छोटे व्यापार का बढ़े आकार
बजट में इक्विटी, जल्द भुगतान और अनुपालन सुधारों के जरिए उम्मीद की गई कि एमएसएमई छोटे आकार के लेवल से आगे बढ़ेंगे

बजट में एमएसएमई (कुटीर, लघु और मझोले उद्यमों) के लिए कई कदम उठाए गए हैं. यह क्षेत्र भारत के मैन्युफैक्चरिंग आधार, निर्यात बढ़ाने और रोजगार के लिए बहुत जरूरी है. इससे 7.6 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड उद्यम जुड़े हैं, जिनका देश के कुल वाणिज्यक निर्यात में लगभग आधा योगदान है.
बजट में 10,000 करोड़ रुपए का समर्पित एसएमई ग्रोथ फंड बनाने, ट्रेड्स (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) फाइनेंसिंग और 'कॉर्पोरेट मित्र’ शुरू करने के प्रस्ताव हैं, जिनका लक्ष्य इन उद्यमों के लिए इक्विटी आधारित ग्रोथ, नकदी समर्थन और अनुपालन आसान बनाना है.
सीमित सहायक गारंटी की वजह से ज्यादातर उद्यमों को बैलेंस शीट के हिसाब से मिलने वाले बैंक लोन पर निर्भर रहना पड़ता है. इससे असली बढ़ोतरी के बजाए सिर्फ थोड़ी-बहुत वृद्धि हो पाती है. हैरानी की बात नहीं है जो 99 फीसद से अधिक एमएसएमई बहुत ही छोटे सेगमेंट में फंसे हुए हैं. उम्मीद है कि प्रस्तावित एसएमई ग्रोथ फंड से उनकी इक्विटी पूंजी तक पहुंच बेहतर होगी और मझोले आकार की फर्मों को बड़ा बनने में मदद मिलेगी.
साथ ही आत्मनिर्भर भारत फंड भी उसमें मददगार होगा, जिसे 2021 में शुरू किया गया था और जो 2,000 करोड़ रुपए का है. इसका मकसद अति लघु इकाइयों को मदद देना और जोखिम पूंजी तक उनकी पहुंच बनाना है. फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो ऐंड स्मॉल ऐंड मीडियम एंटरप्राइजेज के महासचिव अनिल भारद्वाज कहते हैं कि इसमें कारोबार बढ़ाने में लंबे समय की चुनौतियों पर ध्यान दिया गया है, लेकिन इन्हें कैसे लागू किया जाएगा, इसके ब्योरे का अभी इंतजार है.
देर से भुगतान के कारण एमएसएमई की कामकाजी पूंजी पर दबाव पड़ रहा है. ट्रेड्स प्लेटफॉर्म्स के अच्छे नतीजे मिले हैं. अब केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) के लिए अनिवार्य किया गया है कि अपनी खरीद इसके माध्यम से करें. पहले, यह 250 करोड़ रुपए से अधिक कारोबार वाले सीपीएसई के लिए अनिवार्य था. सीआइआइ नेशनल एमएसएमई काउंसिल की पॉलिसी एडवोकेसी के चेयरमैन तथा फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज के प्रबंध निदेशक अशोक सैगल कहते हैं, ''एमएसएमईडी कानून के तहत ट्रेड्स प्लेटफॉर्म्स में एमएसएमई को 45 दिनों के अंदर भुगतान का भरोसा रहता है.’’
इसके अलावा ट्रेड्स के तहत इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए सीजीटीएमएसई (क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो ऐंड स्मॉल एंटरप्राइजेज) के जरिए क्रेडिट गारंटी सपोर्ट की व्यवस्था शुरू की गई है. इससे यह होगा कि सरकारी उपक्रमों को सप्लाइ करने वाले छोटे और मझोले उद्योग, जिनकी बैलेंस शीट कमजोर है, अपने बिल को अच्छी रेट पर डिस्काउंट करवा सकें.
गेम और डन ऐंड ब्रैडस्ट्रीट की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि 2020-21 में उद्यम जितना छोटा था, उसे पेमेंट मिलने में उतना ही ज्यादा समय लगा: कुटीर इकाइयों को 195 दिन तो छोटे उद्यमों को 68 दिन और मझोली फर्मों को 47 दिन, जबकि एमएसएमईडी कानून में 45 दिन के अंदर भुगतान जरूरी है. 2020 में प्रशासनिक इकाइयों ने 69 फीसद भुगतान तय तारीख से 60 दिन से ज्यादा की देरी से की.
ट्रेड्स प्लेटफॉर्म आरएक्सआइएल के प्रबंध निदेशक तथा सीईओ केतन गायकवाड़ ने ट्रेड रिसीवेबल्स को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज के तौर पर शुरू करने के प्रस्ताव को दूरदर्शी सुधार बताया है. यानी ट्रेड से मिलने वाली राशि को ही जमानत मान लिया जाए. उन्होंने कहा कि इसमें नए तरह के निवेशकों को आकर्षित करने और एमएसएमई रिसीवेबल्स के लिए सेकंडरी मार्केट विकसित करने की क्षमता है जिससे उनको अतिरिक्त नकदी मिलेगी.
इसके अलावा, 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टरों में फिर से जान फूंकने की योजना है जिसके तहत बिजली, पानी, लॉजिस्टिक्स और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे साझा बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाया जाना है. इससे लागत प्रतिस्पर्धा और दक्षता में खासा इजाफा हो सकता है और क्लस्टर के भीतर काम करने वाली इकाइयों के खर्च भी कम होंगे. इससे उनके लिए कारोबार में वृद्धि की राह खुलेगी और टेस्टिंग और क्वालिटी सर्टिफिकेशन सेंटरों जैसी सुविधाओं से टेक्नोलॉजी अपग्रेड हो सकेगी.
एमएसएमई जब औपचारिक तंत्र में शामिल होते हैं तो उनके लिए अनुपालन की जरूरतें बढ़ जाती हैं. इसके लिए उनको 'कॉर्पोरेट मित्र’—मान्यता प्राप्त पैरा-प्रोफेशनल, खासकर मझोले और छोटे शहरों में—की सुविधा देने का प्रस्ताव है जिससे एमएसएमई को कम लागत पर अनुपालन के दायित्व पूरे करने में मदद मिलनी चाहिए. अब इस क्षेत्र में सुधार का व्यापक खाका खिंच गया है. इन बातों पर किस तरह अमल होता है, उसी से एमएसएमई की आगे की राह तय होगी.