हिस्सा बुमरा की गेंदबाजी को समझने में लगा दिया, फिर भी अक्सर वे उनकी गेंदों के सामने ऐसे जड़-से खड़े रह जाते हैं जैसे आंखों को चौंधिया देने वाली रोशनी में कोई खरगोश.
और सिर्फ बल्लेबाज ही क्यों? जो गेंदबाज बुमरा की राह पर चलने की सोच रहे हैं, उन्हें भी शायद उस रास्ते से दूर ही रहना चाहिए. इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने हाल में आइसीसी पुरुष टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में भारतीय तेज गेंदबाज को इंग्लैंड के खिलाफ मैच पलटते देख कर इसे सबसे सटीक ढंग से कहा: ''सनकी है बंदा. उनसे आप सीखने की जहमत नहीं उठा सकते. आप ही बताइए! दुनिया में है कोई दूसरा गेंदबाज जो एक ओवर की छहों गेंदें यॉर्कर और स्टंप उड़ाने वाली डाल सके?’’
यह बात और भी अविश्वसनीय लगती है जब क्रिकेट आज सूक्ष्म वीडियो विश्लेषण और डेटा के युग में खेला जा रहा है. हर गेंद, हर ऐक्शन और हर रणनीति का बारीकी से अध्ययन किया जा सकता है. इसके बावजूद आज तक कोई भी ''जसप्रीत बुमरा को कैसे खेलें’’ नाम की कोई किताब नहीं लिख पाया है.
यह स्थिति हाल के वर्षों में सीमित ओवरों के कई अन्य तेज गेंदबाजों से बिल्कुल अलग है. कैगिसो रबादा, शाहीन शाह अफरीदी और एनरिख नॉर्किए जैसे गेंदबाजों ने अपनी गति, उछाल, स्विग और विविधताओं के दम पर विश्व क्रिकेट में जबरदस्त दबदबा बनाया. लेकिन ज्यादा समय नहीं लगा जब विरोधी टीमों ने उनकी गेंदबाजी को पढ़ना सीख लिया और उनके खिलाफ रणनीति भी तैयार कर ली.
भारतीय टीम में बुमरा के साथी वरुण चक्रवर्ती इसकी ताजा मिसाल हैं. टूर्नामेंट में उतरते समय दुनिया के नंबर एक टी20 गेंदबाज रहे इस 'मिस्ट्री स्पिनर’ की सफलता काफी हद तक उनकी बैक-ऑफ-द-हैंड गुगली पर टिकी थी, जो पारंपरिक लेग-ब्रेक से ज्यादा असरदार साबित होती थी.
लेकिन प्रतियोगिता के बीच तक आते-आते बल्लेबाजों ने उन्हें समझ लिया. जब तक वे 'उभरता खतरा’ थे, तब तक रडार से बाहर रहे. मगर जैसे ही उन्हें मैच जिताने वाले गेंदबाज के तौर पर पहचाना गया, टीमों ने जल्दी ही उनका तोड़ निकाल लिया.
बुमरा के साथ ऐसा नहीं है. उनकी गेंदबाजी में कोई रहस्य नहीं छिपा. जिसने भी इस गुजराती तेज गेंदबाज को करीब से देखा है, वह जानता है कि अगली गेंद क्या हो सकती है—अगर बाउंसर पर चौका पड़ा है तो अगली गेंद अक्सर यॉर्कर होगी; आक्रामक बल्लेबाज को वे धीमी गेंद से फंसाते हैं; और जो बल्लेबाज हिचकिचाता दिखे, उसके लिए ऑफ स्टंप के ऊपर की हार्ड लेंथ वाली गेंद तैयार रहती है.
फिर भी, बल्लेबाज चाहे जितना अनुमान लगा लें कि अगला हथियार कौन-सा होगा, उसे निष्प्रभावी करना उनके लिए लगभग नामुमकिन होता है. यही वजह है कि बुमरा को हाल ही दिया गया नया नाम—चीट कोड—भी पूरी तरह सटीक नहीं बैठता. वीडियो गेम की भाषा में कहा जाए तो जैसर कप्तान चाहे, बुमरा मैच का रुख पलट देते हैं. लेकिन फर्क इतना है कि वीडियो गेम के चीट कोड कभी न कभी समझ लिए जाते हैं; बुमरा का कोड आज तक किसी ने नहीं तोड़ा.
बुमरा को समझना मुश्किल क्यों
उनकी गेंदबाजी को पढ़ पाना इतना कठिन होने की सबसे बड़ी वजह उनका अनोखा गेंदबाजी ऐक्शन है. यह सिर्फ बल्लेबाजों को भ्रमित नहीं करता, बल्कि इसके पीछे का भौतिक विज्ञान उन्हें साधारण दिखने वाली तकनीकों से भी असाधारण नतीजे निकालने की क्षमता देता है. पहला धोखा उनके रन-अप से ही शुरू हो जाता है.
आम तौर पर 140 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार वाले गेंदबाज लंबा और तेज रन-अप लेते हैं. लेकिन बुमरा का रन-अप अपेक्षाकृत छोटा है, न बहुत तेज, न विस्फोटक. फिर भी वे लगातार 140 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार पैदा करते हैं. यही उन्हें तेज गेंदबाजों की दुनिया में एक अलग किस्म का खिलाड़ी बनाता है. उनके रन-अप में भले ही गति कम दिखे, लेकिन इससे उन्हें बेहतर नियंत्रण और ताकत का अधिकतम इस्तेमाल करने में मदद मिलती है.
इसका असली रहस्य उनकी डिलिवरी के समय फ्रंट लेग में छिपा है. गेंद रिलीज करते समय वे अपने घुटने को सीधा रखते हैं. इससे रन-अप से पैदा हुई आगे की गति एक तरह से गुलेल जैसे असर में तब्दील हो जाती है, यानी शरीर की ऊर्जा घुटने के झुकने में खत्म होने के बजाय ऊपर की ओर जाती है और सीधे गेंद में ट्रांसफर हो जाती है.
सरल शब्दों में कहें तो रन-अप से आई ताकत अचानक रुकने के उस क्षण में नीचे के शरीर से ऊपर के शरीर में ट्रांसफर हो जाती है. इसके बाद ऊपरी शरीर तेजी से घूमता है और गेंदबाजी वाला हाथ चाबुक की तरह आगे आता है. इस तेज घुमाव में उनकी कमर की भूमिका भी अहम होती है.
गेंद छोड़ने से ठीक पहले उनके कूल्हे बल्लेबाज की ओर घूमते हैं और उसके बाद कंधे—ठीक वैसे जैसे खिंचा हुआ रबर बैंड अचानक वापस अपनी जगह आता है. इसे ऐसे समझ सकते हैं जैसे कोई बल्लेबाज या गोल्फर अपने कूल्हों और कोर मसल्स की ताकत से शॉट में अधिकतम ऊर्जा पैदा करता है.
इसके बाद आता है बुमरा की गेंदबाजी का असली रहस्यमय हिस्सा, जो उनकी हाइपरएक्सटेंडेड एल्बो (कोहनी) में है. यह उन्हें जन्मजात मिला एक शारीरिक गुण है. गेंद छोड़ते समय उनकी कोहनी सामान्य गेंदबाजों की तुलना में लगभग 40-45 डिग्री तक पीछे की ओर मुड़ सकती है, और इसके साथ हल्का-सा लेटरल फ्लेक्शन भी जुड़ जाता है.
इस अनोखी बनावट से उनकी गेंदबाजी को एक और आयाम मिलता है. यह लगभग चाबुक जैसे झटके का असर पैदा करती है, जिससे गेंद उस गति से भी कुछ ज्यादा तेज निकलती है जितनी ताकत उनके घुटने, कोर मसल्स, कंधे और कोहनी से पहले ही पैदा हो चुकी होती है. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.
इसका आखिरी और बेहद अहम हिस्सा है कलाई का इस्तेमाल. कोहनी के इस अतिरिक्त लचीलेपन की वजह से बुमरा गेंद को अक्सर अपने सिर से लगभग एक फुट आगे छोड़ते हैं, यानी सामान्य गेंदबाजों की तुलना में बल्लेबाज के लगभग 40 सेंटीमीटर ज्यादा करीब. इससे बल्लेबाज के पास प्रतिक्रिया देने का समय और भी कम हो जाता है. साथ ही गेंद ऐसी जगह से आती है जिसकी बल्लेबाजों को आदत नहीं होती.
बल्लेबाजों को अचानक दबाव में डाल देने की यही क्षमता बुमरा को—भले ही सबसे तेज नहीं लेकिन—निश्चित रूप से क्रिकेट का सबसे घातक यॉर्कर गेंदबाज बनाती है. ज्यादातर तेज गेंदबाजों के लिए यॉर्कर डालना जोखिम भरा होता है. लेंथ जरा-सी भी चूक जाए तो वही गेंद हाफ-वॉली या फुल टॉस बन जाती है और बल्लेबाज उसे आसानी से बाउंड्री के पार पहुंचा देता है.
लेकिन बुमरा इन परेशानियों से लगभग अछूते रहते हैं. यही वजह है कि उनकी हाफ-वॉली और फुल टॉस भी शायद ही कभी सीमा रेखा के पार जाती हैं. और दिलचस्प बात यह है कि मैच के अहम पलों में बल्लेबाजों को अक्सर अंदाजा भी होता है कि अब यॉर्कर आने वाला है. इसके बावजूद वे उसे सही तरीके से खेलने में संघर्ष करते ही नजर आते हैं.
रहस्यमय भारतीय
उनके हथियारों में एक और अहम तत्व है—डिप. वही हाइपरएक्सटेंशन, जो उन्हें अतिरिक्त गति देता है, उनकी कलाई में गेंद को तेज बैकस्पिन देने की भी क्षमता देता है. गेंद छोड़ते समय पीछे की ओर घूमती यह स्पिन ऐसी ट्रैजेक्टरी बनाती है जिसमें गेंद बल्लेबाज तक पहुंचने से ठीक पहले अचानक ज्यादा नीचे गिरती है. यानी समान गति और रिलीज पॉइंट वाले दूसरे गेंदबाजों की तुलना में बुमरा की गेंद बल्लेबाज के सामने अचानक ज्यादा डिप करती हुई नजर आती है.
इससे एक तरह का भ्रम पैदा होता है—और यही भ्रम उनके एक और खतरनाक हथियार को ताकत देता है: स्लोअर बॉल. ज्यादातर तेज गेंदबाज स्लोअर बॉल के लिए ऑफ-कटर का सहारा लेते हैं. लेकिन बुमरा पारंपरिक ऑफ-कटर को जोरदार बैकस्पिन के साथ मिलाकर ऐसा मिश्रण तैयार करते हैं जिसे समझना बल्लेबाजों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है.
भारत और मुंबई इंडियंस के साथ कोच के तौर पर उनके साथ काम कर चुके पारस म्हांब्रे इंडिया टुडे से कहते हैं, ''बल्लेबाज को लगता है कि गेंद उसके शॉट की रेंज में है और वह मारने के लिए तैयार हो जाता है. लेकिन उसी समय गेंद उसके सामने अचानक तेजी से नीचे गिर जाती है. ऊपर से उनकी तेज और धीमी गेंद के ऐक्शन में लगभग कोई फर्क नहीं होता—इससे बल्लेबाज के लिए उन्हें समझना और भी मुश्किल हो जाता है.’’
दिलचस्प बात यह है कि आज जिस चीज ने बुमरा को क्रिकेट का इतना बड़ा सितारा बनाया—उनका अनोखा ऐक्शन—वह न तो स्वाभाविक था और न ही किसी ने उन्हें सिखाया था. खुद बुमरा बताते हैं कि किशोरावस्था में वे अपनी गेंदबाजी का ऐक्शन लगातार बदलते रहते थे. टीवी पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट देखते हुए जिस गेंदबाज से प्रभावित होते, उसी की नकल करने लगते. करीब 17 साल की उम्र में उनका मौजूदा ऐक्शन इसलिए स्थिर हो गया क्योंकि उसी में उनके शरीर पर सबसे कम दबाव पड़ता था. बस यही कारण था.
कौशल होना एक बात है, और उन्हें लगातार सटीकता के साथ लागू करना बिल्कुल दूसरी. इसलिए बुमरा की सफलता को केवल बायोमैकेनिक्स का नतीजा मानना उनके साथ अन्याय होगा. अपनी पीढ़ी के शायद सबसे बेहतरीन तेज गेंदबाज की कहानी इससे कहीं बड़ी है. मोहम्मद अली के शब्दों में कहें तो, ''इच्छाशक्ति कौशल से भी ज्यादा मजबूत होनी चाहिए.’’
बुमरा की घातक यॉर्कर सिर्फ उनके अनोखे ऐक्शन की देन नहीं हैं. इसके पीछे उनकी वह आदत भी है जो बचपन में टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते हुए विकसित हुई. उस खेल में न तो स्विंग होती है, न सीम और न ही बाउंसर. ऐसे में बल्लेबाज को आउट करने का सबसे भरोसेमंद तरीका था: तेज गेंद से सीधे स्टंप्स पर हमला करना.
बुमरा ने उसी सोच को अपने करिअर के साथ आगे बढ़ाया. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी, जहां कभी-कभी परिस्थितियां गेंदबाज को मूवमेंट का फायदा देती हैं, वे अब भी स्टंप्स पर अटैक करना नहीं छोड़ते. यह उनकी गेंदबाजी के पीछे छिपी एक गहरी खूबी को दिखाता है: साहस.
जब दुनिया के कई बेहतरीन गेंदबाज किसी आक्रामक बल्लेबाज के सामने ऑफ स्टंप के बाहर वाइड लाइन अपनाते हैं—कभी-कभी कई वाइड फेंकने का जोखिम उठाकर भी सिर्फ बाउंड्री से बचने के लिए—तब बुमरा उल्टा रास्ता चुनते हैं. जब सामने बल्लेबाज पूरी लय में होता है, तब भी वे बचाव के बजाय हमला जारी रखते हैं. माइक टायसन का मशहूर कथन है, ''हर किसी के पास योजना होती है, जब तक कि उसे मुंह पर पहला घूंसा न पड़ जाए.’’ लेकिन बुमरा को देखकर लगता है कि वे इस कहावत को ही बेअसर साबित करने के मिशन पर हैं.
बुमरा के दिमाग के भीतर
बहुत आक्रामक बल्लेबाजों के सामने भी बुमरा की निर्भीक और लगातार आक्रामक रणनीति सिर्फ साहस नहीं, बल्कि बेहद प्रभावी रणनीति भी साबित हुई है. उनका पुराना फॉर्मूला—'तुम चूके नहीं कि मैंने ठोंका नहीं’—बल्लेबाज को कभी भी खुलकर खेलने का मौका नहीं देता. क्योंकि ज्यादातर गेंदबाजों की तरह बुमरा किसी सुरक्षित रास्ते की तलाश नहीं करते. यही रणनीतिक समझ, असाधारण कौशल और अनुशासन के साथ मिलकर उन्हें लगभग अजेय बनाती है.
इसकी सबसे ताजा मिसाल आइसीसी पुरुष टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के सबसे खतरनाक बल्लेबाज हैरी ब्रूक के खिलाफ उनकी पहली ही गेंद थी. आम तौर पर क्रिकेट की पारंपरिक समझ कहती है कि धीमी गेंद का इस्तेमाल तेज गति वाली गुड लेंथ या शॉर्ट गेंद के बाद किया जाता है. लेकिन ब्रूक की आक्रामक प्रवृत्ति को भांपते हुए बुमरा ने पहली ही गेंद स्लोअर डिलिवरी डालकर उन्हें चौंका दिया.
पूर्व भारतीय गेंदबाजी कोच पारस म्हांब्रे याद करते हैं, ''कई बार राहुल (द्रविड़), विक्रम (राठौर) और मैं डगआउट में बैठकर मैच का विश्लेषण करते थे और सोचते थे कि इस बल्लेबाज को आउट करने के लिए अभी शायद यही गेंद सही होगी. और फिर हैरानी होती थी जब बुमरा ठीक वही गेंद डाल देते थे.
लगभग हर बार. ऐसा लगता था जैसे वह हमारे दिमाग पढ़ रहे हों या हमारी बातचीत सुन रहे हों. खेल की स्थिति को समझने की उनकी क्षमता बहुत दुर्लभ है.’’ यही वजह है कि कभी बुमरा को भारत का अगला टेस्ट कप्तान भी माना जा रहा था. अगर चोटों ने उन्हें साल भर खेलने से न रोका होता, तो शायद भारत के कप्तान के रूप में उनके नाम सिर्फ तीन टेस्ट से कहीं ज्यादा मैच होते.
क्रिकेट इतिहास में तीनों प्रारूपों में अलग-अलग समय पर नंबर एक गेंदबाज बनने वाले वे पहले गेंदबाज हैं. भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव उन्हें ''पीढ़ी में एक बार पैदा होने वाला गेंदबाज, एक राष्ट्रीय धरोहर’’ कहते हैं. वे कहते हैं, ''उन्हें पता होता है कि क्या करना है और कैसे करना है...
वे इस खेल के सबसे बेहतरीन गेंदबाज हैं.’’ लेकिन शायद वे उससे भी कुछ ज्यादा हैं. इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज स्टीव फिन ने इसे सबसे सही शब्दों में व्यक्त किया है: ''बाकी सभी इंसान हैं. अच्छे गेंदबाज होते हैं, महान गेंदबाज होते हैं—और फिर एक होते हैं जसप्रीत बुमरा.’’ और शायद यही उनकी असली पहचान है.
पीढ़ियों में एकाध बार पैदा होने वाला गेंदबाज...वे एक राष्ट्रीय धरोहर हैं. उन्हें पता है कि क्या करना है और कैसे करना है...वे इस खेल के सबसे बेहतरीन गेंदबाज हैं.
एक साधारण मध्यवर्गीय परिवार की तरह तमाम आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझने के बावजूद दलजीत ने क्रिकेट के प्रति अपने बेटे के जुनून को हमेशा प्रोत्साहित किया
भरा-पूरा करिअर
उनकी खोज होने से लेकर महानता की ऊंचाई हासिल करने तक—ये पड़ाव बताते हैं कैसे बना बुमरा का करिअर
2013
●सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में गुजरात बनाम मुंबई टी20 मैच देखने पहुंचे पूर्व न्यूजीलैंड क्रिकेटर और मुंबई इंडियंस के कोच जॉन राइट की नजर 19 साल के एक गेंदबाज के 'अनोखे ऐक्शन’ पर टिक जाती है. घरेलू टी20 में सिर्फ एक सीजन खेलने के बाद ही बुमरा को मुंबई इंडियंस साइन कर लेती है
●किस्सा मशहूर है कि जब उन्हें मुंबई के नेट्स में लाया गया तो सचिन तेंडुलकर ने जॉन राइट से कहा, ''इसे बंदे की गेंद पढ़ पाना तो बहुत ही मुश्किल है.’’
2016
●भारत के लिए वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टी20 सीरीज में 6 विकेट लेकर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बनते हैं
2017
●आइपीएल चैंपियन मुंबई इंडियंस के लिए 20 विकेट लेकर टीम के सबसे सफल गेंदबाज
2018
●दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट डेब्यू. जोहानिसबर्ग टेस्ट में पांच विकेट
●मेलबर्न टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 6/33 और 3/53 जैसी परफॉर्मेंस के साथ भारत को बॉर्डर-गावस्कर सीरीज में 2-1 की अजेय बढ़त दिलाते हैं
2019
● कम स्कोर वाले आइपीएल फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच. एक बार फिर मुंबई इंडियंस के लिए 19 विकेट लेकर सबसे सफल गेंदबाज
2022
● पीठ की चोट के कारण एशिया कप, टी20 विश्व कप और 2023 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल से बाहर
2023
●आइसीसी क्रिकेट विश्व कप में 20 विकेट. भारत उपविजेता रहा
2024
● टी20 विश्व कप जीत अभियान में 15 विकेट और 4.17 की शानदार इकॉनमी. प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुने जाते हैं
2024-25
● बॉर्डर-गावस्कर सीरीज में 5 टेस्ट में 32 विकेट, औसत 13.06—विदेशी दौरे पर किसी भारतीय गेंदबाज का सर्वाधिक. ऑस्ट्रेलिया सीरीज 3-1 से जीतता है, लेकिन प्लेयर ऑफ द सीरीज बुमरा
●आइसीसी मेन्स क्रिकेटर ऑफ द ईयर और टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर घोषित
2026
●टी20 विश्व कप फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच. पूरे टूर्नामेंट में 14 विकेट लेकर साथी वरुण चक्रवर्ती के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने.